कौन हैं वो सोनम वांगचुक, चीन को लेकर जिनका वीडियो वायरल हो रहा है. देखें

कौन हैं वो सोनम वांगचुक, चीन को लेकर जिनका वीडियो वायरल हो रहा है. देखें
सोनम वांगचुक

सोनम वांगचुक का एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है. चीन को लेकर उन्होंने इस वीडियो में कुछ बातें कहीं हैं, जिन्हें लोग पसंद कर रहे हैं. कौन हैं वांगचुक, क्यों वो पिछले एक दशक से खासी चर्चाओं में रहते हैं. उनका आमिर खान से क्या रिश्ता है

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सोनम वांगचुक का वीडियो इन दिनों पूरे देश में वायरल हो रहा है, जिसमें वो देशवासियों से चीन के सामान का बहिष्कार करने की अपील कर रहे हैं. ये वांगचुक हैं कौन. अरे इन्हें तो आप शायद बहुत पहले से जानते हैं. ये वही शख्स हैं, जिनका कैरेक्टर बॉलीवुड एक्टर आमिर खान ने करीब एक दशक पहले अपनी फिल्म थ्री इडिएट्स में निभाया था. वो बहुत काबिल शख्स हैं. बहुत से देसी पेटेंट उनके नाम हैं. उनके काम को देखकर लोग हैरान रह जाते हैं.

सोनम वांगचुक एक इंजीनियर हैं. लेकिन लंबे समय से वो लद्दाख क्षेत्र में सामाजिक सुधारक का काम कर रहे हैं. इस स्टोरी के साथ दिए गए वीडियो में जब आप उनकी बात सुनेंगे तो आपको लगेगा कि वाकई ये शख्स कितना कह रहा है.

वो अपनी इस बात को जस्टिफाई करते हैं कि किस तरह चाइनीज सामानों का बहिष्कार करना हमारे लिए उचित है. उनका ये वीडियो इन दिनों बहुत तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. ये वीडियो दो पार्ट में है-इस सीरीज का नाम है चीन को जवाब- इसमें वो तमाम सवालों का जवाब देते हैं, जो चाइनीज सामानों को लेकर आपके दिमाग में हो सकता है.



क्यों चीन के सामान के बॉयकाट की बात कह रहे हैं



आमिर खान ने बॉलीवुड की सुपर हिट फिल्म थ्री इडिएट्स में सोनम वांगचुक की भूमिका निभाई थी. उनका कहना है कि वो चीन के सामानों के बहिष्कार की बात इसलिए नहीं कह रहे हैं कि चीन हमारी जमीन पर कब्जा कर रहा है, इसलिए ये बात बदले की भावना से कही गई है. बल्कि इसलिए कि चीन में तमाम सामान बुरी तरह से बंधुआ मजदूरी के तहत बनवाये जाते हैं.

उनका कहना है कि चीन इस समय आंतरिक समस्याओं से घिरा है. उनकी फैक्ट्रियां बंद हैं. निर्यात ठप हो गया है, लिहाजा मजदूर नाराज है, इसलिए चीन उन समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए सीमा पर कई देशों के साथ तनाव मोल ले रहा है. ये काम वो जानबूझकर कर रहा है. वो साफ कहते हैं कि चीन को केवल एक ही बात से जवाब मिल सकता है, वो है मेड इन चाइना-जिनसे हमें मुंह मोड़ लेना चाहिए.

सोनम बहुत तरीके से बताते हैं कि कैसे हर देशवासी को चीन के खिलाफ इस मुहिम में अपना रोल निभाना चाहिए. अब हम आपको बताते हैं कौन हैं सोनम वांगचुक और क्यों हमें उनकी बातों पर ध्यान देना चाहिए.

कहां से इंजीनियरिंग की
सोनम वांगचुक का जन्म 01 सितंबर 1966 को हुआ था. वो एक लद्दाखी अभियंता, अविष्कारक और शिक्षा सुधारवादी हैं. वो तरह तरह के ऐसे आविष्कार कर चुके हैं, जिससे लोगों की जीवन आसान हो. उन्होंने एनआईटी श्रीनगर से इंजीनियर की पढ़ाई की है.

कैसे अपनी पढ़ाई का खर्च कोचिंग से निकाला
इंजीनियरिंग करने के दौरान पिता से विवाद हुआ. वे मैकेनिकल इंजीनियरिंग करना चाहते थे, पिता चाहते थे सिविल इंजीनियरिंग करें. इस कारण उन्हें घर से निकलना पड़ा. चूंकि साइंस और मैथ्स जानते थे, तो लेह का पहला कोचिंग सेंटर खोला. दो माह में ही चार साल का पढ़ाई का खर्च निकल गया, लेकिन उससे उन्हें शिक्षा सुधार को लेकर काम करने की प्रेरणा मिली.

उनका शिक्षा कैंपस पूरी तरह सौर ऊर्जा से चलता है
वह छात्रों के एक समूह द्वारा 1988 में स्थापित स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (एसईसीओएमएल) के संस्थापक-निदेशक भी हैं.
सोनम को एसईसीएमओएल परिसर को डिजाइन करने के लिए भी जाना जाता है जो पूरी तरह से सौर-ऊर्जा पर चलता है, और खाना पकाने, प्रकाश या तापन (हीटिंग) के लिए जीवाश्म ईंधन का उपयोग नहीं करता.

लेह से 16 किलोमीटर दूर बना सोनम वांगचुक का शित्रा परिसर, जो पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित है


सोनम वांगचुक को सरकारी स्कूल व्यवस्था में सुधार लाने के लिए सरकार, ग्रामीण समुदायों और नागरिक समाज के सहयोग से 1994 में ऑपरेशन न्यू होप शुरु करने का श्रेय भी प्राप्त है.

बर्फ के स्तूप बनाए
वे पीने के पानी और खेती के लिए भी अपने स्टूडेंट्स के साथ अभियान चलाए हुए हैं. लद्दाख में खेती और वृक्षारोपण के लिए वांगचुक ने एक तरीका और निकाला. इसमें स्थानीय लोगों से कहा कि वे बर्फ के स्तूप बनाएं, जो 40 मीटर तक ऊंचे रहें. इस तरह के एक स्तूप से 10 हैक्टेयर जमीन को सिंचित किया जाता है. करीब 1 करोड़ 60 लाख लीटर पानी की व्यवस्था एक स्तूप से होती है. उन्होंने लद्दाख में इस तरह के स्तूप का पायलट बना रखा है. अगले साल करीब 90 ऐसे स्तूप और बनाए जाएंगे. सर्दियों में बनाए स्तूपों की बर्फ जून तक बनी रहेगी.

उनका फाउंडेशन लेह से 18 किमी दूर है, लेकिन फिर भी वे पूरे इलाके में सक्रिय रहते हैं. आठ हजार से ज्यादा पेड़ और बगीचे वे इस रेगिस्तान में लगा चुके हैं.

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First published: June 1, 2020, 1:29 PM IST
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