कैसे एटॉमिक बटन दबा सकते हैं भारत और पाकिस्तान के पीएम!

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Updated: August 22, 2019, 1:37 PM IST
कैसे एटॉमिक बटन दबा सकते हैं भारत और पाकिस्तान के पीएम!
नरेंद्र मोदी और इमरान खान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran khan) की परमाणु युद्ध (Atomic War) की धमकी के बाद ये जानना जरूरी है कि क्या वास्तव में भारत और पाकिस्तान (India-Pakistan) के प्रधानमंत्री खुद परमाणु बटन पर हाथ दबाकर न्यूक्लियर लड़ाई शुरू कर सकते हैं.

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) ने भारत के खिलाफ परमाणु युद्ध (Atomic War) की धमकी दी है. उन्होंने द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में ये गीदड़भभकी दी. कश्मीर (Kashmir) को लेकर पाकिस्तान का रवैया आक्रामक हो गया है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि भारत और पाकिस्तान के लिए एटॉमिक बटन (Atomic Button) पर हाथ रखना कितना आसान या मुश्किल है.

भारत ने अपनी बहुत साफ न्यूक्लियर कमांड पॉलिसी बना रखी है. इसके लिए उसने एक ऐसा अधिकार संपन्न दल बनाया है, जिसे न्यूक्लियर कमांड अथॉरिटी कहा जाता है. ये दल तय करता है कि हमें अपने देश के परमाणु हथियारों का क्या करना है.

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युद्ध की सूरत में हम उसका इस्तेमाल करें या नहीं. हालांकि ऐसी ही संस्था पाकिस्तान में भी है, लेकिन दोनों ही देशों में प्रधानमंत्री के पास अधिकार है कि वो अपने विवेक से इस बटन पर 'हाथ' रख सकते हैं.

भारत में इसके लिए बनी है एक कमांड
भारत में न्यूक्लियर कमांड अथॉरिटी (Nuclear Command Authority) की एग्जिक्यूटिव काउंसिल के हेड राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार होते हैं. लेकिन इसमें उनके साथ तीनों सेनाओं के प्रमुख, डीआरडीओ के टॉप अधिकारी और एटॉमिक एनर्जी के प्रमुख समेत कई अन्य लोग भी हो सकते हैं. लेकिन आमतौर पर ये काउंसिल प्रधानमंत्री को परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की सलाह देती है.

प्रतीकात्मक तस्वीर

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किसके पास होती है असली ताकत 
उस सलाह पर मूल तौर पर न्यूक्लियर कमांड अथॉरिटी (एनसीए) की पॉलिटिकल काउंसिल विचार करती है, क्योंकि असली ताकत इसी परिषद के पास होती है. इसके मुखिया प्रधानमंत्री होते हैं. इसके अलावा पॉलिटिकल काउंसिल में गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, वित्त और विदेश मंत्री भी शामिल होते हैं. वैसे अगर प्रधानमंत्री चाहें तो खुद ब खुद परमाणु बम के बटन को दबाने यानी न्यूक्लियर हथियार को चला सकते हैं.

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पाकिस्तान में कौन दबा सकता है परमाणु बटन
पाकिस्तान (Pakistan) में भी परमाणु बटन दबाने की ताकत द नेशनल कमांड अथॉरिटी यानि एनसीए के पास है. ये पाकिस्तान के सभी तरह के परमाणु हथियारों पर नियंत्रण रखती है. पाकिस्तान की ये संस्था वर्ष 2000 में बनाई गई. इसका चेयरमैन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री होते हैं. इसमें भी दो तरह की परिषद होती हैं, एक परिषद में सियासी यानी नागरिकों द्वारा चुने लोग होते हैं और दूसरी परिषद में सैन्य अधिकारी. यूं तो इस पूरी अथॉरिटी का मुख्य यानी चेयरमैन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री होते हैं लेकिन पाकिस्तानी सेना के प्रमुख की हैसियत भी कम नहीं होती. बगैर उसके चाहे पाकिस्तान का प्रधानमंत्री शायद ही इस परमाणु बटन को दबा सकता है.

प्रतीकात्मक तस्वीर


पाकिस्तान की अथॉरिटी में कौन कौन 
पाकिस्तान की नागरिक परिषद में प्रधानमंत्री, विदेश, गृह, वित्त, रक्षा और रक्षा उत्पादन मंत्री होते हैं और सैन्य परिषद में सेना के तीनों अंगों के प्रमुख के साथ स्ट्रैटेजिक प्लान डिविजन के डायरेक्टर जनरल भी होते हैं. इस परिषद का प्रमुख सेना प्रमुख होता है.

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पाक पीएम को सेना प्रमुख की सलाह जरूरी
प्रधानमंत्री को सेना प्रमुख की सलाह पर ये फैसला लेना होता है. वो खुद ब खुद ऐसा नहीं कर सकता. लेकिन एनसीए का संविधान कहता है कि पाकिस्तान को अगर न्यूक्लियर हथियारों का इस्तेमाल करना है तो एनसीए की सहमति होनी चाहिए. हालांकि 2008 में पाकिस्तान में एक कानून बनाया गया था, जिसमें पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को इस संस्था का प्रमुख बनाया गया.

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अमेरिका के पास न्यूक्लियर फुटबॉल
अमेरिका में परमाणु बटन की नीति बिल्कुल साफ है. ऐसा सिस्टम दुनिया में शायद ही किसी देश के पास हो. अमेरिका में न्यूक्लियर बटन को 'न्यूक्लियर फुटबॉल' (Nuclear Football) कहा जाता है. जब भी अमेरिका का राष्ट्रपति कहीं जाता है या व्हाइट हाउस में होता है तो उसके साथ एक ब्रीफकेस भी होता है. उस काले रंग के ब्रीफकेस में एक सिस्टम होता है, जिसमें लांच कोड डालना होता है.

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कोड दबाते ही सेटेलाइट सक्रिय हो जाता है
इस लांच कोड को दबाते ही परमाणु हथियारों के लिंक सेटेलाइट से जुड़ जाते हैं और ये सक्रिय हो जाती है. अगर किसी कारण प्रेसीडेंट इस फुटबाल को दबाने की स्थिति में नहीं हैं तो ये अधिकार खुद ब खुद उप राष्ट्रपति के पास चला जाएगा. उसके बाद वहां के गृह, रक्षा, वित्त, विदेश मंत्री समेत कुल 15 लोगों के नाम सूची में होते हैं.

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First published: August 22, 2019, 11:32 AM IST
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