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कौन है वो ड्रग डीलर, जिसे एशिया का 'अल चापो' कहा जाता है?

कुख्यात ड्रग डीलर सि चि लॉप
कुख्यात ड्रग डीलर सि चि लॉप

मैक्सिको के मादक पदार्थ तस्कर अल चापो (El Chapo) को दुनिया का सबसे बड़ा ड्रग डीलर (drug dealer) माना जाता रहा. चीनी मूल के सि चि लॉप (Tse Chi Lop) को एशियाई अल चापो कहा जा रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 26, 2021, 3:59 PM IST
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हाल ही में एम्सटर्डम पुलिस को कुख्यात ड्रग डीलर सि चि लॉप (Tse Chi Lop) को पकड़ने में सफलता मिली. चीनी मूल का ये डीलर दुनिया के सबसे बड़े ड्रग माफिया में से एक माना जाता है. पुलिस का मानना है कि लॉप की कंपनी केवल एशिया में ही हर साल लगभग 70 बिलियन डॉलर का व्यापार करती है.

ऑस्ट्रेलियाई पुलिस ने अपने इंटरनेशनल अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए शुक्रवार को एम्सटर्डम एयरपोर्ट पर इस ड्रग डीलर को पकड़ा. ऑस्ट्रलियाई फेडरल पुलिस (AFP) को इसके लिए पहले ही किसी संपर्क से सुराग मिला था. अब पुलिस को यकीन है कि 56 साल के इस तस्कर का गिरफ्त में आना इंटरनेशनल स्तर पर ड्रग तस्करी को कमजोर करेगा.

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लॉप को दुनिया के सबसे बड़े तस्करों में माना जाता है. यहां तक कि इसकी तुलना मैक्सिकन गैंगस्टर अल चापो से होती है. बता दें कि अल चापो को ड्रग तस्करी के मामले में दुनिया का सबसे कुख्यात डीलर कहा जाता है. साल 2019 में ही तीन महीने की सुनवाई के बाद चापो अब अमेरिकी जेल में है.
El chapo
मैक्सिको का मादक पदार्थ तस्कर अल चापो


अब लौटते हैं सि लॉप पर तो वो कथित तौर पर द कंपनी नाम से इस तस्कर ने ड्रग्स के लिए कंपनी बनाई हुई है. उसके लोग म्यांमार में जंगलों के बीच फैक्ट्रियां लगाकर सिंथेटिक ड्रग्स तैयार करते और उसे दूसरे ड्रग डीलर्स के पास पहुंचाते हैं. सीएनएन की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे म्यांमार से मादक पदार्थ बैंकाक और जापान से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक पहुंचाए जा रहे हैं.

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ऑस्ट्रलिया के बारे में पुलिस ने खुद कहा कि देश में पहुंच रहे ड्रग्स का 70 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा सि लॉप के जरिए आता है. यही वजह है कि वहां की पुलिस ने लॉप की धरपकड़ का अभियान लंबे समय से चलाया हुआ था और अब जाकर ये संभव हो सका. साल 2019 में ये समझने की कोशिश की गई कि आखिर इस तस्कर के पास कितनी दौलत होगी. इसका तो अनुमान नहीं लग सका लेकिन जो डाटा निकलकर आया वो किसी भी चौंकाने के लिए काफी है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में बताया गया कि रॉयटर्स ने ये जांच की और पाया कि केवल मेथैंफेटामाइन नाम की ड्रग की बिक्री से ही उसके पास 17 बिलियन डॉलर एक साल में आ जाते थे.

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लॉप की कंपनी सिर्फ बड़े ड्रग डीलरों के ही संपर्क में नहीं थी, बल्कि कैसिनो में भी उसका राज चलता था. खासतौर पर दक्षिण-पूर्व एशिया में कैसिनो में ज्यादा सख्ती नहीं है. ऐसे में ड्रग्स कैसिनो भी जाते थे.

दक्षिण-पूर्व एशिया में कैसिनो में ज्यादा सख्ती नहीं है, ऐसे में ड्रग्स कैसिनो भी जाते हैं सांकेतिक फोटो (flickr)


वैसे चीन में जन्मा ये शख्स साल 1988 में कनाडा चला गया और वहीं की नागरिकता ले ली. लॉप के शुरुआती कामों के बारे में खास जानकारी नहीं है लेकिन एकाएक ही वो पुलिस की नजरों में आया. ये नब्बे के दशक ही बात है, जब उसे अमेरिका में हेरोइन पहुंचाते पकड़ा गया. इसके बाद अगले नौ साल लॉप ने जेल में काटे लेकिन निकलते के तुरंत बाद ही वो सक्रिय हो गया और अपना तगड़ा नेटवर्क बना लिया.

लॉप इस बार खुद को जेल से बचाए रखने के लिए सारे तरीके अपनाता था. उसने अपनी कंपनी खोल रखी थी, जिसमें हजारों लोग मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े थे. लेकिन वो खुद कभी किसी के सामने नहीं आता था. इसकी जगह वो हांगकांग और मकाऊ में नाम बदलकर सामान्य लोगों जैसी जिंदगी जी रहा था ताकि पुलिस को शक न हो.

साल 2019 में इंटरपोल भी लॉप को पकड़ने के मामले में जुड़ गया. अलग-अलग देशों में इंटरपोल का नेटवर्क उसे इस ड्रग तस्कर का सुराग देने में मदद कर रहा था, जिस दौरान उसके एम्सटर्डम होते हुए कनाडा भागने की खबर मिली. इसी बीच उसे पकड़ने के लिए ऑपरेशन कुंगूर चला, जिसमें ऑस्ट्रलियाई पुलिस के अलावा कनाडा, चीन, जापान, म्यांमार, थाइलैंड और अमेरिका की एजेंसियां भी शामिल रहीं.
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