कौन हैं आलोक वर्मा जिन्‍हें CBI डायरेक्टर पद से हटाया गया है

CBI निदेशक आलोक कुमार वर्मा और ब्यूरो के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच छिड़ी जंग सामने आने के बाद सरकार ने पिछले साल 23 अक्टूबर को दोनों अधिकारियों को अवकाश पर भेजने का फैसला किया था.

News18Hindi
Updated: January 11, 2019, 3:12 PM IST
कौन हैं आलोक वर्मा जिन्‍हें CBI डायरेक्टर पद से हटाया गया है
आलोक वर्मा (फाइल फोटो)
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Updated: January 11, 2019, 3:12 PM IST
देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी CBI के चीफ आलोक वर्मा के खिलाफ सीवीसी से भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता वाली सलेक्‍शन कमिटी ने उन्‍हें पद से हटाने का फैसला लिया. भ्रष्‍टाचार के आरोपा में उन पर कार्रवाई की गई. सलेक्‍शन कमिटी ने 2-1 से उनके खिलाफ वोट किया. वे इसी महीने की 31 जनवरी को रिटायर होने जा रहे हैं. तब तक के लिए उन्हें फायर एंड सेफ्टी के डीजी के तौर पर नई जिम्मेदारी दी गई थी लेकिन आलोक वर्मा ने उसे भी लेने से इनकार कर दिया है.

अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश काडर से 1979 बैच के शांत स्वभाव वाले IPS ऑफिसर आलोक वर्मा सीबीआई के 27वें डायरेक्टर बने थे. वह देश की राजधानी दिल्ली के पुलिस कमिश्नर रह चुके हैं. वह जब आईपीएस के लिए सेलेक्ट हुए थे तब उनकी उम्र थी मात्र 22 साल. वह अपने बैच के सबसे युवा ऑफिसर थे. दिल्ली का कमिश्नर बनने से पहले वह जेल के जनरल रह चुके थे, मिजोरम के डीजी भी बन चुके थे. नेशनल कैपिटल रीजन में महिला PCR शुरू करने का श्रेय भी उन्हें ही दिया जाता है.

बहुत से सुधारों का दिया जाता है श्रेय
उन्होंने दिल्ली पुलिस का कमिश्नर रहते प्रमोशन नीतियों में कई बदलाव किए. जिससे 11,371 कॉन्स्टेबल हेड कॉन्स्टेबल, 12,813 हेड कॉन्स्टेबल असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर, 1792 ASI सब-इंस्पेक्टर और 390 सब-इंस्पेक्टर बनने का रास्ता खुला. उन्हें 1997 में पुलिस मेडल और 2003 में राष्ट्रपति के पुलिस मेडल से सम्मानित भी किया गया है. वर्मा को CBI का डायरेक्टर बनाने वाली कैबिनेट कमिटी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और तत्कालीन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जेएस खेहर शामिल रहे थे.

मामला बढ़ने के बाद सरकार ने दोनों ही अधिकारियों को छुट्टी पर भेजा था


सीबीआई के टॉप 2 अफसरों, वर्मा और राकेश अस्थाना के बीच की लड़ाई और गहरी होती जा रही थी. प्रतिष्ठित एजेंसी के भीतर की जंग खुलकर पब्लिक में आने के बाद मोदी सरकार ने डैमेज कंट्रोल करने को CBI डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया था. इससे विवाद और गहरा गया था. एजेंसी ने अपने ही स्पेशल डायरेक्टर अस्थाना पर केस दर्ज किया था. उन पर दर्ज FIR में मांस कारोबारी मोइन कुरैशी से 3 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया था.

विवाद के केंद्र में था मीट कारोबारी मोइन कुरैशी
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विवाद के केंद्र में मीट कारोबारी मोइन कुरैशी थे और दोनों छोर पर सीबीआई के 2 सबसे बड़े अफसर डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना थे. दोनों अफसरों को सरकार ने छुट्टी पर भेज दिया गया था और अंतरिम डायरेक्टर के तौर पर एम. नागेश्वर राव को नियुक्त किया गया था. वर्मा और अस्थाना के रिश्तों में तभी तल्खी आ गई थी, जब आलोक वर्मा ने अस्थाना के स्पेशल डायरेक्टर पद पर नियुक्ति को लेकर आपत्ति जताई थी. बाद में अस्थाना ने कैबिनेट सेक्रटरी से वर्मा की शिकायत की और उनपर कुरैशी के करीबी सहयोगी सतीश बाबू सना से 2 करोड़ रुपये रिश्वत लेने का भी आरोप लगाया था. 15 अक्टूबर को सीबीआई ने अस्थाना के खिलाफ रिश्वतखोरी के आरोप में केस दर्ज किया था.

इस FIR में अस्थाना पर सतीश बाबू सना से 3 करोड़ रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया था. FIR के 4 दिन बाद अस्थाना ने सीवीसी को खत लिखकर वर्मा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे. बाद में अस्थाना ने FIR को रद्द करने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचे थे. कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी और मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी. इस बीच सीबीआई ने अस्थाना की टीम के माने जाने वाले अपने ही महकमे के डीएसपी देवेंद्र कुमार को गिरफ्तार कर लिया था.

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