WHO ने कोरोना वायरस को घोषित किया 'पैनडेमिक', एपिडेमिक से कैसे है अलग और क्‍या पड़ेगा फर्क

WHO ने कोरोना वायरस को घोषित किया 'पैनडेमिक', एपिडेमिक से कैसे है अलग और क्‍या पड़ेगा फर्क
विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने कोरोना वायरस को पैनडेमिक घोषित कर दिया है.

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) ने कोरोना वायरस (Coronavirus) को वैश्विक महामारी (Pandemic) घोषित कर दिया है. सवाल उठता है कि इससे कोरोना वायरस पर क्‍या फर्क पड़ेगा? ये महामारी (Epidemic) से कैसे अलग है?

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 12, 2020, 12:31 PM IST
  • Share this:
चीन के वुहान (Wuhan) शहर से शुरू हुए कोरोना वायरस (Corona Virus) ने जब दुनिया के 114 देशों तक पहुंचकर 1,19,400 से ज्‍यादा लोगों को संक्रमित कर दिया तो विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) ने इसे वैश्विक महामारी (Pandemic) घोषित कर दिया. कोरोना वायरस संक्रमण से मरने वाले लोगों की तादाद अब तक 4,300 से ज्‍यादा हो चुकी है. डब्‍ल्‍यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रॉस गेब्रेयेसस ने जेनेवा में कहा कि COVID-19 को अब वैश्विक महामारी कहा जा सकता है. ये महज जन स्‍वास्‍थ्‍य संकट (Public Health Crisis) नहीं रह गया है्. इससे हर क्षेत्र पर संकट की स्थिति खड़ी हो गई है. इसलिए हर व्‍यक्ति और हर सेक्‍टर को इसके खिलाफ लड़ाई में आगे आना होगा. अब सवाल ये उठता है कि कोरोना वायरस को पैनडेमिक घोषित करने से क्‍या फर्क पड़ जाएगा और ये महामारी (Epidemic) एपिडेमिक से कैसे अलग है...

ये है पैनडेमिक और एपिडेमिक में अंतर
किसी खास देश, क्षेत्र या समुदाय विशेष में फैली बीमारी को एपिडेमिक माना जाता है. वहीं, किसी नई बीमारी के दुनिया के अधिकतर हिस्सों में फैलने पर उसे पैनडेमिक घोषित कर दिया जाता है. डब्‍ल्‍यूएचओ का कहना है कि चीन से बाहर यह बीमारी 13 गुना ज्यादा फैल चुकी है. अमेरिका के नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज के डायरेक्‍टर डॉ. एंथनी फसी के मुताबिक यह वायरस सामान्य फ्लू से 10 गुना ज्यादा खतरनाक है. उन्‍होंने कहा कि किसी वायरस को पैनडेमिक घोषित करना साइंस से ज्‍यादा आर्ट है. डब्‍ल्‍यूएचओ बार-बार कहता रहा है कि COVID-19 में पैनडेमिक घोषित करने के सभी लक्षण हैं, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया. उन्‍होंने कहा कि अब जब ये महामारी पूरी दुनिया को बुरी तरह प्रभावित कर चुकी है तब जाकर इसे वैश्विक महामारी घोषित किया गया है.

इन्‍फ्लूएंजा के प्रसार से जुड़ा है मामला
दुनिया भर में किसी नई बीमारी के तेजी से फैलने को वैश्विक महामारी कहते हैं. एक इन्फ्लूएंजा (सर्दी-जुकाम) वैश्विक महामारी तब घोषित होता है, जब उससे जुड़ी बीमारी दुनिया भर में फैलती है. इसके अलावा जब कोई वायरस लोगों में एकदूसरे से कई क्षेत्रों में आसानी से फैलता चला जाता है तो उसे पैनडेमिक करार दिया जाता है. किसी इन्‍फ्लूएंजा को पैनडेमिक घोषित करने का मामला उसके प्रसार से जुड़ा है. इसका उस वायरस से जुड़ी बीमारियों की गंभीरता से कोई लेनादेना नहीं है. जनवरी, 2020 में इसे पब्लिक हेल्‍थ इमरजेंसी घोषित किया गया. इसके तहत मान लिया जाता है कि किसी बीमारी के फैलने से दूसरे देशों को जन स्‍वास्‍थ्‍य जोखिम है.



कोरोना वायरस को देरी से पैनडेमिक घोषित करने पर डब्‍ल्‍यूएचओ ने कहा कि इससे पूरी दुनिया में बेवजह डर का माहौल फैल जाता है. पैनडेमिक घोषित करना इन्‍फ्लूएंजा के प्रसार से जुड़ा है. इसका इससे जुड़ी बामारियों की गंभीरता से कोई लेनादेना नहीं है.


'यूं ही की जाती पैनडेमिक की घोषणा'
डॉ. टेड्रॉस गेब्रेयेसस ने कहा कि किसी बीमारी को बिना सोचे-समझे पैनडेमिक घोषित नहीं किया जा सकता है. अगर इस शब्‍द का गलत इस्‍तेमाल किया जाए तो ये पूरी दुनिया में बेवजह डर का माहौल बना देता है. लोग मान बैठते हैं कि इस बीमारी से लड़ना नामुमकिन है. इससे इलाज, सतर्कता और सावधानी को लेकर लापरवाही के कारण मरने वालों की संख्‍या बढ़ने लगती है. उन्‍होंने कहा कि कोरोना वायरस को पैनडेमिक घोषित करने के बाद न तो इसके खतरे को लेकर डब्‍ल्‍यूएचओ के आकलन में कोई बदलाव आएगा और न ही संगठन इसके खिलाफ अपनी गतिविधियों में परिवर्तन करेगा. सभी देशों को भी कोरोना वायरस के खिलाफ अपनी लड़ाई को तेज कर देना चाहिए. अगर सरकारें अपने नागरिकों में इस संक्रमण की जांच करें, उन्हें दूसरों से अलग करें, उनका इलाज करें और लोगों को इसके बारे में बताएं को काफी हद कर इसके फैसले की गति पर काबू पाया जा सकता है.

