चिदंबरम की याचिका खारिज करने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के जज को केंद्र ने दिया यह ज़िम्मा

जस्टिस सुनील गौड़ (Justice Sunil Gaur) की मनी लॉन्ड्रिंग अपीलीय ट्रिब्यूनल (Appellate Tribunal for Prevention of Money Laundering Act) में अध्यक्ष पद पर नियुक्ति को लेकर सवाल उठ रहे हैं. कांग्रेस आरोप लगा रही है कि उन्हें चिदंबरम की जमानत याचिका खारिज करने का फायदा मिला...

News18Hindi
Updated: August 29, 2019, 4:56 PM IST
चिदंबरम की याचिका खारिज करने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के जज को केंद्र ने दिया यह ज़िम्मा
जस्टिस सुनील गौड़ ने पी चिदंबरम की अग्रिम जमानत की याचिका खारिज की थी
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Updated: August 29, 2019, 4:56 PM IST
केंद्र सरकार जस्टिस सुनील गौड़ (Justice Sunil Gaur) को मनी लॉन्ड्रिंग अपीलीय ट्रिब्यूनल (Appellate Tribunal for Prevention of Money Laundering Act) का अध्यक्ष बनाने जा रही है. सुनील गौड़ दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi high Court) के वही जज हैं, जिन्होंने अपनी रिटायरमेंट के कुछ दिन पहले आईएनएक्स मीडिया मामले (INX Media Case) में पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम (P Chidambaram) की अग्रिम जमानत की याचिका रद्द कर दी थी.

सुनील गौड़ पिछले हफ्ते गुरुवार को ही दिल्ली हाईकोर्ट से रिटायर हुए हैं. केंद्र सरकार ने उनकी रिटायरमेंट के महज कुछ दिनों में ही उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग अपीलीय ट्रिब्यूनल का अध्यक्ष बनाने का फैसला कर लिया.



हालांकि अभी इस बारे में केंद्र सरकार की तरफ से कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है. लेकिन ये कहा जा रहा है कि रिटायर्ड जज सुनील गौड़ की नियुक्ति तय है. एनडीटीवी के मुताबिक सुनील गौड़ मनी लॉन्ड्रिंग अपीलीय ट्रिब्यूनल में 23 सितंबर को मौजूदा अध्यक्ष मनमोहन सिंह की जगह लेंगे.

दिल्ली हाईकोर्ट के जज के तौर पर 20 अगस्त को सुनील गौड़ ने पी चिदंबरम की अग्रिम जमानत की याचिका खारिज की थी. 22 अगस्त को वो दिल्ली हाईकोर्ट से रिटायर हो गए. 28 अगस्त को खबर आई कि उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग अपीलीय ट्रिब्यूनल का अध्यक्ष बनाया जा रहा है.

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सीबीआई की हिरासत में पी चिदंबरम


कांग्रेस के निशाने पर केंद्र सरकार और रिटायर्ड जज
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कांग्रेस अब केंद्र सरकार और रिटायर्ड जज की निष्ठा पर सवाल उठाते हुए कह रही है कि सुनील गौड़ को पी चिदंबरम की अग्रिम जमानत की याचिका खारिज करने का इनाम मिला है.

कांग्रेस के प्रवक्ता और सुप्रीम कोर्ट के वकील ब्रीजेश कलप्पा ने ट्वीट कर सुनील गौड़ को बधाई देते हुए कटाक्ष किया. उन्होंने लिखा, ‘दुनिया का वो एकलौता जॉब कौन सा है, जिसमें आपको दिए आन्सरशीट को कॉपी-पेस्ट करने पर सबसे ज्यादा मार्क्स मिलते हों?’ उनका इशारा जस्टिस सुनील गौड़ के चिदंबरम पर दिए फैसले की तरफ था.

जस्टिस सुनील गौड़ के अग्रिम जमानत की याचिका खारिज करने के बाद ही पी चिदंबरम को सीबीआई के जरिए गिरफ्तारी संभव हो पाई.

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पी चिदंबरम


कौन हैं रिटायर्ड जस्टिस सुनील गौड़

सुनील गौड़ का जन्म यूपी के बुलंदशहर में 23 अगस्त 1957 को हुआ था. उन्होंने 1984 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से वकालत की प्रैक्टिस शुरू की थी. उन्होंने हाईकोर्ट में करीब 10 वर्षों तक सिविल और क्रिमिनल मामलों की पैरवी की.

जस्टिस सुनील ने गौड़ दिल्ली हाईअर ज्यूडिशियल सर्विस में रहने के दौरान सिविल और क्रिमिनल केसों का निपटारा किया. उन मामलों में इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार शिवानी भटनागर की हत्या का मामला भी शामिल था. सुनील गौड़ दिल्ली की तीसहजारी और कड़कड़डूमा कोर्ट में भी जज के पद पर रह चुके हैं.

जस्टिस सुनील गौड़ अप्रैल 2008 में प्रमोशन पाकर दिल्ली हाईकोर्ट आए थे. अप्रैल 2012 में उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट का परमानेंट जज बनाया गया.

दिल्ली हाईकोर्ट में कई हाई-प्रोफाइल मामलों की सुनवाई की

दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस सुनील गौड़ ने कई हाई प्रोफाइल मामलों की सुनवाई की है. नेशनल हेराल्ड केस की सुनवाई भी जस्टिस सुनील गौड़ ने ही की थी. नेशनल हेराल्ड केस में उन्होंने सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ अभियोजन की राह तैयार की थी.

पिछले साल उन्होंने नेशनल हेराल्ड अखबार छापने वाले एसोसिएटेड जनरल्स लिमिटेड को आईटीओ का दफ्तर खाली करने का आदेश दिया था. दिल्ली हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने भी इस फैसले को बनाए रखा था. लेकिन इस साल अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने फैसले के अमल पर रोक लगा दी. ये मामला अभी भी सुप्रीम कोर्ट में है.

सुनील गौड़ ने ही पिछले हफ्ते सोमवार को अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले में कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी की अग्रिम जमानत नामंजूर कर दी थी.

जस्टिस सुनील गौड़ ने भ्रष्टाचार के कुछ गंभीर मामलों की सुनवाई की है. इसमें मीट कारोबारी मोईन कुरैशी का मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा मामला भी शामिल है.

जस्टिस गौड़ ने आईएनएक्स मीडिया मामले में पी चिदंबरम की अग्रिम जमानत की याचिका खारिज करते हुए उन्हें इस मामले का मुख्य साजिशकर्ता कहा था.

कूलिंग पीरियड खत्म होने का सुनील गौड़ को मिला फायदा

मनी लॉन्ड्रिंग अपीलीय ट्रिब्यूनल में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) से जुड़े मामलों की सुनवाई होती है. इसका अध्यक्ष हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ज जज को बनाया जाता है.

इसके पहले रिटायरमेंट के तुरंत बाद ऐसे ट्रिब्यूनल में जजों की नियुक्ति नहीं होती थी. एक कूलिंग पीरियड होता था, जिसके बाद ही रिटायर्ड जज की नियुक्ति ऐसे किसी ट्रिब्यूनल में की जाती थी. लेकिन इस साल फरवरी में मोदी सरकार ने कूलिंग पीरियड का प्रावधान खत्म कर दिया. जिसके बाद रिटायरमेंट के तुरंत बाद जजों की किसी ट्रिब्यूनल में नियुक्ति संभव हो पाई है.

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First published: August 29, 2019, 2:37 PM IST
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