कौन हैं ईरान के नए राष्ट्रपति रईसी, क्यों उन्हें खासा कट्टर कहा जाता है?

ईरान के नए राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी अगस्त में सत्ता संभालेंगे

ईरान के नए राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी (Ebrahim Raisi, President of Iran) ने अस्सी के दशक में भयंकर कत्लेआम मचाया था. कथित तौर पर वे खुफिया डेथ कमेटी (secret death committee) के अहम सदस्य थे, जिन्होंने अपने खिलाफ खड़े लोगों को क्रूर यातनाएं देकर मरवाया.

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    पिछले कुछ दिनों से लगातार ईरान चुनाव सुर्खियों में था. अटकलों के बीच अब चुनाव का नतीजा आ चुका है और इब्राहिम रईसी वहां के नए राष्ट्रपति होंगे. वे वैसे तो अगस्त में राष्ट्रपति पद संभालेंगे लेकिन अभी से दुनियाभर में उन्हें लेकर आशंकाएं फैल रही हैं. इजरायल रईसी को ईरान का सबसे कट्टर राष्ट्रपति कह रहा है और लगातार न्यूक्लियर हमले जैसे भयंकर खतरे को लेकर आगाह कर रहा है. वैसे रईसी को 1988 का "तेहरान का जल्लाद" भी कहा जाता रहा, जिसने अपने खिलाफ खड़े हजारों लोगों को मौत दे दी थी.

    चुनाव में रईसी के किए ये दावे 
    राष्ट्रपति चुनाव की उम्मीदवारी में आते हुए इब्राहिम रईसी ने खुद को पद के लिए सबसे बेहतर बताते हुए दावा किया था वो देश से करप्शन मिटा देंगे और इकनॉमी को भी मजबूत बनाएंगे. 60 साल के रईसी ने इन दावों की बतौर चुनाव जीता या कोई दूसरा भी तरीका था, इसपर अटकलें लग रही हैं. लेकिन इस बीच सबसे ज्यादा बात उनके क्रूर इतिहास की हो रही है.

    Iran Ebrahim Raisi
    खुद को धर्म का रखवाला बताने वाले रईसी ने कम उम्र में ही अहम राजनैतिक ओहदे पाने शुरू कर दिए (Photo- firstpost)


    लोगों को मारने का फैसला लिया 
    खुद को कट्टर शिया और ईरान में धर्म का रखवाला बताने वाले रईसी ने कम उम्र में ही अहम राजनैतिक ओहदे पाने शुरू कर दिए. कहा जाता है कि वो उस कमीशन के प्रमुख सदस्य थे, जिसके एक फैसले में तेहरान में नरसंहार मचा दिया. तब रईसी की उम्र महज 20 साल थी. वे तेहरान के वेस्ट में करज की कोर्ट के प्रोसिक्यूटर हुआ करते थे. जल्द ही उनका प्रमोशन तेहरान हो गया. वहां वो उस सीक्रेट ट्रिब्यूनल का हिस्सा बन गए, जिसे डेथ कमेटी के नाम से भी जाना जाता है. इस बात का जिक्र बीबीसी की एक रिपोर्ट में मिलता है.

    बर्बर यातनाएं देकर मारा गया 
    इस ट्रिब्यूनल ने राजनैतिक कैदियों पर मुकदमा चलाया. बता दें कि ये कैदी पीपल्स मुजाहिदीन ऑर्गनाइजेशन ऑफ ईरान (PMOI) के सदस्य या सपोर्टर थे. ये लोग ईरान में वामपंथ की वकालत करते थे. इन्हीं लोगों को धड़ाधड़ मौत की सजा दे दी गई.

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    कई रिपोर्ट्स में जिक्र मिलता है कि कैदियों को ईरान की जेलों से निकालकर दीवार की ओर मुंह करवाकर गोली मार दी गई. ये भी कहा जाता है कि वे अपने खिलाफ बोलने वालों को मारने के लिए सजा के क्रूरतम तरीके निकालते थे, जैसे बिजली का झटका देना, पहाड़ियों से फेंकना और पत्थरों से मरवाना.

    Iran Ebrahim Raisi
    इब्राहिम रईसी उस कमीशन के सदस्य थे, जिसके फैसले में तेहरान में नरसंहार मचा दिया. सांकेतिक फोटो (pixabay)


    मारे गए लोगों की संख्या हजारों में 
    मारे गए लोगों और तथाकथित सपोर्टरों में पुरुषों के अलावा गर्भवती महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे तक शामिल थे. इस दौरान लाखों घर तबाह हुए और पीढ़ियों पर इस नरसंहार का असर पड़ा. मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी अपनी जांच में कहा कि रईसी उन जजों में से एक थे, जिन्होंने लोगों को मौत की सजा दी. हालांकि एमनेस्टी मारे गए लोगों की संख्या लगभग 5 हजार बताती है, वहीं ईरान के मानवाधिकार कार्यकर्ता और संस्थाएं मानती हैं कि कम से कम 30 हजार लोग मारे गए.

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    अमेरिका लगा चुका है आने पर पाबंदी 
    बाद में रईसी ने इस तरह के किसी आरोप से इनकार किया था, लेकिन बहुत सी मानवाधिकार संस्थाओं के बोलने और उस दौर में जुल्मों से बचकर निकल आए लोगों की बात मानते हुए अमेरिका ने भी इस ईरानी नेता पर काफी सारी पाबंदियां लगा दीं. उनपर ह्यूमन राइट्स के उल्लंघन का भी आरोप लगा.

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    रईसी की चुनावी दावेदारी के कारण बहुत से लोगों ने मतदान भी नहीं किया (Photo- news18 English via AFP)


    ईरान में राजनैतिक तब्दीली क्यों पड़ सकती है भारी 
    अब रईसी के राष्ट्रपति बनने की खबर फैलने से साथ ही अमेरिका समेत इजरायल को भी चिंता हो रही है. बता दें कि इजरायल और ईरान में हमेशा से ही तनाव चला आ रहा था, जिसमें बीते दो सालों में और तेजी आई है. ईरान और इजरायल दोनों ही एक दूसरे पर खुफिया हमलों का आरोप लगाते रहे. अब इजरायल की चिंता ये भी है कि ईरान नए राष्ट्रपति के साथ कहीं परमाणु-शक्ति संपन्न न हो जाए. बता दें कि ईरान अब भी परमाणु बम बनाने की क्षमता हासिल नहीं कर पाया है क्योंकि इजरायल लगातार इसमें रोड़े अटकाता रहा.

    अब कट्टरपंथी रईसी के आने के साथ, न केवल इजरायल, बल्कि पूरी दुनिया का संतुलन गड़बड़ा सकता है. यही कारण है कि ह्यूमन राइट्स पर काम करने वाली बहुतेरी संस्थाएं अब भी ईरान में चुनाव में घपलेबाजी की बात करते हुए राष्ट्रपति बन चुके रईसी के नरसंहार कांड की जांच कराने की मांग उठा रही हैं.

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