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5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाले महाराष्ट्र के दूसरे CM थे देवेंद्र फडणवीस, ऐसा रहा है करियर

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Updated: November 26, 2019, 4:19 PM IST
5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाले महाराष्ट्र के दूसरे CM थे देवेंद्र फडणवीस, ऐसा रहा है करियर
देवेंद्र फडणवीस दूसरे कार्यकाल में केवल चार दिन ही मुख्यमंत्री रह पाए

देवेंद्र फडणवीस को जब पहली बार मुख्यमंत्री बनाया गया तब कोई उन्हें रेस में गिन नहीं रहा था लेकिन अब वो जरूर महाराष्ट्र में एक दमदार नेता बन चुके हैं. वो संघ की पारिवारिक पृष्ठभूमि से आते हैं और किताबें भी लिख चुके हैं

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  • Last Updated: November 26, 2019, 4:19 PM IST
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महाराष्ट्र (Maharashtra) में चार दिन पहले मुख्यमंत्री के पद की शपथ लेने वाले देवेंद्र फडणवीस ने इस्तीफा दे दिया है. ये कदम उन्होंने अजित पवार के वापस शरद पवार कैंप में लौटने के बाद उठाया. उन्होंने एक प्रेस कांफ्रेंस करके अपने इस्तीफे की घोषणा की.

44 वर्ष के महाराष्ट्र के अकेले नेता थे, जिन्होंने पांच साल का मुख्यमंत्री का कार्यकाल पूरा किया था. फिर दूसरी बार भी मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. हालांकि वो केवल चार दिन ही सीएम रह पाए.

वर्ष 1960 में महाराष्ट्र के निर्माण के बाद राज्य में 17 मुख्यमंत्री बने, लेकिन इनमें से दो ही अपना कार्यकाल पूरा कर सके. उसमें एक देवेंद्र फडणवीस भी हैं. इसके पहले केवल वसंतराव नाईक ही अपना कार्यकाल पूरा कर पाए थे.

देवेंद्र फडणवीस ने मराठा आंदोलन को कुशलतापूर्वक संभाल कर अपनी रणनीति का लोहा मनवाया था. इस आंदोलन के दौरान कई बार तो लगा कि मराठा विपक्षी राजनेताओं के इशारों पर ब्राह्मण मुख्यमंत्री को हटाना चाहते हैं. लेकिन, देवेंद्र फडणवीस इससे घबराए नहीं और हमेशा आंदोलनकारियों से बातचीत को तैयार रहे. अपने इस रवैये से उन्होंने मैदान मार लिया.

फडनवीस के बारे में
देवेंद्र फडणवीस का जन्म महाराष्ट्र के नागपुर में 22 जुलाई 1970 को हुआ था. उन्होंने वर्ष 2006 में अमृता राणाडे से विवाह किया.वो बैंक में काम करती हैं. उनकी एक बेटी दिविजा है. साल 2001 में वह भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए.

तीन किताबें लिख चुके हैं
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देवेंद्र फडणवीस तीन मराठी किताब लिख चुके हैं. उनके पिता गंगाधर राव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और जनसंघ में रहे. मां सरिता अमरावती के प्रसिद्ध कलती परिवार की वंशज हैं. देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर के सरस्वती विद्यालय से अपनी स्कूली शिक्षा ग्रहण की.फिर नागपुर से कानून की शिक्षा ली. 31 अक्तूबर 2014 को पहली बार सीएम बने.

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देवेंद्र फडणवीस को महाराष्ट्र में ऐसे नेता के रूप में जाना गया जिसने किसी से टकराहट नहीं ली बल्कि पार्टी के भीतर भी विरोधियों को साथ लेकर चलने का प्रयास किया


तब हर किसी को हैरानी हुई थी 
जब पांच साल पहले उनको मुख्यमंत्री बनाया गया था तब हर किसी को तब हैरानी हुई थी. हालांकि उनको सीएम बनाने का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मिल कर लिया था. तब वो केवल 44 साल के थे. वो महाराष्ट्र के इतिहास में वे सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बन गए. उनके मुख्यमंत्री बनने पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आईं.

तब फडणवीस पर उठे थे सवाल 
अधिकांश लोगों ने यह कहा कि फडणवीस का अपना कोई जनाधार नहीं है और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर एक ऐसा नेता चाहिए था जो उनकी हर बात माने,
लेकिन पांच सालों में देवेंद्र फडणवीस मंझे हुए नेता के रूप में उभरे. बीजेपी ने उन पर विश्वास जाहिर करते हुए उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री का चेहरा बनाया. बेशक उन्होंने 27 नवंबर को शक्ति परीक्षण से पहले इस्तीफा दे दिया लेकिन अब महाराष्ट्र में एक ताकतवर नेता के तौर पर वो अपना कद बड़ा कर चुके हैं.

फडणवीस की छवि ईमानदार से काम करने वाले नेता की भी रही


ईमानदारी काम करने वाले नेता की छवि
बीजेपी के नेताओं का कहना है कि फडणवीस का स्वभाव उन्हें राजनीति में यहां तक लेकर आया है. पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं की नजर में उन्होंने बहुत ईमानदारी से काम करने वाले नेता की छवि बनाई है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में भी उन्होंने अपनी सरलता से पदाधिकारियों का दिल जीता है. सर संघ प्रमुख मोहन भागवत सार्वजनिक तौर पर फडणवीस की तारीफ करते हैं.
अपने से जूनियर नेताओं और विधायकों से भी वे बेहद सरलता से मिलते हैं. स्वभाव की वजह से संगठन में और संगठन के बाहर भी उनके प्रति एक सकारात्मक माहौल बना है.’

सभी से अच्छे संबंध बनाए
कहा जाता है कि फडणवीस ने संगठन में अपने विरोधियों से बहुत चतुराई से अच्छे संबंध बनाए. प्रदेश में जो भी उनके प्रतिस्पर्धी हो सकते थे, उन सभी लोगों को न सिर्फ सार्वजनिक तौर पर फडणवीस ने बहुत सम्मान दिया बल्कि वे जो भी कहते गए, उनमें से सभी वाजिब काम फडणवीस करते गए.

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First published: November 26, 2019, 4:03 PM IST
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