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संडे स्पेशल: एक दशक में पांच बार ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर चुका है WHO, क्यों और कब

News18Hindi
Updated: February 2, 2020, 2:08 PM IST
संडे स्पेशल: एक दशक में पांच बार ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर चुका है WHO, क्यों और कब
विश्व स्वास्थ्य संगठन बीते एक दशक के दौरान पांच बार ग्लोबल मेडिकल इमरजेंसी घोषित कर चुका है.

साल 2005 में ऐसा प्रावधान किया गया था कि अगर WHO को लगता है कि किसी बीमारी का असर दुनियाभर में फैल सकता है तो वो ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर सकते हैं.

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  • Last Updated: February 2, 2020, 2:08 PM IST
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खतरनाक कोरोनावायरस से जूझ रहे चीन के बाद इसका खतरा अन्य देशों में फैलने की आंशका है. इसे देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दी है. दरअसल किसी वायरस या बीमारी के वैश्विक दुष्प्रभाव के मद्देनजर विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञ ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी पर फैसला लेते हैं. गौरतलब है कि बीते एक दशक के दौरान WHO पांच बार ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी की घोषणा कर चुका है. साल 2005 में ऐसा प्रावधान किया गया था कि अगर WHO को लगता है कि किसी बीमारी का असर दुनियाभर में फैल सकता है तो वो ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर सकते हैं. इसे 'Public health emergency of international concern' या PHEIC कहा जाता है. 2005 के बाद अब तक विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसका इस्तेमाल सिर्फ 6 बार किया है.

इबोला (2014 और 2019)
संयुक्त राष्ट्र संघ से वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन ने खतरनाक बीमारी इबोला से आगाह करने के लिए दुनियाभर में इसे लेकर सबसे पहले 2014 में इंटरनेशनल इमर्जेंसी घोषित की थी. बाद में 2019 में भी इसे लेकर एक बार फिर ग्लोबल इमरजेंसी घोषित की गई. कई सालों से उच्च संक्रामक वायरस वाले इबोला का खतरा दुनिया पर बना हुआ है. पहले केवल इसका कहर केवल अफ्रीका पर था लेकिन फिर माना गया किकि ये पूरी दुनिया को भी लपेटे में ले सकती है.



इबोला एक उच्च संक्रामक वायरस है, जिससे संक्रमित लोगों के मरने की संभावना 90 फीसदी तक होती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इबोला वायरस रोग (ईवीडी) को पहले इबोला रक्तस्रावी बुखार के रूप में जाना जाता था. यह मनुष्यों के लिए घातक बीमारी है. ये वायरस जंगली जानवरों से लोगों में फैलता है. फ्रूट बैट यानी चमगादड़ इबोला वायरस का प्राथमिक स्रोत है. इबोला वायरस दो से 21 दिन में शरीर में पूरी तरह फैल जाता है. इसके संक्रमण से कोशिकाओं से साइटोकाइन प्रोटीन बाहर आने लगता है. कोशिकाएं नसों को छोड़ने लगती हैं. उससे खून आने लगता है.

ज़ीका (2016)
साल 2016 में ज़ीका को लेकर WHO ने ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी की घोषणा की थी. इसकी शुरुआत ब्राजील में 2015 में हुई थी. ये महामारी दुनिया के 60 देशों में फैल गई थी. भारत में भी जीका वायरस तेजी से फैला था. जीका वायरस के लक्षण भी डेंगू और वायरल की तरह ही हैं जैसे कि बुखार, जोड़ों का दर्द, शरीर पर लाल चकत्ते, थकान, सिर दर्द और आंखों का लाल होना. हालांकि इस वायरस का आरएनए अलग तरह का होता है. बता दें कि जीका वायरस एडीज प्रजाति के मच्छरों के काटने से ही फैलता है जो दिन में ही काटते हैं.

पोलियो (2014)
पोलियो की बीमारी के पूरी तरह से सफाए को लेकर दुनियाभर में कई दशक से प्रयास किए जा रहे हैं. लेकिन पाकिस्तान में इस पर पूरी तरह से ध्यान नहीं दिया गया है. दरअसल पोलियो को लेकर उस दर्ज किए गए दुनिया के सभी मामलों में पाकिस्तान में आधे से ज्यादा रोगी पाए गए थे. इसके बाद WHO ने ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी ने घोषित की थी. WHO ने इसे लेकर ग्लोबल इमरजेंसी घोषित की थी. संगठन ने पाकिस्तान, सीरिया और कैमरून जैसे देशों को इसके खिलाफ व्यापक स्तर अभियान चलाने के निर्देश जारी किए थे.



स्वाइन फ्लू (2009)
साल 2009 में स्वाइन फ्लू की वजह से दुनिया के कई देश बुरी तरह से प्रभावित हुए थे. इसे H1N1 वायरस कहा जाता है. मेक्सिको से शुरू हुए इस वायरस से अभी तक आंकड़ों के मुताबिक ढाई लाख लोगों से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. हालांकि आधिकारिक आंकड़ा 20 हजार से भी कम है. लेकिन कई मेडिकल रिसर्च एजेंसियों का मानना है कि इस बीमारी से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है.
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First published: February 2, 2020, 1:31 PM IST
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