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जानिए, कौन हैं ग्रेटा थनबर्ग, जो भारत में अचानक चर्चाओं में आ गई हैं

जानिए, कौन हैं ग्रेटा थनबर्ग, जो भारत में अचानक चर्चाओं में आ गई हैं

किसान आंदोलन के बीच  ग्रेटा थनबर्ग का नाम लिया जा रहा है

किसान आंदोलन के बीच ग्रेटा थनबर्ग का नाम लिया जा रहा है

बेहद प्रभावशाली भाषण से संयुक्त राष्ट्र की बोलती बंद करने वाली ग्रेटा थनबर्ग (Greta Thunberg) खुद को ऑटिज्म से पीड़ित बताती रहीं. अब किसान आंदोलन (2020–2021 Indian farmers' protest) के दौरान भारत के खिलाफ दुष्पप्रचार के आरोप में वे विवादों में हैं.

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    दो महीने से ज्यादा समय से चल रहे किसान आंदोलन के बीच अचानक कई नाम लिए जा रहे हैं. इसमें सबसे ज्यादा जिक्र ग्रेटा थनबर्ग का हो रहा है. 18 साल की ये युवती पहली बार चर्चाओं में नहीं आई, बल्कि साल 2018 में केवल 15 साल की उम्र में स्वीडन की ये लड़की पर्यावरण बचाने के लिए दुनियाभर के नेताओं से भिड़ गई थी.

    पहली बार चर्चा कब हुई 
    ग्रेटा ने साल 2018 में ग्लोबल वॉर्मिंग के लिए लोगों में जागरुकता लाने की मुहिम शुरू की. वे स्वीडिश संसद के बाहर बैठने लगीं, वो भी एक या दो रोज नहीं, बल्कि लगातार हर शुक्रवार को. इसके बाद ही ग्रेटा का नाम पहली बार चर्चाओं में आया. यहां तक कि देखीदेखी कई देशों ने अपने यहां #FridaysForFuture नाम के साथ पर्यावरण बचाने की मुहिम शुरू कर दी.

    शुक्रवार किया पर्यावरण के नाम 
    स्थानीय लोग हर शुक्रवार पर्यावरण के नाम करने लगे. यहां तक कि इसमें 24 देशों के 17 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया. तो यहां से शुरू हुई ग्रेटा की पहचान बनने की कहानी. जल्द ही ये प्रदर्शन और विस्तृत हुआ, जिसमें 4 लाख से ज्यादा लोग जुड़े और 140 देशों से ज्यादा का ग्रेटा को समर्थन हासिल हुआ.

    Greta Thunberg

    ग्रेटा ने साल 2018 में ग्लोबल वॉर्मिंग के लिए लोगों में जागरुकता लाने की मुहिम शुरू की

    ग्रेटा का निजी जीवन 
    ग्रेटा का जन्म 3 जनवरी 2003 को स्वीडन के स्टॉकहोम में हुआ. उनके पिता स्वांटे थनबर्ग एक एक्टर और मां मलेना एर्नमन ओपेरा गायिका हैं. पर्यावरण के लिए पहले से ही काफी जागरुक माने जाते देश स्वीडन में 8 साल की उम्र से ग्रेटा ने क्लाइमेट चेंज को लेकर पढ़ना शुरू किया.

    शुरू किया ट्रेन से ही सफर 
    12 साल की उम्र तक आते-आते उन्होंने फ्लाइट और मीट दोनों का इस्तेमाल करना बंद कर दिया. वे ट्रेन से सफर करने लगीं और अपने आसपास के लोगों को भी कम दूरी के लिए फ्लाइट के इस्तेमाल को मना करने लगीं. उनका कहना है कि इससे ग्लोबल वॉर्मिंग कम करने में हम मदद कर सकते हैं. साथ ही साथ नॉनवेज छोड़ने को लेकर भी उनका यही तर्क है.

