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कौन था मुंबई हमले का गुनहगार कसाब, जिसे आज ही के दिन हुई थी फांसी

News18Hindi
Updated: November 21, 2018, 1:45 PM IST
कौन था मुंबई हमले का गुनहगार कसाब, जिसे आज ही के दिन हुई थी फांसी
आतंकी अजमल कसाब (फाइल फोटो)

मुंबई में दस साल पहले 26 नवंबर को हुए दिल दहलाने वाले आतंकवादी हमले का वो आतंकी, जिसे पुलिस ने जिंदा पकड़ा था. कैसे पाकिस्तान का एक गरीब युवक खूंखार आतंकी बन गया

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  • Last Updated: November 21, 2018, 1:45 PM IST
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आज से दस साल पहले 26 नवंबर को जब मुंबई में शाम खत्म हो रही थी और रात का अंधेरा फैल चुका था. तभी पाकिस्तान से समुद्र के रास्ते आए दस आतंकवादियों ने इस शहर को दहला कर रख दिया. उन्होंने मुंबई में कई जगहों पर हमला कर 116 लोगों की हत्या कर दी. सैकड़ों लोग घायल हुए.

ये हमला तीन दिनों तक चला. ताज होटल में लोगों को बंधक बनाकर मौत का तांडव किया गया. इन्हीं हमलावरों में एक अजमल कसाब को मुंबई पुलिस ने जिंदा पकड़ने में सफलता हासिल की. जानते हैं कौन था ये आतंकवादी, जिसका नाम था अजमल कसाब.

कसाब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के फरीदकोट के ओकारा गांव का रहने वाला था. बेहद गरीब घर से ताल्लुक रखने वाला. जब वो 18 साल का था तब उसकी अपने दही बेचने वाले निर्धन पिता से तकरार हुई और गुस्से में वो घर छोड़कर चला गया. ये झगड़ा 2005 में हुआ.

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उसने घर छोड़ा और बड़े भाई की तरह दूसरे शहर में मजदूर करने लगा. इसके बाद वो छोटे मोटे अपराध में जुट गया. अपने दोस्त मुजफ्फर खान के साथ चोरी चकारी करने लगा. हथियार दिखाकर लोगों से लूटपाट भी करता था. ये सिलसिला करीब दो साल चला.

26/11 हमले का आतंकी अजमल कसाब (फाइल फोटो)


लश्कर ए तैयबा ने आतंकी ट्रेनिंग के लिए छांटा
दिसंबर 2007 में उसकी मुलाकात मुलाकात जमात उद दावा के लोगों से हुई. जमात उद दावा संगठन के लोगों ने ही आतंकवादी संगठन लश्कर ए तैयबा खड़ा किया. कसाब और मुजफ्फर उनके साथ काम करने को तैयार हो गए.उन्हें मर्कज तैयबा लेकर जाया गया, जहां लश्कर ए तैयबा का आतंकी कैंप था.
कैंप में खास प्रशिक्षण के लिए 24 लड़के छांटे गए.
छांटे गए युवकों को विशेष ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर ले जाया गया. ट्रेनिंग पूरी होने के बाद 24 में 10 लड़के चुने गए. इन्हीं में एक कसाब भी था. भारतीय अधिकारियों के मुताबिक लश्कर ए तैयबा के सीनियर कमांडर जकी उर रहमान लखवी ने मुंबई हमलों में हिस्सा लेने वाले हर लड़के के परिवार को डेढ़ लाख रुपए दिए. मुंबई हमले के छह महीने पहले कसाब अपने गांव आया. उसने मां से कहा कि वो जिहाद के लिए उसे दुआएं दे.

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फिर साथी आतंकवादियों के साथ मुंबई रवानगी
इसके कसाब कराची आया, वहां उसकी मुलाकात अपने बाकी नौ साथियों से हुई. फिर सारे आतंकवादी पूरी तैयारी के साथ मुंबई के लिए रवाना हुए. सभी आतंकवादियों के बैग में पानी की बोतल, सूखे मेवे, ग्रेनेड और गोलियां भरी हुई थी, हाथ में एके-47 थी.

हर अदालत ने फांसी पर लगाई मुहर
जब इस आतंकवादियों ने मुंबई में हमला किया तो कसाब जिंदा पकड़ा गया. उसकी गवाही ने हमले की कई कड़ियां सुलझाने में मदद की. हमले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने उसे 80 अपराधों का दोषी करार दिया. इनमें भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने के अपराध भी था, जिसकी सजा फांसी है. विशेष अदालत के फैसले पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी मुहर लगाई. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी फांसी पर मुहर लगा दी.

अजमल कसाब (फाइल फोटो)


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मुंबई जेल से पुणे ले जाया गया
21 नवंबर को उसे फांसी पर लटका दिया गया. आपरेशन एक्स के तहत बेहद गोपनीय तरीके से कसाब को मुंबई की आर्थर रोड जेल से पुणे की यरवदा जेल ले जाया गया. ऑपरेशन एक्स की इस टीम में 17 अफसर शामिल थे.

किसी को कानो कान खबर न हो इसलिए सुरक्षा के बेहद कड़े मानकों का पालन किया गया. यरवडा जेल की जिस सेल में कसाब को रखा गया था, वहां तक सभी अधिकारी नही जा सकते थे. बताया जा रहा है कि सिर्फ दो अधिकारियों को ही कसाब तक पहुंच हासिल थी.

कसाब को मुंबई पुलिस ने अकेले जिंदा आतंकवादी के तौर पर पकड़ा (फाइल फोटो)


डेथ वारंट पर दस्तखत
फांसी का दिन और समय तय था. दो दिन पहले ही कसाब को उसकी फांसी के बारे में बता दिया गया था. राष्ट्रपति ने उसकी दया याचिका खारिज कर दी. 19 नवंबर को कसाब से डेथ वारेंट पर हस्ताक्षर कराए गए. 21 नवंबर की सुबह पौ फटने से पहले ही कसाब को फांसी दिए जाने की सारी औपचारिकताएं पूरी की जा चुकी थीं.

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पुणे की इस यरवदा जेल में दी गई थी कसाब को फांसी (फाइल फोटो)


क्या थी आखिरी इच्छा
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक जब कसाब से उनकी आखिरी इच्छा पूछी गई तो उसने कहा, 'मेरी मौत की खबर मेरी अम्मी तक पहुंचा देना.' जब सुबह 07.25 बजे उसे फांसी के तख्ते पर खड़ा करके चेहरे को काले कपड़े से ढंका गया तो उसे ये कहते हुए सुना गया कि "अल्लाह कसम, अल्लाह कसम ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी. अल्लाह माफ करे मुझे".

ठीक 07.30 बजे बटन दबा. कसाब का शरीर पहले थोड़ा सा ऊपर की ओर उछला. फिर नीचे आकर झूलने लगा. डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित किया. इस प्रक्रिया में सात से आठ मिनट लगे. इस तरह आपरेशन एक्स पूरा हो गया.

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First published: November 21, 2018, 11:09 AM IST
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