34 साल की आकांक्षा अरोड़ा, जो लड़ रही हैं UN महासचिव पद का चुनाव

संयुक्त राष्ट्र संघ के शीर्ष पद के लिए चुनाव नज़दीक हैं.

संयुक्त राष्ट्र संघ के शीर्ष पद के लिए चुनाव नज़दीक हैं.

विश्व की सबसे प्रमुख संस्थाओं में शुमार संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) के शीर्ष पद के लिए दावेदारी पेश करने वाली आकांक्षा अनुभव न होने के बावजूद मैदान में उतरी हैं और वर्तमान महासचिव (Antonio Guterres) के खिलाफ सीधे आरोप लगा रही हैं.

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अगर अरोड़ा आकांक्षा का दावा और दांव चल गया तो, 75 साल के संयुक्त राष्ट्र के इतिहास (UN History) में पहली बार होगा, जब कोई महिला इस संस्था की महासचिव बनेगी. संयुक्त राष्ट्र संघ के शीर्ष पद पर फिलहाल एंटोनियो गुटेरेस काबिज़ हैं और आने वाले चुनाव में उनके खिलाफ सिर्फ एक उम्मीदवार के तौर पर भारतीय अमेरिकी (Indian American) आकांक्षा ने ताल ठोकी है. महज़ 34 वर्षीय आकांक्षा खुद को युवा पीढ़ी का प्रतिनिधि बताकर चुनाव मैदान में उतरी हैं और आक्रामक ढंग से अपनी योजनाओं व इरादों को लेकर बात कर रही हैं.

हालांकि आकांक्षा की उम्मीदवारी को अब तक नेशनल सपोर्ट नहीं मिला है, लेकिन आकांक्षा ने सोशल मीडिया के ज़रिये 9 फरवरी से एक कैंपेन शुरू करते हुए संयुक्त राष्ट्र में विकास और बेहतर लक्ष्य के लिए बदलाव को अहम बताया. आकांक्षा ने साफ तौर पर मौजूदा महासचिव एंटोनियो के कार्यकाल को कई महत्वपूर्ण मोर्चों पर फेल बताते हुए संस्था के नेतृत्व को बदले जाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया.

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कौन हैं आकांक्षा अरोड़ा?
भारत के हरियाणा में जन्मी आकांक्षा जब छह साल की थीं, तब उनका परिवार सऊदी अरब चला गया था. बाद में आकांक्षा ने कनाडा के टोरंटो स्थित योर्क यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएशन किया. फिर कोलंबिया यूनिवर्सिटी से लोक प्रशासन में मास्टर्स की डिग्री ली. आकांक्षा के पास भारत की ओवरसीज़ नागरिकता है और कनाडा का पासपोर्ट भी. हालांकि अपनी उम्मीदवारी को लेकर उन्होंने किसी देश से औपचारिक समर्थन की मांग नहीं की है.

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सोशल मीडिया पर चुनावी कैंपेन चला रही हैं आकांक्षा अरोड़ा.


फिलहाल आकांक्षा संयुक्त राष्ट्र के विकास कार्यक्रम यानी UNDP में ऑडिट कोऑर्डिनेटर के पद पर हैं, जो आंतरिक और बाहरी मामलों के प्रबंधन के ऑडिट का काम संभालती हैं. बताया गया है कि यूएन ने ही उनकी नियुक्ति संस्था में वित्तीय सुधारों और वित्त संबंधी नियम कायदों को बेहतर करने के लिए की थी.

कैसे चला रही हैं कैंपेन?
आकांक्षा का कहना है कि वो यूएन में सुधारों के लिए दो साल से काम कर रही हैं और शीर्ष नेतृत्व तक उनकी पहुंच रही है. लेकिन उनका अनुभव यही रहा कि इस संस्था में कोई सुधार नहीं चाहता और न ही किसी तरह का जोखिम लेना चाहता है. बदलाव से डरने का आरोप लगाने वाली आकांक्षा ने साफ तौर पर एंटोनियो के खिलाफ मोर्चा खोलकर यूएन को अपने उद्देश्यों से भटकी हुई संस्था बता दिया है.

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सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी करते हुए उन्होंने न केवल यूएन की मौजूदा व्यवस्था और हालत को लेकर हमला बोल दिया है, बल्कि यह भी स्पष्ट किया है कि वो अपना चुनावी कैंपेन अपने ही फाइनेंस से चला रही हैं.

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यूएन के मौजूदा महासचिव एंटोनियो गुटेरेस.


क्या है अनुभव का फैक्टर?
विश्व स्तर की संस्था के सबसे प्रमुख पद के लिए सिर्फ 34 वर्षीय महिला की दावेदारी के साथ ही यह सवाल खड़ा हुआ है कि अनुभव की अहमियत क्या है? विदेशी और सरकारी मामलों में अनुभव न होने के बावजूद आकांक्षा डर नहीं रही हैं और उनका दावा है कि उनकी कम उम्र ही प्लस पॉइंट है. आकांक्षा के मुताबिक दुनिया की आधी आबादी 30 साल से कम की है, तो युवाओं को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए.

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आकांक्षा कहती हैं कि युवाओं से जुड़ी समस्याओं को युवा बेहतर समझ सकते हैं. साथ ही, युवाओं में ही बदलाव करने की प्रेरणा और हौसला है. #UNTHATWORKS के साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने पक्ष में UNOW कैंपेन जारी किया हुआ है, जो यूएन को विश्व की अपेक्षाओं के मुताबिक संस्था बनाने का दावा करता है, अगर वो इस संस्था के शीर्ष पद पर चुनी जाती हैं.

और क्या हैं खास फैक्ट्स?
साल 2006 में जब कांग्रेस नेता शशि थरूर ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव पद के लिए दावेदारी पेश की थी, तब आखिरी मौका था, जब किसी भारतीय ने ऐसा कदम उठाया हो. 15 साल बाद यही दावेदारी पेश करने वाली आकांक्षा के बारे में एक खास बात यह भी है कि वो दुनिया भर में रिफ्यूजियों के अधिकारों को लेकर काफी चर्चा करती हैं.

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इसके पीछे वजह शायद यही है कि उनके दादा, दादी की पीढ़ी 1947 में भारत विभाजन त्रासदी की शिकार रही और तब उनका परिवार भारत में रिफ्यूजी कहलाया. आखिर में यह भी जानिए कि आकांक्षा के पैरेंट्स डॉक्टर रहे हैं और 9 से 18 की उम्र के बीच उन्होंने भारत के ही बोर्डिंग स्कूल में शिक्षा पाई.
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