कौन हैं फेसबुक डेटा ब्रीच का खुलासा करने वाले क्रिस्टोफर वाइली

फेसबुक डाटा चोरी मामले में व्हिसल ब्लोअर वाइली अब पूरी दुनिया में हीरो बन चुके हैं लेकिन उनका जीवन अस्त व्यस्त रहा है.

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: March 28, 2018, 4:01 PM IST
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: March 28, 2018, 4:01 PM IST
फेसबुक डाटा लीक मामले में अगर कोई असल हीरो है तो वो हैं व्हिसल ब्लोअर क्रिस्टोफर वाइली. नारंगी बालों वाले और नाक में रिंग पहने वाइली. उम्र है महज 28 साल. दुनियाभर में उनका नाम चर्चाओं में है. उन्होंने ऐसा मामला उजागर किया है, जिसने सोशल मीडिया के एक स्याह पक्ष को तो उजागर किया ही है साथ ही फेसबुक जैसी विशालकाय कंपनी की चूलें हिला दी हैं.

वाइली पहनावे में लापरवाह से लगते हैं. वह अमूमन टी-शर्ट पहनते हैं, उस पर जैकेट चढाए होते हैं. हल्की दाढी रखते हैं और आंखों पर एक बड़ा चश्मा रहता है. उनकी जिंदगी बड़े उतार चढाव से भरी है. वो कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में पैदा हुए. उसके पेरेंट्स भौतिक विज्ञानी हैं. जब वह छह साल के थे तब स्कूल में उनके साथ वहीं के एक कर्मचारी ने उत्पीड़न किया. जिसके बाद उनके पिता अदालत में गए. ये मामला लंबा चला. बाद में स्कूल को मोटा हर्जाना देना पड़ा.

16 साल की उम्र में पढाई छोड़ दी
वाइली ने औपचारिक शिक्षा पूरे किए बिना ही 16 की उम्र में पढाई छोड़ दी. 17 साल की उम्र में वो कनाडा के एक नेता माइकल इग्नेटिक के लिए काम करने लगे. उन्होंने इस जल्दी ही छोड़ दिया और 19 साल की उम्र में कोडिंग सीखी. इसके बाद उन्होंने फिर पढाई करने का फैसला किया. उन्हें लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में एडमिशन मिला, जहां से उन्होंने कानून की पढाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने फैशन में पढाई की.

वो समलैंगिक हैं और खासे चतुर 
वो समलैंगिक हैं. गार्डियन की पत्रकार कैरोल कैडवालर पिछले एक साल से वाइली के साथ स्टोरी पर काम कर रही थीं. उन्होंने उन्हें चतुर, फनी, शातिर, बुद्धिमान, मास्टर स्टोरीटेलर और डाटा साइंस का उस्ताद पाया. वो अब 28 साल हैं. कनाडा के हैं. उन्हें लगता है कि काफी हद तक उन्होंने स्टीव बेन के मनोवैज्ञानिक युद्ध टूल को तोड़कर रख दिया है. स्टीव बेनन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव कैंपन में उनके सलाहकार थे, जिनके कैंब्रिज एनालिटिका से गहरे रिश्ते रहे हैं.

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वाइली की मदद से गार्डियन की पत्रकार ने सारी दुनिया को ये बताया कि किस तरह कैंब्रिज एनालिटिका ने अमेरिका में लाखों फेसबुक यूजर्स का पर्सनल डाटा चुराया. इसका अपने फायदे में राजनीतिक अभियान में इस्तेमाल किया.हालांकि फेसबुक का कहना है कि उसे नहीं मालूम कि उसकी साइट से डाटा चुराए गए हैं लेकिन जो खुलासा हुआ है, उसने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं.

खुद को फंतासी दुनिया का फन्ने खां जासूस मानते हैं
वाइली ने ब्रिटेन आने के बाद सबसे पहले इस देश के राजनीतिक हलके में ही कदम रखा. वो लिबरल डेमोक्रेट्स के लिए काम करने लगे. वो खुद को फंतासी दुनिया के किसी फन्ने खां जासूस की तरह मानते हैं. उनके तौरतरीके वैसे ही हैं.

एनालिटिका खड़ी करने में भूमिका
क्रिस्टोफर ने जब लिबरल डेमोक्रेट्स का काम छोड़ा तो वो कैंब्रिज एनालिटिका की पेरेंट कंपनी स्ट्रैटजिक कम्युनिकेशन लेब्रोरेटरीज (एससीएल) में रिसर्च डायरेक्टर के तौर पर काम करने लगे. उनका दावा है कि उन्होंने कैंब्रिज एनालिटिका कंपनी को खड़ा करने में मुख्य भूमिका अदा की. उन्होंने एक फ्रांसीसी दैनिक लिब्रेशन को इंटरव्यू में कहा, मैं रिसर्च का काम करना चाहता था और यही काम कर रहा था. कंपनी का बजट कई मिलियन का था. ये सबकुछ बहुत लुभाने वाला था.

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'डेटा ब्रीच' के मामले को दुनिया के सामने रखने वाले व्हिसिल ब्लोअर क्रिस्टोफर विली (फाइल फोटो)


2014 में एनालिटिका की नौकरी छोड़ी 
वर्ष 2014 में उन्होंने ये कंपनी छोड़ दी थी. उनका कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की स्तब्ध कर देने वाली जीत के बाद उन्होंने तय कर लिया था कि वो इस पूरे मामले को सामने लाकर रहेंगे. लोगों को बताएंगे कि किस तरह उनके व्यक्तिगत डाटा का चुनाव में गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया.

कैंब्रिज एनालिटिका लगातार उसके खिलाफ लगाए जा आरोपों से इनकार कर रही है. उसका कहना है कि विली केवल एक पार्ट टाइम कर्मचारी था, जिसने जुलाई 2014 में नौकरी छोड़ दी थी और उसको कुछ नहीं मालूम कि उसके बाद कंपनी किस तरह से काम कर रही थी.

तब लगा कि कहीं कुछ गड़बड़ है
उनके जॉब में एक अंधेरा टर्न तब आया जब उन्हें मालूम हुआ कि उनके पूर्व बॉस केन्या के एक होटल में मरे पाए गए. विली को महसूस हुआ कि किसी सौदे में अप्रिय हालात के कारण उन्हें ये खामियाजा भुगतना पड़ा है. उन्होंने मंगलवार को फेक न्यूज की जांच कर रही एक ब्रिटिश संसदीय से कहा, लोग मानते हैं कि उनके पूर्व बॉस को जहर दिया गया.

विली ने ब्रिटिश सांसदों से गुहार की है कि वो इस मामले की तह तक जाएं. उसका कहना है कि उसकी चिंता की वजह केवल राजनीति से जुड़ी नहीं है बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को नुकसान पहुंचाने से भी संबंधित है. इसमें ब्रेग्जिट रेफरेंडम कैंपेन भी शामिल था. सीए की गतिविधियों के कारण ब्रेग्जिट के वोटों पर असर पड़ा है. हालांकि उसका कहना है कि न तो वो फेसबुक के खिलाफ है और सोशल मीडिया या डाटा विरोधी.
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