कौन हैं शाहीन बाग की बिल्किस दादी जो शामिल हुईं दुनिया 100 असरदार हस्तियों में

बिल्किस दादी (Bilks Dadi) का नाम एक बार फिर से सुर्खियों में हैं.
बिल्किस दादी (Bilks Dadi) का नाम एक बार फिर से सुर्खियों में हैं.

टाइम्स (Times) ने पिछले साल शाहीन बाग (Shaheen Bagh) प्रदर्शन के दौरान चर्चा में आईं बिल्किस दादी (Bilkis Dadi) को साल के सौ सबसे प्रभावशाली लोगों में जगह दी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 23, 2020, 6:14 PM IST
  • Share this:
पिछले साल शाहीन बाग (Shaeen Bagh) के प्रदर्शन में बिल्किस दादी (Bilkis  Dadi) का नाम खूब सुर्खियों में रहा था. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में हुए प्रदर्शन में 82 साल की बिल्किस दादी ने धरना प्रदर्शन में अपनी खासी उपस्थिति दर्ज करा कर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा था. यहां तक कि उन्हें शाहीन बाग की दादी तक कहा जाने लगा था. एक बार फिर बिल्किस दादी सुर्खियों में हैं क्योंकि अब टाइम मैग्जीन (Time magazine) ने उन्हें साल 2020 के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल किया है.

पहले शाहीन बाग से हुई थीं बिल्किस दादी
ऐसा नहीं है कि बिल्किस दादी नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में चले प्रदर्शन के दौरान केवल खास मौकों पर ही नजर आई थीं. वे सुबह से लेकर रात तक ही धरना देती दिखाई दी थीं. उन्होंने इस विरोध पर अंत समय तक बने रहने की बात की थी.

टाइम मैग्जीन में जिक्र
टाइम मैग्जीन के पत्रकार राणा अयूब ने अपने लेख में बिल्किस दादी का खास तौर से जिक्र किया है. उन्होंने बताया कैसे बिल्किस दादी दिल्ली की कड़कड़ाती ठंड में प्रदर्शन स्थल पर डटी रहीं और शाहीन बाग प्रदर्शन में लोगों के आवाज बन गईं.



ऐसे थे तेवर
इतना ही नहीं बिल्किस दादी के बयान भी कम चर्चा में रहे. प्रदर्शन के दौरान एक जब उनका नाम पूछा गया तो उन्होंने साफ कह दिया कि हम नाम नहीं बताएंगे क्योंकि उनके पास दस्तावेज नहीं हैं.



कहां की रहने वाली हैं
बिल्किस दादी के नाम से मशहूर बिल्किस बानो उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर की रहने वाली हैं, लेकिन वे फिलहाल अपने बच्चों के साथ दिल्ली में रह रही हैं. उनके पति खेती मजदूरी किया करते थे जो अब इस दुनिया में नहीं हैं.

ग्रीनहाउस उत्सर्जन से साल 2100 तक महासागरों का जलस्तर बढ़ जाएगा 40 सेमी- शोध

पहले कभी किसी आंदोलन में भाग नहीं लिया
प्रदर्शन के दौरान बिल्किस दादी ने बताया था कि उन्होंने अपनी जिंदगी में कभी किसी राजनैतिक आंदोलन में भाग नहीं लिया था. इससे पहले वे केवल एक घरेलू महिला हुआ करती थीं. उन्होंने पहले कभी अपना घर नहीं छोड़ा. लेकिन इस प्रदर्शन में उनका खाना सोना धरना स्थल पर ही होता था. उनका कहना था कि वे केवल कुछ समय के लिए कपड़े बदलने घर जाती थीं.

अंतरिक्ष से आई थी टाइटेनिक के डूबने की वजह, नए शोध ने की व्याख्या

बच्चों के लिए
बिल्किस दादी से जब यह पूछा गया कि वे इस उम्र में धरने पर क्यों बैठीं हैं तो उनका साफ जवाब था कि यह जानने के बाद कि मेरे बच्चों का इस देश से बाहर निकाला जा सकता है दो कि उनका घर है, मैं आराम से कैसे बैठ सकती हूं. उनका कहना था कि वह धरना स्थल तभी छोड़ेंगी जब उनके बच्चों का जीवन सुरक्षित होगा.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज