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पाकिस्तान ISI के नए चीफ फैज़ हमीद बढ़ा सकते हैं भारत का सिरदर्द

पाकिस्तान ISI के नए चीफ फैज़ हमीद बढ़ा सकते हैं भारत का सिरदर्द

आईएसआई पाकिस्तान के नए प्रमुख फैज़ हमीद

आईएसआई पाकिस्तान के नए प्रमुख फैज़ हमीद

पाकिस्तान में वित्तीय संकट, आतंकवाद और पश्तो आंदोलन के चलते समस्या वाले हालात हैं, ऐसे में फैज़ हमीद को आईएसआई की कमान सौंपे जाने के क्या मतलब हैं? भारत और दुनिया के लिए पाकिस्तान ने क्या संदेश दिया है?

    पाकिस्तान ने आईएसआई के नए प्रमुख के तौर पर लेफ्टिनेंट जनरल फैज़ हमीद को महानिदेशक पद पर नियुक्त कर दिया है और इसके बाद से ही यह सवाल है कि पाकिस्तान का यह कदम भारत और दुनिया के लिए क्या मायने रखता है. साथ ही, यह भी जानने लायक बात है कि किन हालात में पाकिस्तान ने यह कदम उठाया है और क्यों. आखिर कौन हैं फैज़ हमीद और आसिम मुनीर को आईएसआई प्रमुख के तौर पर कार्यकाल पूरा होने से पहले ही क्यों हटा दिया गया?

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    अस्ल में, हुआ ये कि बीते रविवार की रात को पाकिस्तान ने ये खबर जारी की कि हमीद को आईएसआई का प्रमुख बनाया गया और साथ ही, कुछ और सैन्य अफसरों को नई ज़िम्मेदारियां दी गईं. लेकिन, इस नए बदलाव का कोई कारण अब तक स्पष्ट नहीं किया गया. ऐसे में, हर तरफ पाकिस्तान के इस फैसले को समझने की कोशिश की जा रही है. पाकिस्तानी सेना के बिज़नेस एम्पायर पर किताब लिख चुकीं विश्लेषक आएशा सिद्दीका की मानें तो हमीद बेहद कट्टरपंथी हैं.

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    आएशा ने मीडिया में कहा कि 'यह बेहद विध्वंसकारी फैसला है कि हमीद को ये ज़िम्मेदारी दी गई है. इसका मतलब यही है कि पाकिस्तानी सेना पीछे हटने या किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं है बल्कि और ज़्यादा बल इस्तेमाल करने की तैयारी है'. आएशा ने ऐसा क्यों कहा? हमीद की इस नियुक्ति के बारे में बारीकियां जानिए.

    इस नियुक्ति के पीछे किसका हाथ?
    आसिम मुनीर आईएसआई के प्रमुख बनाए गए थे और अपेक्षा थी कि वह तीन साल का कार्यकाल पूरा करेंगे लेकिन सिर्फ 8 महीने बाद ही उन्हें हटाकर हमीद को ये ज़िम्मेदारी दी गई. एक तरफ मुनीर सबसे कम वक्त तक इस पद पर रहने वाले अधिकारी बनकर रह गए तो दूसरी तरफ, हमीद अप्रैल में हुए प्रमोशन के बाद इतनी जल्दी इतना अहम पद पाने वाले अफसर बन गए.

    अस्ल में, आईएसआई प्रमुख की नियुक्ति प्रधानमंत्री करते हैं. लेकिन, पाकिस्तान के संविधान के मुताबिक प्रधानमंत्री को आर्मी प्रमुख की सहमति से यह नियुक्ति करना होती है. ये केवल सैद्धांतिक स्थिति है. वास्तविकता ये है कि आर्मी या आर्मी प्रमुख की तूती बोलती है और सरकार को फैसला मानना भर होता है. पाकिस्तान की अंदरूनी राजनीति और विदेश नीति को लेकर एक बार फिर 'मुल्ला मिलिट्री गठबंधन' जुमले को हवा मिली है. हमीद की इस नियुक्ति के पीछे भी आर्मी ही है क्योंकि हमीद आर्मी प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के खास माने जाते रहे हैं.

