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कौन है कोरोना वायरस का वह पहला मरीज, जिससे दुनियाभर में फैली महामारी

माना जा रहा है कि कोरोना वायरस (Coronavirus) से संक्रमित हुए पहले व्यक्ति की तलाश के साथ ही इसके इलाज में बड़ी कामयाबी हासिल की जा सकती है.
माना जा रहा है कि कोरोना वायरस (Coronavirus) से संक्रमित हुए पहले व्यक्ति की तलाश के साथ ही इसके इलाज में बड़ी कामयाबी हासिल की जा सकती है.

माना जा रहा है कि कोरोना वायरस (Coronavirus) से संक्रमित हुए पहले व्यक्ति की तलाश के साथ ही इसके इलाज में बड़ी कामयाबी हासिल की जा सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 9, 2020, 12:35 PM IST
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कोरोना वायरस (Coronavirus) के दुनियाभर में फैलने के साथ अब चीन ने उस व्यक्ति की तलाश तेज कर दी है, जो इस बीमारी का पहला मरीज था. यानी कि इस रोग का पेशेंट जीरो कौन है. मेडिकल के क्षेत्र में तकनीकी भाषा में उसे 'पेशेंट जीरो' कहा जाता है, जो किसी वायरस या बैक्टीरिया का पहला मरीज होता है.

सामने आए मतभेद
बीबीसी पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक चीनी प्रशासन और एक्सपर्ट्स में पेशेंट जीरो को लेकर मतभेद है. माना जा रहा है कि कोरोना से संक्रमित हुए पहले व्यक्ति की तलाश के साथ ही इसके इलाज में बड़ी कामयाबी हासिल की जा सकती है. इससे ये पता लगाने में भी आसानी होगी कि इस वायरस की उत्पत्ति कब, कहां और कैसे हुई.

चमगादड़ या सांप?
कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर अभी तक कई तरह के शोध सामने आए हैं. जब चीन में कोविड-19 (COVID-19) के मामलों में तेजी आई थी तब सबसे पहले एक शोध में यह बताया गया था कि ये वायरस चीन के जहरीले सांप से विकसित हुआ है. लेकिन फिर बाद में इसकी उत्पत्ति का कारण चमगादड़ को माना गया. हालांकि अब तक शोधकर्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं. ऐसे में पेशेंट जीरो इन सारे सवालों का जवाब हो सकता है.



दिसंबर महीने में चीनी सरकार ने जानकारी दी थी कि कोरोना वायरस के शुरुआती मरीजों में निमोनिया जैसे लक्षण उभर कर सामने आए थे. मोटे तौर पर ये मामले हुबे राज्य के वुहान शहर के सी-फूड मार्केट से जुड़े हुए थे.

वुहान है वैश्विक केंद्र
कोरोना केसेज़ में चीन का वुहान शहर वैश्विक केंद्र है. दुनियाभर में हुई कुल मौतों का ज्यादातर हिस्सा यहीं से है और सबसे ज्यादा संक्रमित लोगों का भी. इसी वजह से वायरस को वुहान वायरस का नाम भी दिया गया. वुहान शहर में वायरस की भयावहता की तस्वीरें दुनियाभर में वायरल हुई हैं. हालांकि अब ये वायरस इटली और ईरान जैसे देशों में ज्यादा कहर ढा रहा है.

क्या है एक्सपर्ट्स की राय
चीनी सरकार के दाव से उलट अगर एक्सपर्ट्स की राय पर भरोसा किया जाए तो पेशेंट जीरो का मीट मार्केट से कोई लेना-देना नहीं था. लैंसेट जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना का पहला मामला 1 दिसंबर 2019 को ही सामने आ गया था. जिस व्यक्ति को ये संक्रमण पहली बार लगा उसका सी-फूड मार्केट से कोई संपर्क नहीं था. गौरतलब है कि 1 दिसंबर की तारीख वुहान में कोराना के फैलने से काफी पहले की है. ऐसे में चीनी सरकार के दावों पर अंगुलियां उठाई जा सकती हैं.

फरवरी महीने के आखिरी में चीनी अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में प्रकाशित एक रिपोर्ट में भी दावा किया गया कोरोना की उत्पत्ति का केंद्र वुहान का सी-फूड मार्केट नहीं है. चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंस और चाइनीज इंस्टिट्यूट ऑफ ब्रेन की एक रिसर्च में यह दावा किया गया था. डॉ. यू वेनबिन की अगुवाई में डॉक्टरों की एक टीम ने जिनोमिक डाटा का विश्लेषण कर ये निष्कर्ष निकाला था. टीम ने पाया कि सी-फूड मार्केट के जरिए फैलने के पहले भी कोरोना का संक्रमण फैल चुका था. ये स्डटी तो कोरोना को और भी पहले से फैला हुआ बता रही है. इसके मुताबिक संभव है कि कोराना का संक्रमण बीते नवंबर महीने से ही फैलना शुरू हो गया था.

क्या मानता है WHO
वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन अभी शुरुआती राय पर ही टिका हुआ है और उसका मानना है कि ये संक्रमण किसी जहरीले जानवर से ही इंसानों में फैला है.

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