कौन है इंटरनेशनल ड्रग्स सरगना किशन सिंह, जो यूके से सीधे पहुंचा तिहाड़

ड्रग्स किंगपिन किशन सिंह का प्रत्यर्पण पुलिस के लिए बड़ी जीत मानी जा रही है.

ड्रग्स किंगपिन किशन सिंह का प्रत्यर्पण पुलिस के लिए बड़ी जीत मानी जा रही है.

आम बात थी कि एक नौजवान के मन में जल्दी अमीर बनने की हसरत थी. इत्तेफाक था कि उसे मौका मिला, हौसला था कि उसने डरे बगैर अपराध का रास्ता चुना. और हुनर ऐसा था कि कुछ ही दिनों में वह सरगना बन गया.

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  • Last Updated: March 24, 2021, 11:35 AM IST
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कागज़ों के हिसाब से ब्रिटेन का नागरिक (British Citizen) है लेकिन अस्ल में ड्रग्स के अंडरवर्ल्ड में इंटरनेशनल लेवल के खिलाड़ी किशन सिंह का यूनाइटेड किंगडम से प्रत्यर्पण (Extradition) बीते सोमवार को हुआ, तो इसे भारत के लिए बड़ी कामयाबी समझा गया. साल 2018 में सिंह को यूके में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन कानूनी जंग (Legal Fight) लड़ रहे सिंह को भारत के सुपुर्द किए जाने में करीब तीन साल लग गए. अब भारत में कानूनी तौर पर सिंह के खिलाफ ट्रायल चलेगा और जब तक ट्रायल शुरू नहीं होता, उसे तिहाड़ जेल (Tihar Jail) में रखा जाएगा.

यूके ​में गिरफ्तार किए जाने के बाद सिंह को वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले के इंतज़ार के दौरान बेल मिल गई थी. मई 2019 में यूके के कोर्ट ने सिंह को भारत के सुपुर्द किए जाने का रास्ता साफ कर दिया था. आखिर यह किशन सिंह है कौन और क्यों भारत को इसके लिए इतनी कवायद करना पड़ी?

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कैसे ड्रग्स कारोबार में घुसा सिंह?
राजस्थान के नागौर ज़िले के एक गांव रेवंत में पैदा हुआ 39 साल का किशन सिंह को दौलत और कामयाबी का चस्का था. अपनी किस्मत संवारने के लिए वो 2009 में किसी तरह लंदन चला गया था. फिर उसने एक मैनुफैक्चरिंग आउटफिट खोला. 2013 में भारत लौटकर सिंह ने शादी की और फिर लंदन लौट गया.

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ब्रिटिश कोर्ट की मंज़ूरी के बाद किशन सिंह के प्रत्यर्पण में करीब तीन साल लग गए.


2015 में उसे यूके की नागरिकता मिल गई और बताया जाता है कि इसके बाद वह ड्रग्स के धंधे में घुसा. कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो 2016 में सिंह का संपर्क ड्रग्स के स्मगलरों के साथ हुआ और बहुत जल्दी वह एम्फेटामाइन, मेफेड्रॉन यानी मियाउ मियाउ और मी​थेक्वालोन जैसी ड्रग्स की डीलिंग में आगे निकल गया.



कैसे ​रडार में आया सिंह?

2017 की बात है, जब नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर दो लोगों को 25 किलोग्राम ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया गया था, जो ज़िप पाउचों में बंद थी. ये दोनों मुंबई से कन्साइनमेंट लेकर दिल्ली तक लेकर आते थे और यहां से आगे भेजते थे. हालांकि इन आरोपियों को ये भनक नहीं थी कि उनके खिलाफ यूके से एक चाल चली जा रही थी.

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अस्ल में, यूके के गृह विभाग के आदेश पर किशन सिंह के फोन कॉल ट्रैस किए जा रहे थे, जिससे पता चल चुका था कि वो अन्य तीन लोगों के साथ मिलकर ड्रग्स के कन्साइनमेंट की डीलिंग कर रहा था. इसके आधार पर, भारत में सिंह के तीनों साथियों को कस्टडी में लिया गया.

हरप्रीत सिंह, अमनदीप सिंह और हरनीश सरपाल पकड़े गए थे. इनमें से हरप्रीत कॉमनवेल्थ यूथ गेम्स में खेल चुका पूर्व भारतीय एथलीट था. इन तीनों ने पुलिस के सामने खुलासा किया कि ये किशन सिंह के लिए काम कर रहे थे. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के डीसीपी संजीव यादव के मुताबिक इस ड्रग्स को कोरियर एजेंटों के ज़रिये लंदन भेजा जाता था और इस पूरे नेटवर्क में हर गैंग सदस्य को रोल बखूबी तय किया गया था.

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कैसे गिरफ्तार हुआ सिंह?

फरवरी 2017 से दिल्ली पुलिस की रडार में आ चुका सिंह इन तीनों के ज़रिये भारत में कई शहरों के बीच बड़ी मात्रा में ड्रग्स पेडलिंग करते हुए यूएई, यूके, अमेरिका, मलेशिया और मध्य पूर्व के देशों तक कारोबार कर रहा था. यकीनन सिंह अगर पुलिस के हत्थे चढ़ता तो एक बहुत बड़े नेक्सस का भंडाफोड़ होना तय था.

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स्पेशल सेल यूके से सिंह के प्रत्यर्पण के लिए सारी कोशिशें कीं यानी इंटरपोल से लेकर यूके के संबंधित अधिकारियों तक संपर्क किया गया. अंजाम यह हुआ कि लंदन में सिंह की गिरफ्तारी हुई और उसके प्रत्यर्पण के लिए 2018 से कार्रवाई शुरू हुई. लेकिन सुनवाई के दौरान जब सिंह को बेल मिल गई तो कुछ समय के लिए लगा कि सिंह भारत के ​हाथ से फिसल जाएगा.

लेकिन उसके खिलाफ पुख्ता सबूत पेश करने की मेहनत रंग लागई और यूके की कोर्ट ने प्रत्यर्पण पर मुहर लगा दी. इसके बाद सिंह ने लंदन हाई कोर्ट और मानवाधिकार यूरोपीय कोर्ट तक खुद को बचाने की जंग लड़ी लेकिन नाकाम रहा. भारत के सुपुर्द कर दिए गए सिंह को प्रत्यर्पण शर्तों के अनुसार ट्रायल शुरू होने तक तिहाड़ जेल में कस्टडी में रखा जाएगा.
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