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    पाकिस्तान सेना प्रमुख बाजवा के साथ पीएम इमरान खान


    हमीद का पिछला रिकॉर्ड क्या है?
    बाजवा की तरह ही हमीद भी बलोच रेजिमेंट के अफसर रहे हैं इसलिए दोनों के बीच समीकरण अच्छे रहे हैं. साल 2017 में इस्लामाबाद में तहरीक-ए-लब्बैक के प्रदर्शनकारियों ने जो बलवा किया था, उसके बाद इस्लामाबाद में बड़ी उथल पुथल के आसार बन गए थे. तब, आईएसआई के काउंटर इंटेलिजेंस के प्रमुख के तौर पर हमीद ने ही फैज़ाबाद समझौता करवाकर बाजवा की गुडबुक में अपना नाम और अहम कर दिया था. इस समझौते पर गारंटर के तौर पर हमीद के दस्तखत हुए थे और संदेश ये गया था कि बाजवा के प्रयासों से यह समझौता मुमकिन हुआ.

    तो क्या इमरान की गुड लिस्ट में भी हैं हमीद?
    पाकिस्तान में 2018 के चुनावों के वक्त हमीद के साथ एक और विवाद जुड़ गया था, जब पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ ने हमीद का नाम लेकर आरोप लगाया था कि हमीद ने उनकी पार्टी पीएमएल के सदस्यों को इमरान खान की पार्टी में शामिल करवाने के लिए तोड़ा था. उस वक्त, आईएसपीआर के लेफ्टिनेंट जनरल आसिफ गफूर हमीद के बचाव में खुलकर आए थे. लेकिन, सोशल मीडिया में हमीद के खिलाफ काफी गुस्सा देखा जा रहा था.

    भारत की नज़र कहां रहेगी?
    हमीद की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब पाकिस्तान वित्तीय संकट से जूझ रहा है और इमरान खान सेना प्रमुख के साथ रणनीति बना रहे हैं. साथ ही, उत्तर पश्चिम पाकिस्तान में पश्तो तहफ्फुज़ आंदोलन चल रहा है, जिसे पाक आर्मी आतंकी और देशद्रोही मुहिम करार दे चुकी है. ये पाकिस्तान के अंदरूनी मामले हैं, जिनमें हमीद की भूमिका रहेगी. वहीं, अफगान शांति वार्ता को लेकर अमेरिका और तालिबान के बीच भी हमीद की भूमिका होगी. इनके अलावा, भारत की नज़र खास तौर से इस बात पर रहेगी कि अब पाकिस्तान का रवैया क्या होगा.

    बालाकोट एयर स्ट्राइक के चलते बने दबाव के बाद पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ खड़े होने की हामी भर चुका है. पाक ने अपने इस स्टैंड के चलते ही हाल में, भारत को आशंकित आतंकी हमले से जुड़ा एक इंटेलिजेंस भी मुहैया करवाया. अब भारत की खास नज़र पाकिस्तान के इस स्टैंड पर रहेगी कि इसमें क्या बदलाव आता है क्योंकि अब तक मीडिया में विश्लेषकों के हवाले से जो बातें आ रही हैं, उनके मुताबिक हमीद कट्टरपंथी रहे हैं और भारत के खिलाफ कोई कदम उठाने से परहेज़ नहीं करने वालों में हैं. वैसे भी, भारत के खिलाफ आतंकवाद को हमेशा शह देती रही पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई को लेकर भारत सतर्क रहता ही है, और दोनों देशों के बीच बिगड़े हुए हालात के चलते हमीद की नियुक्ति भारत के लिए चिंता का विषय है ही.

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    Tags: India pakistan, Pakistan, Pakistan army, Terrorism

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