क्यों अचानक सुर्खियों में आ गईं अंखी दास, फेसबुक से क्यों खत्म हुआ उनका नाता

अंखी दास पिछले कुछ समय से फेसबुक में सामग्री को लेकर विवादों में थी.
अंखी दास पिछले कुछ समय से फेसबुक में सामग्री को लेकर विवादों में थी.

अंखी दास (facebook india policy head ankhi das) सालों से फेसबुक इंडिया की पॉलिसी प्रमुख थीं. अब उन्होंने फेसबुक कंटेट विवाद के बाद इस्तीफा दे दिया है. जानते हैं कौन हैं वो और किस तरह फेसबुक में कंटेट को लेकर विवाद गरमाने लगा

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 28, 2020, 2:07 PM IST
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अंखी दास कोलकाता के बेहद प्रसिद्ध लारेटो स्कूल की पढ़ी हुई हैं. जेएनयू में उन्होंने उच्च शिक्षा ली. माइक्रोसाफ्ट इंडिया में बड़े पद पर रहीं. फिर यकायक पिछले कुछ महीनों से उनका नाम फेसबुक के साथ उछलने लगा. हाल में संसदीय समिति ने उन्हें अपने सामने हाजिर होने के लिए बुलाया था. इसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया.

कुल मिलाकर ये कह सकते हैं अंखी दास ताकतवर सोशल मीडिया के जमाने में काफी ताकतवर हस्ती थीं, जो फेसबुक इंडिया की सबसे बड़ी बॉस थीं. नरेंद्र मोदी डॉट काम पर उनके तमाम लेख मिल जाएंगे.

अंखी दास भारतीय मीडिया के लिए कोई अपरिचित शख्स भी नहीं हैं. वो लंबे समय से अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस की कॉलमनिस्ट रही हैं. साथ अमेरिकी वेबसाइट हफ़िंग्टन पोस्ट के भारतीय एडिशन के लिए भी लिखती रही हैं.



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तब मामला गरम होने लगा
कुछ महीने पहले जब राहुल गांधी ने फेसबुक पर आरोप लगाया कि बीजेपी के नियंत्रण में है, उसी हिसाब से ये सोशल साइट सामग्री परोस रही है. अचानक मामला गरमाने लगा. इसके बाद केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्नसाद ने फेसबुक में एक खास विचारधारा के लोगों पर सोशल साइट को प्रभावित करने का आरोप लगाया. इसके बाद अंखी दास का नाम अक्सर चर्चाओं में आने लगा.

ankhi das
अंखी दास ने 09 साल पहले फेसबुक इंडिया में पॉलिसी प्रमुख का पद संभाला था लेकिन पिछले दिनों फेसबुक के अंदर ही उनके तौरतरीकों से सवाल खड़े होंने लगे


09 साल पहले फेसबुक से जुड़ी थीं
अंखी दास ने अक्तूबर 2011 से फ़ेसबुक के लिए काम करना शुरू किया. वो भारत में कंपनी की पब्लिक पॉलिसी प्रमुख थीं. इससे पहले वो भारत में माइक्रोसॉफ़्ट की पब्लिक पॉलिसी हेड थीं. माइक्रोसॉफ़्ट से वो जनवरी 2004 में जुड़ीं. वहां 08 साल काम करने के बाद फ़ेसबुक में चली गईं.

लॉरेट और जेएनयू से पढ़ाई
उन्होंने दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से 1991-94 के बैच में अंतरराष्ट्रीय संबंध और राजनीति शास्त्र में मास्टर्स की पढ़ाई की है. ग्रेजुएशन की उनकी पढ़ाई कोलकाता के लॉरेटो कॉलेज से पूरी हुई है.

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कॉलमिस्ट रही हैं
फेसबुक में पॉलिसी प्रमुख रहते हुए उन्होंने अपने एक लेख के जरिए ये जताया कि किस तरह फेसबुक आतंकवाद और कट्टरपंथियों से संबंधित सामग्री को हटाने में सक्षम है. इसके बावजूद फेसबुक पर नफरत फैलाने वाला कंटेट भी लगातार आता रहा. फेसबुक पर ये आरोप लगने लगे कि उसने भारत में सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के सामने हथियार डाल दिए हैं. इसे लेकर इंटरनेशनल मीडिया में भी चर्चाएं शुरू हो गईं.

ankhi da
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पिछले दिनों फेसबुक पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि वो सत्ताधारी पार्टी के अनुसार काम कर रही है


कंपनी के अंदर ही सवाल खड़े होने लगे
ये बातें जितनी जगजाहिर हो रही थीं, उतना ही अंखी दास विवादों में आ रही थीं. कहा जा रहा था कि वो खुद नफरत फैलाने वाले कई नेताओं और सामग्रियों को हटाने के विरोध में हैं.

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फेसबुक में अंदर ही दो खेमे बनने की खबरें आने लगीं, जिसमें एक खेमा लगातार कहने लगा कि अंखी दास जिस तरह से नफरत फैलाने वाली कुछ सामग्रियों को हटाने के खिलाफ हैं, वो ना केवल कंपनी की नीतियों के खिलाफ है बल्कि इससे हिंसा को भी बढ़ावा मिलता है.

पिछले हफ्ते संसदीय समिति के सामने पेश हुईं थीं
इन्हीं सब बातों को लेकर राहुल गांधी समेत कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने फेसबुक पर हमला बोल दिया. इस पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने तीखा प्रहार किया. उसके बाद मामला बढ़ता गया. पिछले सप्ताह अंखी दास डेटा प्राइवेसी से जुडे़ मामलों से संबंधित सवाल-जवाब के लिए एक संसदीय समिति के समक्ष पेश हुई थीं. मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि इस दौरान उनसे करीब दो घंटे तक समिति ने पूछताछ की.
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