ISIS दुल्हन शमीमा, जिसे ब्रिटेन, नीदरलैंड और बांग्लादेश ने नागरिकता देने से मना कर दिया

इस्लामिक स्टेट (ISIS) में शामिल होने गई शमीमा बेगम ने वापस ब्रिटेन लौटने के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी (Photo- news18 English via twitter)

इस्लामिक स्टेट (ISIS) में शामिल होने गई शमीमा बेगम ने वापस ब्रिटेन लौटने के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी (Photo- news18 English via twitter)

लगभग 15 साल की उम्र में आतंकी संगठन ISIS से जुड़ने के लिए ब्रिटेन से भागी शमीमा बेगम (Shamima Begum) अब स्टेटलेस (stateless) हैं. तीन देशों के इनकार के बाद फिलहाल शमीमा के पास कोई नागरिकता नहीं.

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  • Last Updated: February 27, 2021, 2:34 PM IST
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पंद्रह साल की उम्र में लंदन से सीरिया भागकर इस्लामिक स्टेट (ISIS) में शामिल होने गई शमीमा बेगम ने वापस ब्रिटेन लौटने के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी. अब सुप्रीम कोर्ट ऑफ ब्रिटेन ने न केवल शमीमा की अर्जी नामंजूर कर दी है, बल्कि भविष्य में वो ब्रिटेन की नागरिकता वापस पाने के लिए कोई केस न कर सके, इसकी व्यवस्था भी कर दी. ब्रिटिश अदालत का कहना है कि शमीमा की वापसी से देश को खतरा हो सकता है.

पहली बार कब नाम पता चला
ISIS दुल्हन का नाम साल 2019 में चर्चा में आया था, जब उसे सीरियाई कैंप में नौ महीने का गर्भवती पाया गया. बच्चे की जन्म से साथ ही निमोनिया से मौत हो गई. शमीमा ने बताया कि पहले भी उसके दो बच्चों की मौत हो चुकी थी. इसके बाद से शमीमा के नाम पर मानवाधिकार संगठन हल्ला करने लगे. संगठनों का कहना था कि शमीमा कच्ची उम्र में गलत लोगों की संगत में आ गई थी, जिसके कारण उसने आतंकियों से जुड़ने जैसा कदम उठाया और अब उसे वापस आम लोगों से जुड़ने का मौका मिलना चाहिए.

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शमीमा न तो ब्रिटिश नागरिकता वापस पा सकेंगी और न ही भविष्य में नागरिकता को लेकर अर्जी डाल सकेंगी (Photo- news18 Gujarati)

ब्रिटिश नागरिकता के लिए मुहिम 


इसके साथ ही शमीमा बेगम को ब्रिटिश नागरिकता लौटाने की मुहिम चल पड़ी. बता दें कि शमीमा साल 2015 में ISIS से जुड़ने के लिए बेथनल ग्रीन से निकल भागी थी. वे साल 2019 में मार्च में सीरिया के शरणार्थी शिविर में दिखीं. बदहाल शमीमा तब एकदम से सबकी संवेदनाओं का केंद्र बन गईं. हालांकि आतंकी संगठन से जुड़ाव और सुरक्षा कारणों की वजह से ब्रिटेन की होम मिनिस्ट्री ने तब तक शमीमा की नागरिकता खत्म कर दी थी.

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कोर्ट ने किया इनकार
शमीमा और मानवाधिकार संगठन के वकील उसकी ब्रिटिश नागरिकता वापस पाने के लिए संघर्ष कर रहे थे. इसी पर हाल में फैसला आया है, जिसके तहत वो न तो ब्रिटिश नागरिकता वापस पा सकेंगी और न ही भविष्य में नागरिकता को लेकर दोबारा अर्जी डाल सकेंगी.

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बांग्लादेश भी नहीं आने देगा 
शमीमा के माता-पिता बांग्लादेश से होने के कारण ये माना जा रहा था कि ब्रिटिश कोर्ट के इनकार करने पर युवती शायद बांग्लादेश लौट सके. हालांकि बांग्लादेश ने भी इस बात से इनकार करते हुए शमीमा के लिए कड़ा रवैया दिखाया. वहां के विदेश मंत्री अब्दुल मोमेन के मुताबिक चूंकि शमीमा आतंकी संगठन से जुड़ी थीं इसलिए बांग्लादेश के उसे अपने यहां बसाने का सवाल ही नहीं आता.

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नीदरलैंड ने भी शमीमा को नागरिकता देने की अपील खारिज कर दी (Photo- news18 Gujarati)


डच सरकार पहले ही कर चुकी इनकार 
इस बीच शमीमा के पति और ISIS के आतंकी यागो रीडजिक ने अपने देश नीदरलैंड से मदद मांगी. डच मूल का ये आतंकी भी ISIS से जुड़ने के लिए सीरिया चला गया था. यहीं शमीमा और यागो में शादी कर ली. अब यागो सीरिया के हिरासत केंद्र में कैद है. नीदरलैंड ने शमीमा को नागरिकता देने की यागो की अपील भी खारिज कर दी.

बगैर किसी राष्ट्रीयता के रहना होगा
ब्रिटेन, नीदरलैंड और बांग्लादेश से निराश शमीमा के पास कुल मिलाकर फिलहाल कोई रास्ता नहीं यानी वे दुनिया में बगैर किसी राष्ट्रीयता के होंगी. अगर आप किसी भी देश के नागरिक न हों तो ये हालात काफी खतरनाक हो सकते हैं. आपके पास वोट करने का अधिकार नहीं होगा. न ही आपके पास किसी किस्म की सुविधा होगी जो एक देश के नागरिक को होती है. स्कूल-कॉलेज में एडमिशन, नौकरी, हेल्थकेयर और प्रॉपर्टी राइट भी नहीं होता है.

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कैसे कोई होता है स्टेटलेस
अगर कोई बच्चा किसी रिफ्यूजी से जन्मता है तो वो स्टेटलेस हो सकता है. कई बार प्रशासनिक कारणों से भी किसी के पास राष्ट्रीयता नहीं होती है. और यहां तक कि बच्चे के जन्म के बाद उनका सही तरीके से रजिस्ट्रेशन न हो तो वे भी स्टेटलेस होते हैं क्योंकि उनके पास कोई प्रमाण नहीं रहता कि उनका कहां जन्म हुआ है. किसी की राष्ट्रीयता तब भी नहीं हो सकती, जब वो किसी दूसरे देश के नागरिक से शादी करके आए, वहां रहे और किसी वजह से वहां की राष्ट्रीयता न ले सके. साथ ही अपनी नागरिकता भी सरेंडर कर चुका हो. ऐसे में शादी टूट जाने पर व्यक्ति किसी देश का नहीं रह जाता है.
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