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कौन हैं दलित कारसेवक कामेश्वर चौपाल जिन्हें CM योगी ने किया याद

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Updated: February 5, 2020, 6:24 PM IST
कौन हैं दलित कारसेवक कामेश्वर चौपाल जिन्हें CM योगी ने किया याद
कामेश्वर चौपाल बिहार के सुपौल जिले के रहने वाले हैं जो मिथिला इलाके में पड़ता है.

राम मंदिर के लिए ट्रस्ट (Ram Mandir Trust) बनाए जाने की घोषणा के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने लिखा है, 'आज का दिन ऐतिहासिक है. श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण की पहली शिला दलित समाज के श्री कामेश्वर चौपाल (Kameshwar Chaupal) जी ने रखी थी.'

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  • Last Updated: February 5, 2020, 6:24 PM IST
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पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने लोकसभा में बुधवार को राम मंदिर ट्रस्ट (Ram Mandir Trust) के गठन का ऐलान कर दिया. वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर बताया कि 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र' ट्रस्ट में 15 ट्रस्टी होंगे, जिसमें से एक ट्रस्टी हमेशा दलित समाज से रहेगा. इस बीच बुधवार को ही यूपी की योगी सरकार ने अयोध्या में मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन के आवंटन पर मुहर लगा दी है.

इन फैसलों पर अब सीएम योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट किया है. सीएम योगी ने बताया कि रामजन्म भूमि मंदिर निर्माण की पहली शिला दलित समाज ने ही रखी थी. सीएम योगी आदित्यनाथ ने लिखा है, 'आज का दिन ऐतिहासिक है. श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण की पहली शिला दलित समाज के श्री कामेश्वर चौपाल जी ने रखी थी. 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र' ट्रस्ट के 15 सदस्यों में भी एक सदैव दलित समाज से होगा.'

कौन हैं कामेश्वर चौपाल
कामेश्वर चौपाल बिहार के सुपौल जिले के रहने वाले हैं जो मिथिला इलाके में पड़ता है. हिंदू धर्म में मिथिला इलाके को सीता का घर भी कहा जाता है. ओपेन मैगजीन में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कामेश्वर चौपाल ने बताया था- ''हम लोग जब बड़े हो रहे थे तो राम को अपना रिश्तेदार मानते थे. उनके मुताबिक मिथिला इलाके में शादी के दौरान वर-वधु को राम-सीता के प्रतीकात्मतक रूप में देखने की प्रथा है.''

कामेश्वर का गांव कोशी नदी के किनारे पड़ता है. कामेश्वर ने अपनी पढ़ाई लिखाई मधुबनी जिले में की. यहीं पर कामेश्वर संघ के संपर्क में आए. उनके एक अध्यापक संघ के कार्यकर्ता हुआ करते थे. यहीं से कामेश्वर ने हाईस्कूल तक की शिक्षा हासिल की. संघ से जुड़े उस अध्यापक की ही मदद से कामेश्वर को कॉलेज में दाखिला मिला.

कामेश्वर चौपाल ने उस लेख में बताया था कि संघ लोगों के बीच बेहद शांतिपूर्ण ढंग से नेटवर्क बनाकर अपना काम करता है. उस अध्यापक ने कामेश्वर को एक लेटर दिया था जिसे ले जाकर उन्होंने कॉलेज के एक टीचर को दिया. और फिर कामेश्वर का एडमिशन कॉलेज में आसानी से हो गया.



ग्रेजुएशन पूरा करने के दौरान ही कामेश्वर संघ के प्रति पूरी तरह समर्पित हो चुके थे. इसके बाद उन्हें मुधबनी जिले का जिला प्रचारक बना दिया गया. इसी समय कामेश्वर ने तमिलनाडु के मीनाक्षीपुरम की उस घटना के बारे में सुना जब 800 दलितों ने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था. कामेश्वर ने बताया था कि यही वो घटना है जिससे उनके भीतर राम मंदिर को लेकर इच्छा बलवती हो गई थी.

इस सामूहिक धर्म परिवर्तन को देखते हुए संघ ने संस्कृति रक्षा निधि योजना बनाई. 1984 में विश्व हिदू परिषद ने दिल्ली के विज्ञान भवन में धर्म संसद का आयोजन किया. इस धर्म संसद में बड़ी संख्या में संत और कार्यकर्ता जुटे. इस धर्म संसद में अशोक सिंहल ने एक भाषण दिया जिसमें हिंदू धर्म के खतरे में होने की बात कही गई. इस कार्यक्रम में कश्मीर के आखिरी महाराज हरिसिंह के पुत्र कर्ण सिंह ने भी भाषण दिया. उन्होंने कहा कि ये हिंदुओं के लिए शर्म की बात है कि राम की जन्मभूमि पर एक दीपक तक नहीं जला सकते हैं. इसी बैठक में अयोध्या, काशी और मथुरा में धार्मिक भूमियों पर हिंदुओं के हक की बात की गई. ये भी तय किया गया कि राम मंदिर के यात्रा भी निकाली जाएगी.

इसी के तहत पहली यात्रा सीतामढ़ी में निकाली गई जिसे सीता का जन्मस्थान भी माना जाता है. इस यात्रा में जुटी भीड़ देखकर कामेश्वर चौपाल भौचक थे. उन्हें इतने जबरदस्त समर्थन की उम्मीद नहीं थी. जब इस तरह की यात्राएं तेज हुईं तो 1986 में राजीव गांधी सरकार ने अयोध्या में विवादित ढांचे के ताले खुलवा दिए.

बड़ा संदेश देना था मकसद
अगले दो सालों में संघ ने इसे लेकर बड़े स्तर पर तैयारियां कीं. नवंबर 1989 में शिलान्यास का कार्यक्रम रखा गया. कामेश्वर चौपाल भी तब अयोध्या में ही मौजूद थे. वो एक टेंट में रह रहे थे. उनके कमरे में अशोक सिंहल के एक बेहद नजदीकी व्यक्ति आए और उन्होंने बताया कि आपको शिलान्यास के लिए चुना गया. यानी भगवान राम के मंदिर निर्माण की पहली ईंट आप रखेंगे. जब कामेश्वर शिलान्यास की जगह पर पहुंचे तो उन्होंने पाया कि सभी बड़े नेता मौजूद थे. दरअसल कामेश्वर के जरिए संघ के नेता 1981 में हुए दलितों के सामूहिक धर्म परिवर्तन को लेकर एक बड़ा संदेश देना चाहते थे.

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राजनीतिक शुरुआत
पार्टी के आदेश पर कामेश्वर ने 1991 में राम विलास पासवान के खिलाफ चुनाव लड़ा था. लेकिन वो चुनाव हार गए. साल 2002 में वो बिहार विधान परिषद के सदस्य बने. 2014 में भी वो पार्टी के टिकट पर संसदीय चुनाव में रंजीता रंजन के खिलाफ चुनावी मैदान में खड़े हुए थे. लेकिन उन्हें वैसी कामयाबी नहीं हासिल हुई.

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First published: February 5, 2020, 5:06 PM IST
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