कौन हैं निकिता जैकब और शांतनु, जो दिशा रवि के साथ टूलकिट केस में आरोपी हैं

बाएं से शांतनु मुलुक, दिशा रवि और निकिता जैकब.

बाएं से शांतनु मुलुक, दिशा रवि और निकिता जैकब.

शांतनु मुलुक को अग्रिम ज़मानत (Transit Anticipatory Bail) मिली है, वहीं अंडरग्राउंड होने के दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के आरोप झेल रही निकिता की अर्ज़ी पर आज हाईकोर्ट फैसला देगा. किसान आंदोलन (Farmers Protests) से जुड़े केस में दो एक्टिविस्टों को जानें, जिन पर 'देशद्रोह' के आरोप हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 17, 2021, 9:25 AM IST
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क्लाइमेट एक्टिविस्ट (Climate Activist) दिशा रवि की गिरफ्तारी के बीच टूलकिट मामले में दो और नाम (Accused in Toolkit Case) खबरों में आए हैं, एक है बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) की वकील निकिता जैकब का और दूसरा नाम पर्यावरण एक्टिविस्ट (Environmental Activist) शांतनु मुलुक का है. खबरों में कहा गया कि स्वीडन की एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग (Greta Thunberg) द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर की गई टूलकिट के बारे में चल रही जांच के सिलसिले में आरोपी निकिता के खिलाफ गैर ज़मानती वॉरंट जारी किया गया. वहीं, शांतनु का ताल्लुक महाराष्ट्र (Maharashtra) के बीड से है. टूलकिट केस में आरोपों के घेरे में आए इन दोनों नामों के बारे में जानिए.

न्यूज़18 ने आपको हाल में दिशा रवि और टूलकिट मामले के बारे में विस्तार से बताया था. अब इसी केस में सुर्खियों में आ रहीं पेशे से वकील 30 वर्षीय निकिता के बारे में दावे किए गए हैं कि वो एक एनजीओ के ज़रिये पर्यावरण एक्टिविज़्म से जुड़ी रही हैं, लेकिन किसी राजनीतिक पार्टी से उनका कोई संबंध अब तक साबित नहीं किया जा सका है.

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कौन हैं निकिता जैकब?
महाराष्ट्र के पुणे स्थित आईएलएस लॉ कॉलेज से ग्रैजुएशन करने वाली निकिता केवल सिविल केसों में वकालत करती हैं. वरिष्ठ एडवोकेट गिरीश गोडबोले के चेम्बर में काम करने वाली निकिता का नाम टूलकिट केस में सामने आया तो गोडबोले ने हैरानी जताते हुए कहा कि 'उन्हें नहीं पता कि 3 सालों से उनकी जूनियर के तौर पर काम रही निकिता के खिलाफ एक दिन क्रिमिनल केस का मौका आएगा'. गोडबोले ने यह भी कहा कि निकिता अपना काम बखूबी करती रही हैं.

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महाराष्ट्र बेस्ड वकील निकिता जैकब.


सिर्फ गोडबोले ही नहीं, बल्कि आईएलएस लॉ कॉलेज में निकिता के क्लासमेट रहे पूर्व स्टूडेंट्स भी इस बात से वाकिफ नहीं दिखे कि वो पर्यावरण एक्टिविस्ट हैं. खबरें यह भी कह रही हैं कि एक सीनियर एडवोकेट ने खुलासा किया कि निकिता हाल में मदद के लिए उनके सामने रोई और गिड़गिड़ाई थीं.



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दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर निकिता की प्रोफाइल से पता चलता है कि वकालत में उन्हें 7 साल का अनुभव है और वह बॉम्बे हाईकोर्ट में बतौर वकील जुड़ी हैं. जबसे उनका नाम सामने आया है, ये भी दावे किए गए कि निकिता का संबंध राजनीतिक पार्टी के साथ रहा है.

क्या आप से है निकिता का संबंध?

इन दावों को खारिज करते हुए आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रीति शर्मा मेनन ने साफ कहा कि वो निकिता को नहीं जानतीं. आप के ही नेता राघव चड्ढा ने भी निकिता के पार्टी सदस्य होने की बात से इनकार किया. अब तक आप या किसी राजनीतिक पार्टी के साथ निकिता के संबंधों के दावों की पुष्टि नहीं हुई है.

