क्या था दिल दहला देने वाला मुजफ्फरनगर दंगा, कौन हैं जिम्मेवार

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Updated: February 7, 2019, 12:30 PM IST
क्या था दिल दहला देने वाला मुजफ्फरनगर दंगा, कौन हैं जिम्मेवार
मुजफ्फरनगर दंगा

पांच साल पहले मुजफ्फरनगर में हत्या की एक वारदात ने ऐसा उग्र रूप लिया कि मुजफ्फरनगर दंगे की आग में झुलस गया. इसका असर अब भी इस इलाके में है

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मुजफ्फरनगर दंगा से जुड़े कवाल कांड में मलिकपुरा के ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की हत्या के केस में कोर्ट ने 06 फरवरी को सभी सातों आरोपियों दोषी करार दिया है. 8 फरवरी को सभी दोषियों को सजा सुनाई जाएगी. करीब साढ़े पांच साल पहले 27 अगस्त 2013 को जानसठ कोतवाली क्षेत्र के गांव कवाल में ये दोहरा हत्याकांड हुआ था. जिसके बाद वहां दंगे भड़क उठे थे. इसमें 62 लोगों की जान गई थी. 40 हजार से ज्यादा लोग बेघर हो गए थे.

दंगे में कितने लोगों की जान गई थी
मुज़फ़्फ़र नगर जिले के कवाल गांव में जाट-मुस्लिम हिंसा के साथ ये दंगा शुरू हुआ था, जिससे वहां 62 लोगों की जान गई थी. बड़े पैमाने पर लोग हताहत हुए. दंगे के दौरान यहां कर्फ्यू लगा दिया. सेना बुला ली गई. कर्फ्यू करीब 20 दिनों तक रहा. 17 सितम्बर को दंगा प्रभावित स्थानों से कर्फ्यू हटा लिया गया. सेना वापस बुला ली गयी.

क्या था पूरा

जाट और मुस्लिम समुदाय के बीच झड़प 27 अगस्त 2013 को शुरू हुआ. कवाल गाँव में कथित तौर पर एक जाट समुदाय लड़की के साथ एक मुस्लिम युवक ने छेड़खानी की. उसके बाद लड़की के दो ममेरे भाइयों गौरव और सचिन ने उस मुस्लिम युवक को पीट-पीट कर मार डाला. जवाबी हिंसा में मुस्लिमों ने दोनों युवकों की जान ले ली.

मुजफ्फरनगर दंगा के दौरान तनाव पूर्ण इलाके की स्थिति (फाइल फोटो)


इसके बाद इस मामले में राजनीति शुरू हो गई. दोनों पक्षों ने अपनी अपनी महापंचायत बुलाई. इसके बाद ही बड़े पैमाने पर हिंसा शुरू हो गई. नंगला मंदौड़ में हुई महापंचायत में भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं पर आरोप लगा कि उन्होंने जाट समुदाय को बदला लेने को उकसाया.
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कैसे तेज हुआ दंगा
07 सितंबर को महापंचायत से लौट रहे किसानों पर जौली नहर के पास दंगाइयों ने घात लगाकर हमला किया. दंगाइयों ने किसानों के 18 ट्रैक्टर और तीन मोटरसाइकिलें फूंक दीं. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक उन लोगों ने शवों को नहर में फेंक दिया. छह शवों ढूंढ निकाला गया. इस दंगे में एक फोटोग्राफर और पत्रकार समेत 62 लोगों की मौत हुई.

मुजफ्फरनगर दंगा के दौरान सेना बुला ली गई थी (फाइल फोटो)


प्रशासन ने क्या कार्रवाई की
दंगा फैलते ही शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया. सेना के हवाले शहर कर दिया गया. 1000 सेना के जवान, 10,000 पीएसी के जवान, 1300 सीआरपीएफ के जवान और 1200 रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों को शहर की स्थितियों पर नियंत्रण करने के लिए तैनात कर दिया गया. 11 सितम्बर 2013 तक पुलिस ने 10-12 लोगों को गिरफ्तार किया. 2300 शस्त्र लाइसेंस रद किए गए. सात लोगों पर रासुका के अन्तर्गत मुकदमा दर्ज हुआ. 1455 लोगों पर हिंसा से जुड़े कुल 503 मामले दर्ज किए गए थे.ये मामले समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान शामली और मुजफ्फरनगर में दर्ज किए गए थे.

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हाल में उप्र सरकार ने क्या किया
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने दंगों के दौरान दर्ज 131 मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसमें 13 हत्या, 11 हत्या की कोशिश के मामले हैं. इनमे ऐसे मामले हैं जिसमे आरोपियों को कम से कम सात साल तक की सजा हो सकती थी. 16 ऐसे मामले हैं जिसमें लोगों पर धार्मिक उन्माद फैलाने का आरोप है, जबकि दो ऐसे मामले भी हैं जिसमे जानबूझकर लोगों की धार्मिक भावनाएं को भड़काने का आरोप है.

मुजफ्फरनगर दंगा के दौरान हिंसा पर उतारू भीड़ (फाइल फोटो)


दंगों पर सहाय आयोग की रिपोर्ट क्या थी
जस्टिस विष्णु सहाय आयोग ने इस मामले में सरकार को क्लीन चिट दी, लेकिन तत्कालीन गृह सचिव, ज़िलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को दोषी ठहराया. इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में आयोग का गठन 9 सितंबर 2013 को किया गया था.

इसका काम दंगे रोकने में हुई प्रशासनिक चूकों का पता लगाना था. इसके अलावा दंगा भड़काने में मीडिया और राजनेताओं की भूमिका की जांच भी करनी थी. आयोग को दो महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया था. इसकी कार्य अवधि सात बार बढ़ाई गई.

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First published: February 7, 2019, 12:30 PM IST
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