कौन हैं भारतीय मूल की भव्या लाल, जो NASA में संभालेंगी अहम पद?

भारतवंशी इंजीनियर भव्या लाल को अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का कार्यकारी प्रमुख बनाया गया (news18 English via NASA website)

भारतवंशी इंजीनियर भव्या लाल को अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का कार्यकारी प्रमुख बनाया गया (news18 English via NASA website)

भारतवंशी भव्या लाल (Bhavya Lal) को अंतरिक्ष पर शोध के अलावा उनकी साफगोई के लिए भी जाना जा रहा है. अमेरिकी में ही अहम जिम्मदारियां देखती आ रही भव्या ने कह दिया था कि आने वाले समय में अंतरिक्ष से अमेरिकी दबदबा खत्म हो जाएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 19, 2021, 2:48 PM IST
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भारतवंशी इंजीनियर भव्या लाल को अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का कार्यकारी प्रमुख बनाया गया है. इतने अहम काम के लिए उनका चुनाव खुद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और उनकी टीम ने किया है. अब भव्या नासा में बदलाव से जुड़ी समीक्षा करेंगी ताकि दुनिया में सबसे अहम अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसी का काम और बेहतर हो सके. जानिए, कौन हैं भव्या और किन खूबियों के कारण इसके लिए चुनी गईं.

नासा लगातार अपनी रिसर्च के कारण टॉप ट्रेंडिंग में बना रहता है. अब इसे एक और वजह से भी खंगाला जा रहा है. लोग जानना चाहते हैं कि आखिर भारतीय मूल की भव्या कौन हैं, जो नासा में अहम जिम्मेदारी संभालेंगी. मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से न्यूक्लियर इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ साइंस, और मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री ले चुकी भव्या ने आगे जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी से पब्लिक पॉलिसी एंड पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में डॉक्टरेट की डिग्री ली. इस दौरान वे लगातार स्पेस से जुड़ी रिसर्च भी करती रहीं.

Bhavya Lal
भव्या लाल पांच-पांच बार नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस कमेटी की अध्यक्षता कर चुकी है (Photo- flickr)

अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और नीति समुदाय की सदस्य भव्या पांच-पांच बार नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस कमेटी की अध्यक्षता कर चुकी है. इसके अलावा नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस की सदस्य भी हैं. भव्या का चुनाव राष्ट्रपति बाइडन ने किया है, जिससे साफ होता है कि उनका काम कितने खुलकर सबकी नजरों में आ चुका है. भव्या केवल अंतरिक्ष पर लैब में बैठकर या वैज्ञानिकों के साथ कॉन्फ्रेंस के दौरान नहीं दिखतीं, बल्कि लगातार इवेंट्स का भी हिस्सा बनती रहीं.
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स्पेस टेक्नोलॉजी और पॉलिसी कम्युनिटी में उनके पेपर 50 से भी ज्यादा बार पब्लिश हो चुके हैं और सराहे जा चुके. भव्या ने कई निजी कंपनियों जैसे स्पेसX और ब्लू ऑरिजिन जैसी कंपनियों के बारे में भी खुलकर बात की कि वे किस तरह से स्पेस टूरिज्म को बढ़ावा देना चाह रहे हैं और इससे क्या बदलाव आ सकता है.

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भारतीय मूल की भव्या काफी स्पष्टवादी भी हैं. वे बिना डरे ये ऐलान कर चुकी हैं कि अगले 10 से 15 सालों में अमेरिका अंतरिक्ष की दुनिया का सबसे मजबूत नाम नहीं रह जाएगा, बल्कि उसका वर्चस्व तोड़कर दूसरे देश आगे आएंगे. इनमें उन्होंने भारत, इजरायल, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर जैसे देशों के लिए उम्मीद जताई कि वे आगे निकल सकते हैं.

Bhavya Lal NASA space
आने वाले सालों में अमेरिका को पीछे कर दूसरे देश अंतरिक्ष की दुनिया में दबदबा बनाएंगे- सांकेतिक फोटो (pixabay)

भव्या के अलावा नासा में एक और भारतीय महिला ने दखल बनाई. नासा ने अपनी एक महत्‍वाकांक्षी मिशन के तहत मंगन ग्रह पर शोध के लिए रोवर परसिवरेंस को भेजा, जो मंगल की सतह पर उतर भी चुका है. इस सफलता में जिन वैज्ञानिकों का नाम बार-बार लिया जा रहा है, उनमें से एक स्वाति मोहन हैं. उन्‍होंने पूरे मिशन में एटीट्यूड कंट्रोल और रोवर के लैंडिंग सिस्‍टम पर काम किया है. स्‍वाति मोहन इससे पहले भी नासा के कई मिशन में शामिल हो चुकी हैं.

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वैसे अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन का भारतीय मूल के लोगों के लिए झुकाव साफ दिख रहा है. फिलहाल कमला हैरिस उप-राष्ट्रपति हैं, जिनकी मां भारत से थीं. इसके अलावा बाइडन के साथ काम करने वाली टीम में भारतीयों का दबदबा दिख रहा है. लगभग 20 भारतीय मूल के लोग वाइट हाउस में अहम पदों पर काम कर रहे हैं. बता दें कि 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद की शपथ लेते हुए बाइडन ने जो भाषण पढ़ा था, उसे भी भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक विनय रेड्डी ने ही तैयार किया था.

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