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    भाषण ने सबकी जबान पर लाया नाम
    फ्राइडे फॉर फ्यूचर से सुर्खियों में आ चुकी ग्रेटा को तब दुनियाभर के लोग जानने लगे, जब उन्होंने यूनाइटेड नेशन्स में एक बेहद मजबूत भाषण दिया. ये सितंबर 2019 की बात है. ग्रेटा को पर्यारवणविद बतौर बुलाया गया था. इस कमउम्र लड़की से हालांकि किसी को खास उम्मीद नहीं थी लेकिन उसने माइक पर बोलना शुरू किया तो लोग देखते रह गए. ग्रेटा ने मुक्का-सा मारते हुए काफी गुस्से में कहा- आपकी हिम्मत कैसे हुई? मुझे यहां नहीं होना चाहिए था बल्कि अभी स्कूल में होना चाहिए था. अपने खोखले शब्दों से आपने मेरा बचपन और मेरे सपने चुरा लिए हैं.

    Greta Thunberg

    ग्रेटा थनबर्ग ने यूनाइटेड नेशन्स में एक बेहद मजबूत भाषण दिया था (Photo- news18 English via Reuters)

    टाइम पर्सन ऑफ ईयर बनी
    ग्रेटा इस भाषण के जरिए कह रही थीं कि उनकी उम्र के बच्चों को फिलहाल स्कूल में होना चाहिए था लेकिन बिगड़ते पर्यावरण की चिंता में ऐसा नहीं हो सका. उनका ‘आपकी हिम्मत कैसे हुई’ कहना खासतौर पर काफी चर्चा में रहा. उसी साल टाइम मैगजीन ने ग्रेटा को पर्सन ऑफ द ईयर सम्मान दिया. ग्रेटा यह सम्मान पाने वाली सबसे कम उम्र की शख्स बनीं.

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    सम्मान का सिलसिला यहीं खत्म नहीं हुआ. राइट लिवलीहुड अवॉर्ड से भी उन्हें नवाजा गया. इसके अलावा साल 2019 में ही वे पहली बार नोबेल पीस प्राइज के लिए चुनी गईं, हालांकि ये पुरस्कार उन्हें नहीं मिला. अब साल 2021 में ग्रेटा का दोबारा पीस प्राइज के लिए नॉमिनेशन हुआ है.

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    आलोचनाएं भी मिलती रहीं 
    वैसे ग्रेटा को लगातार मिल रही इस पहचान पर सभी खास खुश नहीं. पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से उनके टकराव की खबरें कई बार आ चुकी हैं. यहां तक कि ट्रंप की हार के बाद भी ग्रेटा ने उन्हीं के लहजे में एक व्यंग्यात्मक ट्वीट भी किया था. ब्राजीलियन राष्ट्रपति भी मानते हैं कि ग्रेटा को बेवजह मीडिया तवज्जो दे रहा है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी ग्रेटा पर टिप्पणी कर चुके हैं कि ‘वे एक अच्छी लड़की हैं, पर उनके पास सूचनाओं का अभाव है’.

    Greta Thunberg

    भारत के किसान आंदोलन में ग्रेटा अपने ट्वीट के कारण विवादों में हैं

    इस बीमारी से हैं पीड़ित
    ग्रेटा अपने बारे में बताती हैं कि वे एस्परजर सिंड्रोम की शिकार हैं. बता दें कि ये सिंड्रोम ऑटिज्म का ही एक प्रकार है, जो लोगों के समझने और खासकर बोलने की क्षमता पर असर डालता है. हालांकि ग्रेटा लगातार तो ताकतवर भाषण दे रही हैं, वो बताता है कि ग्रेटा इस परेशानी को पीछे छोड़ चुकी हैं.

    क्यों हो रहीं ट्रोल
    फिलहाल भारत के किसान आंदोलन में ग्रेटा अपने ट्वीट के कारण विवादों में हैं. उनपर आरोप है कि वे भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने वालों की टीम का हिस्सा हैं. बता दें कि ग्रेटा ने गलती से कोई सीक्रेट दस्तावेज भी ट्वीट कर दिया था, जिसमें हरेक दिन की जानकारी देते हुए बताया गया कि कैसे आंदोलन को सफल बनाना है. सीक्रेट डॉक्यूमेंट लीक होने के बाद दिल्ली पुलिस ने ग्रेटा के खिलाफ FIR दर्ज कर ली.

    Tags: Farmers Agitation on Delhi Border, Farmers Protest against New Farm Law, Greta Thunberg, Twitter

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