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Explained : बेअंत सिंह हत्याकांड में दोषी बलवंत सिंह राजोआना कौन है?

बेअंत हत्याकांड में दोषी बलवंत सिंह.
बेअंत हत्याकांड में दोषी बलवंत सिंह.

25 साल पुराने हत्याकांड में इकबाले-जुर्म के बावजूद दोषी को फांसी नहीं दी जा सकी क्योंकि दया याचिकाएं केंद्र सरकार के पास पेंडिंग रहीं. सुप्रीम कोर्ट ने फटकारने के सुर में केंद्र को 14 दिनों का अल्टीमेटम दिया तो बेअंत सिंह हत्याकांड (Beant Singh Murder Case) में शामिल बलवंत सिंह का नाम फिर सुर्खियों में आया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 27, 2021, 7:42 AM IST
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31 अगस्त 1995 को मारे गए पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में दोषी करार दिए गए बलवंत सिंह राजोआना (Balwant Singh Rajoana) को सज़ा-ए-मौत दी जा चुकी है. हालांकि इसे लेकर दायर की गई दया याचिका (Mercy Petition) पर रुख साफ करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बीते सोमवार को केंद्र सरकार को आखिरी मौका देकर 14 दिनों का अल्टीमेटम दिया. सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश के बाद फिर बेअंत सिंह हत्याकांड सुर्खियों में आ गया, जिसमें 16 लोग मारे गए थे. 25 सालों से जेल में बंद बलवंत सिंह आखिर कौन है, जिसकी किस्मत के फैसले के लिए आखिरी 14 दिनों की मोहलत दी गई है.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबड़े ने 8 जनवरी को इस मामले में कहा था कि सरकार दया याचिका पर 26 जनवरी तक फैसला कर ले, लेकिन सरकार की तरफ से कोई निर्णय न होने की सूरत में कोर्ट ने सख्त निर्देश जारी किए. आत्मघाती बम हमले में बेअंत सिंह हत्याकांड के दोषी बलवंत सिंह के बारे में आपको बताते हैं.

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कौन है बलवंत सिंह राजोआना?
लुधियाना ज़िले के राजोआना कलां गांव से ताल्लुक रखने वाला बलवंत 1987 से पंजाब पुलिस में कॉंस्टेबल भर्ती हुआ था. काफी समय से पटियाला जेल में बंद बलवंत ही वो शख्स था, जिसने बेअंत सिंह की हत्या के लिए दिलावर सिंह के शरीर पर बम बांधकर उसे सुसाइड बॉम्बर बनाया था. यही नहीं, दिलावर के फेल होने की सूरत में बलवंत ही उसका विकल्प होने वाला था. बब्बर खालसा इंटरनेशनल संगठन ने बलवंत की सज़ा को लेकर उसके साथ हमदर्दी भी ज़ाहिर की थी.

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पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह.


बेअंत सिंह की हत्या को जायज़ ठहराने वाले बलवंत ने कोर्ट 1996 में कहा था ‘जज साहिब, बेअंत सिंह खुद को अमन का मसीहा समझने लगा था ओर हज़ारों मासूमों की जान लेकर खुद को गुरु गोबिंद सिंह और राम जी की तरह मानने लगा था इसलिए मैंने उसे खत्म करने का फैसला किया था.’

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बलवंत ने इस पूरे मामले में हुई सुनवाई के दौरान 184 के सिख दंगों पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए इसे निर्दोष युव सिखों के प्रति की गई हिंसा करार दिया था. वहीं बेअंत सिंह हत्याकांड के बाद दिसंबर 1995 में पुलिस ने बलवंत को गिरफ्तार किया था, जिसे सीबीआई अदालत में 2007 में मौत की सज़ा सुनाई थी.

क्या सज़ा-ए-मौत को चुनौती दी गई?
बलवंत सिंह ने अपने मुकदमे में सुनवाई के दौरान अपना कोई वकील तक हायर नहीं किया था. बलवंत ने साफ कहा था ‘हां मैंने हत्या की साज़िश की. और इस कांड को अंजाम देने के लिए मुझे कोई पछतावा नहीं. मैंने और भाई दिलावर ने बम को तैयार किया था.’ यही नहीं, बलवंत ने अपनी सज़ा पर कहा था कि उसने जो किया, उसके बदले यह सज़ा इंसाफ है और वह इस ‘निकम्मे सिस्टम’ के सामने झुकना नहीं चाहता था.

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बलवंत को फांसी दिए जाने की तारीख 31 मार्च 2012 तय की गई थी लेकिन सिख समुदाय के कुछ गुटों में इस फैसले का काफी विरोध होने पर तत्कालीन प्रकाश सिंह बादल सरकार ने इसे रोकने की कवायद की थी. राष्ट्रपति और केंद्रीय गृह मंत्रालय तक दया याचिकाएं दायर की गई थीं. इन याचिकाओं पर जल्द फैसला होने की मांग को लेकर बलवंत ने पटियाला जेल में 2016 और 2018 में भूख हड़ताल भी की थी.

साल 2019 में संसद में प्रश्नकाल के दौरान बेअंत सिंह के पोते और सांसद रणवीत सिंह बिट्टू के एक सवाल के जवाब में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि बलवंत सिंह को माफी नहीं दी गई. 2020 में, बलवंत ने याचिका के जल्द निपटारे के लिए रिट दायर की थी. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर हो रही देर का कारण पूछते हुए सरकार को 14 दिनों का समय दिया.
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