कौन हैं संजय कोठारी, जो बने नए केंद्रीय सर्तकता आयुक्त, ये खास काम है उनके नाम

नए केंद्रीय सतर्कता आयुक्त संजय कोठारी

संजय कोठारी देश के नए केंद्रीय सर्तकता आय़ुक्त बन गए हैं. राष्ट्रपति पद के सचिव रहे कोठारी रिटायर्ड IASअफसर हैं. शनिवार को सुबह उन्होंने नए सीवीसी की शपथ ली. जानते हैं कैसी रही है एक दमदार अफसर के तौर पर उनकी छवि. उन्होंने कौन सा ऐसा काम किया, जिसके लिए उन्हें सबसे ज्यादा याद किया जाता है

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    ठीक एक साल पहले देशभर की निगाह पहली बार संजय कोठारी पर गई थी, जब वो राष्ट्रपति भवन के विशाल प्रांगण में मोदी सरकार 2.0 के शपथग्रहण समारोह में बार-बार मंत्रियों के नाम पुकार रहे थे. जब तक मंत्रियों की शपथ चलती रही वो यही करते रहे. वह आमतौर पर लोप्रोफाइल में रहने वाले आईएएस अधिकारी रहे हैं, जिनकी गिनती देश के काबिल अफसरों में होती रही थी. अब वो देश के नए CVC यानि केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (central vigilance commissioner) बन गए हैं.  उन्होंने यविभाग में रहते हुए एक ऐसा खास काम किया था, जिसके लिए उन्हें याद किया जाता है.

    देश के इस महत्वपूर्ण पद पर आने से पहले वो राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के सचिव थे. वो 1978 बैच के रिटायर्ड आईएएस अफसर हैं. 2016 में रिटायर होने के एक साल बाद वह राष्ट्र्पति के सचिव बने थे.

    हरियाणा कैडर के आईएएस अफसर 
    संजय कोठारी हरियाणा कैडर के आईएएस अफसर थे, जिन्होंने केंद्र और राज्य में कई पोजीशन में काम किया. वो उन अफसरों में रहे हैं, जिन्होंने हरियाणा में काफी तारीफ पाई. हरियाणा के जिस भी इलाके में उनकी नियुक्ति शुरू में एसडीएम या फिर कलेक्टर के रूप में हुई, वहां आमतौर पर अवैध काम बंद हो जाया करते थे. उन्हें कड़क अफसर के रूप में जाना जाता था.

    कार्मिक विभाग के सचिव पद से रिटायर हुए थे
    वो जब आईएएस के कार्यकाल से रिटायर हुए, उस समय वो कार्मिक विभाग में सचिव थे. उन्हें लंबा प्रशासनिक अनुभव है. जिस समय उनकी नियुक्ति हुई, उनकी नियुक्ति संबंधी कमेटी की अगुआई प्रधानमंत्री कर रहे थे, जिन्होंने उनकी नियुक्ति पर मुहर लगाई.

    संजय कोठारी, जिनकी गिनती देश के काबिल अफसरों के रूप में की जाती रही है


    तब उन्होंने मोदी को प्रभावित किया
    कहा जाता है जब 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने और उन्होंने आईएएस अधिकारियों की मीटिंग बुलाई, उसमें संजय कोठारी ने उन्हें प्रभावित किया था. इसके कुछ समय बाद वो डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग के सचिव बनाए गए.

    सेल्फ अटेस्टेशन का सुधार उन्हीं के जरिए हुआ
    संजय के समय में ही डीओपीटी ने गजटेड अधिकारियों द्वारा अटेस्टेशन की प्रक्रिया को खत्म कर सेल्फ अटेस्टेशन को शुरू किया था. जिससे बड़ी संख्या में प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वाले और उसके बाद नियुक्ति पाने वाले प्रतियोगियों ने राहत की सांस ली थी.

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