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राजीव गांधी हत्या का वो दोषी जो रिहा हो रहा है, जेल में पढ़ाई कर जीता था गोल्ड मेडल

राजीव गांधी के हत्यारों में एक एजी पेरारिवलन की अब रिहाई हो रही है.

राजीव गांधी के हत्यारों में एक एजी पेरारिवलन की अब रिहाई हो रही है.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राजीव गांधी हत्याकांड में दोषी पाए गए पेरारिवलन को रिहा किया जा रहा है. वो पिछले 31 सालों से जेल में बंद है. जब उसे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में जनसभा के दौरान हत्या के बाद गिरफ्तार किया गया, तब वो केवल 19 साल का था. वो इतने सालों से कोर्ट से यही कहता रहा कि उसे इस हत्याकांड के साजिश की कोई जानकारी नहीं थी.

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    31 सालों से जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों में एक एजी पेरारिवलन अब जेल से बाहर होगा. वह लगातार इसी बात को लेकर अपनी कानून लड़ाई लड़ता रहा है कि इस हत्या की साजिश की उसे जरा भी भनक नहीं थी. अब सुप्रीम कोर्ट से उसे राहत मिल गई है.

    राजीव गांधी के हत्यारों में एक एजी पेरारिवलन को तब गिरफ्तार किया गया था, जब वह केवल 19 साल का था. 11 जून 1991 में उसके घर से उसकी गिरफ्तारी हुई. उस पर आरोप लगा कि वो पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या में शामिल था. बाद में कोर्ट ने भी उसे दोषी पाया. उसे आजीवन कारावास की सजा हो गई.

    दरअसल पेरेंबुदूर की जिस जनसभा में राजीव गांधी की हत्या की गई, उसमें जिस बैटरी का इस्तेमाल हुआ था, उसका इंतजाम पेरारिवलन ने किया था.  वो एक प्रतिभाशाली इंजीनियरिंग छात्र था. गिरफ्तारी के बाद जेल में ही उसने पढ़ाई की. इसमें एक परीक्षा में वो गोल्ड मेडलिस्ट भी रहा.

    पेरारिवलन इस समय 50 साल का होने वाला है. उसका अदालत द्वारा दोषी ठहरा दिये जाने के बाद से लगातार कानून लड़ाई लड़ी कि वो बेगुनाह है, वह राजीव गांधी की हत्या के बारे में कुछ नहीं जानता था. उसे तो केवल एक बैटरी का इंतजाम करने को कहा गया था. लिहाजा उसने वही किया था.

    मामूली बैकग्राउंड से ताल्लुक 
    पेरारिवलन को लोग अरिवु के नाम से भी जानते हैं. तमिलनाडु में उसका नाम अब घर – घर में जाना जाने लगा है. दरअसल उसके पेरेंट्स ने उसके निर्दोष होने की लंबी अदालती लड़ाई लड़ी. हालांकि राजीव गांधी के सारे हत्यारों को पहले मौत की सजा सुनाई गई थी, जो फिर आजीवन कारावास में बदल गई.

    अरिवू के पिता एक स्कूल में टीचर थे. वो एक छोटे कस्बे जोलारपेट का रहना वाला था. जब सीबीआई ने उसे गिरफ्तार किया तो ये उसके परिवार के लिए बहुत बड़ा झटका था.

    पेरारिवलन को जब सीबीआई ने गिरफ्तार किया, तब उसकी उम्र 19 साल थी

    जेल में ही एमसीए किया 
    जेल में आने के बाद उसने 12वीं क्लास का एग्जाम दिया, जिसमें वो 91.33 फीसदी नंबर लेकर पास हुआ. अब तक जेल में जिन लोगों ने ये एग्जाम दिया है, उसमें वो टापर है. इसके बाद उसने तमिलनाडु ओपन यूनिवर्सिटी के एक डिप्लोमा कोर्स में गोल्ड मेडल हासिल किया.

    इसके बाद भी उसकी पढ़ाई रुकी नहीं बल्कि उसने इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी से पहले बैचलर इन कम्प्युटर अप्लीकेशन (बीसीए) किया और फिर एमसीए.

    जेल में म्युजिक बैंड भी चलाता है
    जेल में रहकर वो अपने जेल के साथियों के साथ एक म्युजिक बैंड चलाता है. मीडिया में उसके बारे में जो रिपोर्ट छपती रहती हैं, उसके अनुसार वो खुशमिजाज रहने वाला शख्स है. उसे लिखने और पश्चिमी संगीत का बहुत शौक है.

    रिपोर्टों के मुताबिक वह वेल्लौर जेल के एक स्कूल में बतौर अध्यापक पढ़ाता भी रहा है. बाकी कैदियों को पढ़ने के लिए उत्साहित करता रहता था.

    उसने खरीदी थी बैटरी जो विस्फोट में काम आई
    पेरारिवलन के पेरेंट्स पेरियार के अनुयायी हैं. उस पर अदालत में जो आऱोप साबित हुआ, वो ये था कि उसने वो 09 वोल्ट की बैटरी खरीदी थी, जिसके जरिए राजीव गांधी की पेराम्बदूर की रैली में धमाका किया गया. सीबीआई का दावा है कि वो राजीव गांधी की हत्या करने वाले मास्टरमाइंड लोगों के संपर्क में था. उसके पास उनके एक-दो मैसेज भी आए थे.

    अब सुप्रीम कोर्ट उसकी इस अपील से सहमत हुआ है कि राजीव गांधी हत्याकांड में उसकी भूमिका वैसी नहीं थी. उसे रिहा किया जा सकता है.

    Tags: Murder, Rajiv Gandhi, Supreme Court

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