अब वैक्‍सीन बनाने की बढ़ेगी रफ्तार
डब्‍ल्‍यूएचओ के कोरोना वायरस को पैनडेमिक घोषित करने से पूरी दुनिया को संकेत मिल गया कि अब बचे हुए देश भी इसकी चपेट में आ सकते हैं. उन्‍हें इससे निपटने की तैयारी कर लेनी चाहिए. साथ ही अब सभी देश अपनी यात्रा नीतियों में बदलाव करेंगे ताकि इसे फैलने से रोका जा सके. सभी देश संक्रमित होने वाले लोगों को अलग-थलग कर उपचार की व्‍यवस्‍था तैयार रखने की योजना पर काम करेंगे. साथ ही सभी देश जरूरत महसूस होने पर किसी भी तरह के सार्वजनिक कार्यक्रम पर रोक लगा सकेंगे. किसी इन्‍फ्लूएंजा के पैनडेमिक घोषित होने के बाद उसकी वैक्‍सीन बनाने की रफ्तार बहुत तेज कर दी जाती है. इन्‍फ्लूएंजा की रोकथाम और इलाज ढूंढने के लिए फंडिंग बढ़ा दी जाती है. वहीं, सरकारें भी संक्रमित लोगों को तलाशने, उन्‍हें अलग रखकर इलाज करने को लेकर ज्‍यादा सक्रिय हो जाएंगी.

सार्स को घोषित नहीं किया था पैनडेमिक
आम तौर पर किसी बीमारी को पैनडेमिक घोषित करने से बचा जाता है. चीन से ही साल 2003 में फैले सार्स को भी पैनडेमिक घोषित नहीं किया गया था, जबकि इसके संक्रम से 26 देशों के 8,000 लोगों की मौत हो गई थी. कोरोना वायरस से पहले डब्‍ल्‍यूएचओ ने 2009 में स्‍वाइन फ्लू को पैनडेमिक घोषित किया था. हालांकि, बाद में इसे वापस ले लिया गया थ. विशेषज्ञों का कहना था, 'H1N1 के कारण हालात इतने खराब नहीं हुए हैं कि इसे पैनडेमिक घोषित कर दिया जाए. इससे बेवजह लोगों में डर का माहौल बन जाएगा.'

corona new
भरत में ओसीआई कार्डधारकों को दी जाने वाली वीजा मुक्त यात्रा पर 15 अप्रैल 2020 तक के लिए रोक लगा दी गई है.


भारत में विदेशियों की एंट्री पर बैन
भारत में अब तक कोरोना वायरस के संक्रमण के 60 मामलों की पुष्टि हुई है. भारत में 15 अप्रैल तक विदेशियों की एंट्री बैन कर दी गई है. स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन की अध्यक्षता में हुई बैठक में कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने और इससे बचने के उपायों पर चर्चा हुई. बैठक में 15 अप्रैल तक राजनयिक, सरकारी, संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, एम्प्लॉयमेंट व प्रोजेक्ट वीजा को छोड़कर सभी अन्य वीजा 15 अप्रैल तक के लिए निलंबित करने का फैसला किया गया है. ओसीआई कार्डधारकों को दी जाने वाली वीजा मुक्त यात्रा पर भी 15 अप्रैल 2020 तक के लिए रोक लगा दी गई है. बीते कुछ समय में कोरोना वायरस का कहर दुनिया भर में देखने को मिला है. यूरोपीय देश इटली ने कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए ही अपने यहां पूरी तरह लॉक डाउन घोषित कर दिया है. वहीं, खाड़ी देशों ने भी विदेशियों के आने-जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है.

सर्दी-जुकाम जैसे होते हैं लक्षण
इन्फ्लूएंजा महामारी के कुछ लक्षण सर्दी जुकाम जैसे ही होते हैं. मौसमी और कोरोना वायरस सभी उम्र के लोगों में संक्रमण का कारण बन सकते हैं. अधिकांश मामलों में संक्रमित लोग बिना इलाज के पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं. हालांकि, बुजुर्गों के लिए ये खतरनाक साबित हो सकती है. COVID-19 की शुरुआत SARS-CoV-2 के कारण मानी जा रही है्. शुरुआत में माना गया कि चीन के वुहान में कोरोना जानवारों से इंसानों में फैला है. ज्‍यादातर शुरुआती मामले चीन में ही हुए या चीन की यात्रा करने वाले लोगों में संक्रमण पाया गया. हालांकि, ये चिंता का विषय था, लेकिन चीन के बाहर नहीं फैलने के कारण इससे इसे पैनडेमिक घोषित नहीं किया गया. धीरे-धीरे अंटार्कटिका को छोड़कर सभी महाद्वीपों में कोरोना वायरस फैल गया. एकदूसरे से संपर्क के जरिये ये वायरस फैलता चला गया. इन सभी तथ्‍यों को देखते हुए डब्‍ल्‍यूएचओ ने कोरोना वायरस को पैनडेमिक घोषित कर दिया.

ये भी पढ़ें:

कोरोना, फ्लू या जुकाम में क्या है अंतर, कैसे पता चलेगा कि हुआ क्या है?

कोरोना मरीजों के आते ही खाली हो गया आठ मंजिला अस्पताल का हर कमरा
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज