लाइव टीवी

कांग्रेस और बीजेपी दोनों की पसंद रहे हैं राम मंदिर के ट्रस्टी परासरन

News18Hindi
Updated: February 6, 2020, 5:30 PM IST
कांग्रेस और बीजेपी दोनों की पसंद रहे हैं राम मंदिर के ट्रस्टी परासरन
के परासरन सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील हैं

92 साल के परासरन (K Parasaran) सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के वकील हैं. के परासरन अयोध्या राममंदिर बाबरी मस्जिद विवाद में हिंदू पक्ष की पैरवी कर चुके हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 6, 2020, 5:30 PM IST
  • Share this:
केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) ने राम मंदिर (Ram Mandir) निर्माण के लिए ट्रस्ट की स्थापना कर दी है. श्रीराम तीर्थ क्षेत्र के नाम से ट्रस्ट बनाया गया है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के सीनियर वकील और पूर्व अटार्नी जनरल के परासरन (K Parasaran) को ट्रस्ट का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. के परासरन के आवासीय पते को ही ट्रस्ट का ऑफिशियल रजिस्टर्ड ऑफिस घोषित किया गया है.

सुप्रीम कोर्ट के वकील के परासरन अयोध्या राममंदिर बाबरी मस्जिद विवाद में हिंदू पक्ष की पैरवी कर चुके हैं. इस पूरे मामले से वो इतनी अच्छी तरह वाकिफ हैं कि विवाद की एक-एक बारीकियां हाथ की अंगुलियों पर गिना सकते हैं. राम मंदिर ट्रस्ट का ट्रस्टी बनाए जाने के बाद परासरन को लेकर लोगों में उत्सुकता बढ़ गई है.

92 साल के परासरन सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं. वो दिल्ली के आर-20, ग्रेटर कैलाश पार्ट-1 में रहते हैं. इसी पते को राममंदिर ट्रस्ट के ऑफिस का पता लिखा गया है.

वकील के साथ हिंदू धर्म के विद्वान हैं के परासरन

के परासरन का जन्म तमिलनाडु के श्रीरंगम में 1927 में हुआ था. वो एक धर्मपरायण परिवार से आते हैं. उनके पिता केशव आयंगर भी वकील रह चुके हैं. वो वेदों के ज्ञाता और धार्मिक विद्वान आदमी थे. के परासरन के तीनों बेटे मोहन, सतीश और बालाजी वकील हैं. मोहन परासरन यूपीए-2 की सरकार में सॉलिसीटर जनरल रह चुके हैं. चार पीढ़ियों से ये परिवार वकालत के पेशे में है.

के परासरन ने 1958 में सुप्रीम कोर्ट से अपनी वकालत की प्रैक्टिस शुरू की थी. इमरजेंसी के दौरान वो तमिलनाडु के एडवोकेट जनरल थे. 1980 में वो भारत के सॉलिसीटर जनरल नियुक्त हुए. 1983 से लेकर 1989 तक वो अटॉर्नी जनरल के पद पर रहे.

के. परासरन कोwho is ram mandir first trustee k parasaran who has been choice of both bjp and congress राम मंदिर ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया गया है
के. परासरन को राम मंदिर ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया गया है
सबरीमाला मंदिर मामले में परासरन ने की थी पैरवी
सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर दायर याचिका में भी उन्होंने पैरवी की थी. के परासरन ने सबरीमाला मंदिर विवाद में नायर सर्विस सोसायटी की तरफ से मामले की पैरवी की थी. इस पक्ष ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के बैन किए जाने को सही ठहराया था.

सबरीमाला मंदिर मामले में उन्होंने कोर्ट के गलत सवाल पूछने को लेकर बहस की थी. उनका कहना था कि प्रार्थना करने के अधिकार को लेकर कोर्ट गलत सवाल पूछ रही है. उन्होंने अपना तर्क देते हुए कहा था, 'अगर कोई इंसान पूछे कि क्या मैं प्रार्थना करते हुए सिगरेट पी सकता हूं तो उसे थप्पड़ पड़ना चाहिए. लेकिन अगर कोई इंसान ये पूछे कि क्या मैं सिगरेट पीते हुए प्रार्थना कर सकता हूं तो उसे वाहवाही मिलनी चाहिए.' हालांकि सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की बेंच ने के परासरन के पक्ष के खिलाफ फैसला दिया और सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को अनुमति प्रदान की.

