कौन हैं प्रताप भानु मेहता, अशोका यूनिवर्सिटी से जिनका इस्तीफा भूचाल ला रहा है?

प्रोफेसर प्रताप भानु मेहता जाने-माने शिक्षाविद और स्तंभकार हैं

प्रोफेसर प्रताप भानु मेहता जाने-माने शिक्षाविद और स्तंभकार हैं

प्रोफेसर प्रताप भानु मेहता (Pratap Bhanu Mehta) ने हाल ही में अशोका यूनिवर्सिटी (Ashoka University) में प्रोफेसर पद से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद से दुनियाभर के शिक्षाजगत में इसे लेकर भूचाल आया हुआ है. देशी-विदेशी शैक्षणिक संस्थाएं इस्तीफा वापसी की गुहार लगा रही हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 23, 2021, 7:33 PM IST
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जाने-माने शिक्षाविद और राजनैतिक स्तंभकार प्रोफेसर प्रताप भानु मेहता ने अशोका यूनिवर्सिटी (Ashoka University) में प्रोफेसर पद से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद से यूनिवर्सिटी तो चर्चाओं में है ही, प्रोफेसर मेहता के बारे में भी लोग खूब जिज्ञासु हैं कि आखिर वे कौन हैं, जिनके इस्तीफे पर हार्वर्ड से लेकर येल यूनिवर्सिटी और एमआईटी तक के शिक्षाविद और समाजशास्त्री इकट्ठे आ गए.

प्रोफेसर मेहता के बारे में जानने से पहले एक नजर मौजूदा विवाद पर डालते हैं. दअसल वे एक चर्चित स्तंभकार यानी कॉलम लेखक भी हैं, जो अंग्रेजी अखबारों में सामाजिक और राजनैतिक मामलों पर अपनी राय देते हैं. इसी कड़ी में वे कई बार मौजूदा राजनैतिक हालातों पर बात करते हुए इसे अभिव्यक्ति की आजादी के लिए मुश्किल समय कह चुके थे. हालांकि इससे उनके इस्तीफे का कितना संबंध है, ये स्पष्ट नहीं लेकिन इस्तीफा देते हुए पत्र में उन्होंने इस बात का हल्का जिक्र किया.

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इस्तीफे की वजह बताते हुए प्रोफेसर मेहता ने लिखा था कि मेरा संस्थान से जुड़ा रहना पॉलिटिकल लायबिलिटी समझा जा सकता है. इन हालातों में मेरा संवैधानिक मुद्दों पर लिखना-बोलना यूनिवर्सिटी के भी खिलाफ जा सकता है. यही कारण देते हुए उन्होंने इस्तीफा दे दिया. इसके बाद से ही बवाल मचा हुआ है, जो शिक्षा जगत से होते हुए राजनीति जगत तक भी पहुंच रहा है.

Ashoka university
अशोका यूनिवर्सिटी साल 2014 में बना संस्थान है (Photo- Ashoka university website)


तो सवाल लौटता है कि आखिर प्रताप भानु मेहता कौन हैं. उनका जन्म साल 1967 में जोधपुर के एक राजस्थानी जैन परिवार में हुआ था. शिमला और जयपुर के शानदार स्कूलों में शुरुआती पढ़ाई के बाद आर्ट्स में उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया, जिसके बाद अमेरिका की प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट किया.



करियर की बात करें तो प्रोफेसर मेहता लगातार शिक्षा से ही जुड़े रहे. उन्होंने देश-दुनिया के नामी-गिरामी संस्थानों में पढ़ाया. न्यूयॉर्क स्कूल ऑफ लॉ में वे एक प्रोफेसर रहे. इसके अलावा उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में भी विजिटिंग प्रोफेसर बतौर काम किया. भारत लौटने पर थोड़े समय के लिए प्रोफेसर मेहता ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में भी लॉ एंड गवर्नेंस के प्रोफेसर बतौर सेवाएं दीं. वह सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के अध्यक्ष भी रह चुके हैं.

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ढेर सारे खिताबों और बेहतरीन संस्थानों में काम करते हुए प्रोफेसर मेहता लगातार देश-दुनिया की राजनीति पर लिखते रहे. वे भारतीय अंग्रेजी अखबारों में भी लगातार राजनैतिक संदर्भों पर अपनी राय देते रहे हैं. इसके अलावा वे अमेरिकन पॉलिटिकल साइंस रिव्यू, जर्नल ऑफ डेमोक्रेसी जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में भी छपते रहे हैं.

pratap bhanu mehta
साल 2017 में प्रोफेसर ने कुलपति के रूप में अशोका यूनिवर्सिटी जॉइन की थी (Photo- news18 English)


साल 2017 में प्रोफेसर ने कुलपति के रूप में अशोका यूनिवर्सिटी जॉइन की थी. दो ही साल बाद उन्होंने कुलपति का पद छोड़ दिया लेकिन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर के तौर पर बने रहे और बच्चों को पढ़ाते रहे. अब 18 मार्च को खबर आती है कि उन्होंने यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पद से भी इस्तीफा दे दिया है.

इस्तीफा देते हुए कारणों में उन्होंने लिखा कि संवैधानिक मूल्यों के लिए मेरा सार्वजनिक लेखन हो सकता है कि यूनिवर्सिटी के लिए खतरा बन जाए. ऐसे में मैं यूनिवर्सिटी के हित में इस्तीफा दे रहा हूं. प्रोफेसर मेहता के पद से हटने के दो ही दिनों बाद प्रोफेसर अरविंद सुब्रमण्यम ने भी इस्तीफा दे दिया. उन्होंने प्रोफेसर मेहता के इस्तीफे के विरोध में और राजनीति पर भी कई सवाल उठाते हुए पद छोड़ा. इसके बाद से तमाम चर्चाएं हो रही हैं कि आखिर क्या सही और क्या गलत.

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वैसे प्रोफेसर मेहता पहले भी विवादों में आ चुके हैं. साल 2006 में उन्होंने नेशनल नॉलेज कमीशन से इस्तीफा दे दिया था क्योंकि वे यूपीए (UPA) सरकार की उच्च शिक्षा नीतियों के खिलाफ थे. साल 2015 में दिल्ली पुलिस ने प्रोफेसर के खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज किया. उनपर आरोप था कि वे और सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च संस्था एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया में किसी की भर्ती के स्कैम में लिप्त थे.
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