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निकिता के खिलाफ पुलिस का एक्शन?

टूलकिट केस में नाम आते ही दिल्ली की साइबर पुलिस ने निकिता के सोशल मीडिया प्रोफाइल ब्लॉक कर दीं. खबरों की मानें तो निकिता अपने दोस्तों और परिवार से इस तरह की शिकायतें कर रही थीं कि उनके सोशल मीडिया अकाउंटों को ट्रोल्स के ज़रिये मिसयूज़ किया गया था.

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किसान आंदोलन में खालिस्तान कनेक्शन की जांच की जा रही है.


कौन हैं शांतनु मुलुक?

महाराष्ट्र के बीड निवासी शांतनु को भी 'प्रो खालिस्तानी संगठन' से जुड़े होने के टूलकिट मामले में आरोप बनाया गया है. शांतनु अस्ल में, 31 वर्षीय शांतनु एयरोस्पेस इंजीनियरिंग का जॉब छोड़कर विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्रों में पर्यावरण के हित में काम करने के लिए करीब छह महीने पहले एक्टिविस्ट बने थे. शांतनु के बारे में भी तकरीबन उसी तरह के दावे हैं, जैसे निकिता को लेकर हुए.

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खबरों के मुताबिक पर्यावरण के लिए काम करने को लेकर शांतनु कई समूहों और पर्यावरण से जुड़े संगठनों का हिस्सा बने. दिल्ली पुलिस का आरोप है कि निकिता जैकब के साथ शांतुन मुलुक ने ही वो गूगल डॉक्यूमेंट बनाया, जिसे बाद में स्वीडिश एक्टिविस्ट ग्रेटा ने​ ट्विटर पर शेयर किया. इसी केस में दिशा रवि को बेंगलूरु से गिरफ्तार कर उन पर राजद्रोह का केस दर्ज किया गया.

क्या कहते हैं शांतनु के परिजन व दोस्त?

मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीई करने वाले शांतनु ने बाद में अमेरिका की वर्जीनिया यूनिवर्सिटी से भी पढ़ाई की. शांतनु के बीड निवासी परिवार का कहना है कि करीब एक हफ्ते पहले जब शांतनु दिल्ली में थे, तब उनसे आखिरी बार बात हुई थी. यह भी कहा गया कि शांतनु औरंगाबाद में काम कर रहे थे और पुणे में किसी नए प्रोजेक्ट से जुड़ने वाले थे.

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दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस के हवाले से कहा गया कि 20 से 27 जनवरी के बीच शांतनु किसान आंदोलन में टिकरी में शामिल थे. हालांकि शांतनु के दोस्त बताते हैं कि वो एक शर्मीले और आत्मसम्मान वाले व्यक्ति हैं, जिन्हें साई फाई फिल्में, पढ़ना और घूमना अच्छा लगता है. शांतनु ने पर्यावरण एक्टिविस्ट के तौर पर एक्सटिंक्शन रेबेलियन यानी XR India नाम की संस्था बनाई है.

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बॉम्बे हाई कोर्ट बिल्डिंग.


क्या शिवसेना से है संबंध?

जैसे निकिता के आप से जुड़े होने के दावे सामने आए, वैसे ही शांतनु के शिवसेना के साथ. बताया जा रहा है कि शांतनु के कज़िन सचिन मुलुक का रिश्ता पिछले चार सालों से शिव सेना ज़िला परिषद के साथ रहा है, लेकिन शांतनु का कोई जुड़ाव साबित नहीं हुआ है. सचिन ने कहा कि शांतनु किसी तरह भी शिवसेना के साथ नहीं जुड़े और न ही कभी किसी पार्टी गतिविधि में शामिल रहे. इसी तरह की बातें बीड के अन्य शिवसैनिक भी कहते हैं.

किसे मिली बेल, किसे नहीं?

ताज़ा खबरें कह रही हैं कि बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने शांतनु के आवेदन पर 10 दिनों की ट्रांज़िट एंटीसिपेटरी बेल दे दी है. निकिता की तरह शांतनु ने भी बीते सोमवार को ही अग्रिम ज़मानत के लिए अर्ज़ी दाखिल की थी. निकिता के आवेदन पर बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट की प्रिंसिपल बेंच में सुनवाई होना है.
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