इंडियन बार के पितामह माने जाते हैं परासरन
के परासरन अपनी जिरह की खूबी के लिए इतने मशहूर हैं कि इन्हें इंडियन बार का पितामह कहा जाता है. खासकर हिंदू धर्म की मान्यताओं और परंपराओं से वो बखूबी वाकिफ हैं. हिंदू धर्म की व्याख्या करने वाले मामलों में उन्होंने खुलकर हिंदुत्व और उसकी अवधारणा के पक्षों को सामने रखा है. उनकी इसी खासियत से प्रभावित होकर सुप्रीम कोर्ट के जज और मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय किशन कौल ने कहा था कि बिना अपने धर्म के साथ समझौता किए परासरन वकालत जैसे पेशे में बेहतरीन उदाहरण पेश कर रहे हैं. उन्हें इंडियन बार का पितामह कहा जाना चाहिए.

1970 के बाद परासरन ने हर सरकार और प्रशासन में काम किया है. हालांकि जिस भी राजनीतिक विचारधारा से उन्हें परहेज रहा उसकी मुखालफत करने में उन्होंने देरी नहीं की. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक एक बार के परासरन ने राजनीति से प्रेरित इंदिरा सरकार के एक आदेश को मानने से इनकार कर दिया था.

who is ram mandir first trustee k parasaran who has been choice of both bjp and congress
अयोध्या मामले में हिंदुओं का पक्ष रखने वाले वकील के परासरन (बीच में) अपनी टीम के साथ


जब परासरन ने इंदिरा सरकार के आदेश को मानने से इनकार कर दिया
सॉलिसीटर जनरल रहते हुए के परासरन ने इंडियन एक्सप्रेस बिल्डिंग को गिराने वाले शो कॉज नोटिस पर सरकार को किसी तरह की कार्रवाई न करने की सलाह दी थी. लेकिन इंदिरा सरकार ने उनकी सलाह मानने से इनकार कर दिया. इस पर सरकार के आदेश के खिलाफ जाकर के परासरन ने मामले की कोर्ट में पैरवी से इनकार कर दिया था. उन्होंने कहा था कि अगर उनके साथ जबरदस्ती की जाती है तो वो इस्तीफा दे देंगे. हालांकि इसके बाद भी वो सॉलिसीटर जनरल बने रहे. उलटे दो महीने बाद उन्हें प्रमोशन देकर भारत का अटॉर्नी जनरल बना दिया गया.

एनडीए और यूपीए दोनों की पसंद रहे परासरन
सरकारें बदलती रहीं लेकिन के परासरन सबकी पसंद बने रहे. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने उन्हें संविधान को रिव्यू करने को लेकर बनी कमिटी का सदस्य बनाया था. वाजपेयी की सरकार ने उन्हें पदमभूषण से सम्मानित किया. इसके बाद जब यूपीए की सरकार आई तो उन्होंने परासरन को पदमविभूषण के सम्मान से नवाजा.

राममंदिर मामले की सुनवाई के दौरान एक बार जब सीनियर वकील राजीव धवन ने रोज होने वाली सुनवाई पर आपत्ति जताई थी तो परासरन ने कहा था कि उनकी आखिरी इच्छा है कि वो मौत से पहले इस केस का निपटारा कर दें. के परासरन केस का निपटारा करने के बाद अब राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष भी बन चुके हैं.

ये भी पढ़ें:-

राममंदिर निर्माण के लिए पहले से जमा है दान में मिली इतनी रकम

कभी राममंदिर आंदोलन के हीरो थे ये दिग्गज नेता, आज नहीं होती चर्चा

केरल से ही क्यों मिल रहे कोरोना वायरस के मरीज, कैसी है बीमारी से लड़ने की तैयारी

चीन ने अगर ये 'गलती' नहीं की होती, तो इतना नहीं फैलता कोरोना वायरस

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नॉलेज से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: February 6, 2020, 4:31 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर