जानिए उन गुरुमूर्ति को, जिनके चलते शुरू हुआ रिजर्व बैंक का विवाद

गुरुमूर्ति को रघुराम राजन के जाने के बाद आरबीआई में अंशकालिक निदेशक बनाया गया. वे अगले चार सालों तक आरबीआई बोर्ड में अंशकालिक निदेशक रहेंगे.

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Updated: November 1, 2018, 2:06 PM IST
जानिए उन गुरुमूर्ति को, जिनके चलते शुरू हुआ रिजर्व बैंक का विवाद
स्वामिनाथन गुरुमूर्ति (Image: TV Grab/ CNN-News18)
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Updated: November 1, 2018, 2:06 PM IST
स्वामिनाथन गुरुमूर्ति जाने माने चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं. लेकिन उन्होंने एक खोजी पत्रकार और ताकतवर राजनीतिज्ञ के रूप में अपनी पहचान ज्यादा बनाई. आरबीआई में असहजता तब से महसूस की जा रही है जब से सरकार ने केंद्रीय बैंक के बोर्ड में उन्हें स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्त किया है. उन्हें RBI और केंद्र के टकराव में ख़ास वजह माना जा रहा है. ये बात आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य के हालिया भाषण से सामने आई है. जिसके बाद भारत का ये केंद्रीय बैंक विवादों में आ गया.

RBI के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य का भाषण


आचार्य ने अपने भाषण में कहा, 'जो सरकारें केंद्रीय बैंकों की स्वतंत्रता का सम्मान नहीं करती, वहां के बाज़ार तत्काल या बाद में संकट में फंसते हैं. अर्थव्यवस्था सुलगने लगती है. अहम संस्थाओं की भूमिका खोखली हो जाती है.' इसके बाद पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने आग्रह किया कि सरकार और आरबीआई को इसपर बैठकर बात करनी चाहिए.

गुरुमूर्ति और RBI में असहमति किन बातों पर है?

गुरुमूर्ति को लेकर आरबीआई का मानना है कि वो अपनी बातें और सुझाव उन पर थोप रहे हैं. जिससे केंद्रीय बैंक की स्वायत्ता और कामकाज पर असर पड़ रहा है.
-कहा जा रहा है कि गुरुमूर्ति चाहते हैं बैंक सूक्ष्म, लघु और MSME (मिनिस्ट्री ऑफ माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइसिस) को कर्ज दिए जाने की शर्तें आसान करे.
-एमएसएमई को दिए जाने वाला कर्ज बढ़ाए.-कुछ बैंकों को रिजर्व बैंक PCA (प्रॉम्पट करेक्टिव एक्शन) में थोड़ी छूट दे.

रिजर्व बैंक के पूर्णकालिक निदेशकों की राय गुरुमूर्ति से अलग है.

वर्तमान में RBI और गुरुमूर्ति की जगह
केंद्र सरकार में गहरी पैठ रखने वाले गुरुमूर्ति को रघुराम राजन के जाने के बाद आरबीआई में अंशकालिक निदेशक बनाया गया. वे अगले चार सालों तक आरबीआई बोर्ड में अंशकालिक निदेशक रहेंगे. इस भूमिका में वे बैंक की कार्यप्रणाली पर नज़र रखेंगे.

RBI और केंद्र के टकराव में गुरुमूर्ति क्यों हैं ख़ास?
गुरुमूर्ति को RBI बोर्ड में इंडेपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर अगस्त में अपॉइंट किया गया. स्वदेशी जागरण मंच के सह-संयोजक की नियुक्ति केंद्रीय बैंक को पसंद नहीं थी. इनकी नियुक्ति को रिजर्व बैंक के फंक्शन में मोदी सरकार और आरएसएस के अप्रत्यक्ष दखल की तरह देखा जा रहा था. अब वो शक सही साबित हो रहा है. क्योंकि सरकार ने रिजर्व बैंक की ताकत को घटाकर अपने हाथ में लेने के लिए आरबीआई एक्ट के एक ऐसे प्रावधान का इस्तेमाल किया जिसे 1991, 1997, 2008 और 2013 में भी नहीं किया गया.

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रिजर्व बैंक विवाद का ताजा मामला
रिजर्व बैंक और केंद्र सरकार के बीच टकराव कई महीने से है. ताजा मामला पेमेंट रेगुलेशन बोर्ड (PRB) का है.
-RBI का कहना है PRB केंद्रीय बैंक के पास ही रहना चाहिए और इसके मुखिया केंद्रीय बैंक के गवर्नर होने चाहिए.
-सरकार ने इसके लिए इंटर-मिनिस्ट्रीएल कमिटी गठित की थी. कमिटी ने एक स्वतंत्र रेगुलेटर, पेमेंट रेगुलेटर बोर्ड (RRB) के गठन का सुझाव दिया.
-इसके बाद रिजर्व बैंक समिति के सुझाव के खिलाफ अपना असहमति नोट सार्वजनिक किया.

सरकार और आरबीआई में विवाद के मुद्दे
-पेमेंट रेगुलेटर से जुड़े मामले में सरकार नया रेगुलेटर बनाना चाहती है, आरबीआई इसके खिलाफ है.
-इससे पहले ब्याज दर, एनपीए और आईए एंड एफएस संकट पर भी दोनों के बीच मतभेद रहे हैं.
-ब्याज दरों में कटौती पर भी आरीबीआई और सरकार में राय अलग.

कौन सा एक्ट है आरबीआई में सेक्शन 7
इस सेक्शन के तहत सरकार को सलाह देने और निर्देश देने का अधिकार मिलता है. जिसमें सरकार गवर्नर को उन मुद्दों पर काम करने का निर्देश दे सकती है, जो सरकार की नज़र में गंभीर और सार्वजनिक हित के हैं. आरबीआई अधिनियम की धारा 7 का इस्तेमाल आज़ादी के बाद से कभी भारत में नहीं हुआ.



कौन है गुरुमूर्ति
गुरुमूर्ति का नाम आमतौर पर भारत में पहली बार लोगों ने तब जाना, जब वह इंडियन एक्सप्रेस के संस्थापक रामानाथ गोयनका के सलाहकार रहे. हालांकि उस समय गोयनका 72 साल के हुआ करते थे और गुरुमूर्ति महज 27 साल के. बोफोर्स मामले में गुरुमूर्ति ने कई खुलासे किए. अपनी खोजी पत्रकारिता से उन्होंने भारत सरकार की नाक में दम कर दिया. इसी वजह से उन्हें जेल भी जाना पड़ा.

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पत्रकार उन्हें चार्टर्ड अकाउंटेंट मानते हैं
उनका ज्यादातर वक्त पत्रकार और चार्टर्ड अकाउंटेंट के तौर पर बीता है. बावजूद इसके पत्रकार उन्हें चार्टर्ड अकाउंटेंट ज्यादा मानते हैं और चार्टर्ड अकाउंटेंट उन्हें पत्रकार के रूप में देखते हैं. वैसे पिछले कुछ सालों से उनकी छवि स्वदेशी जागरण मंच के कर्ताधर्ता के रूप में विशुद्ध भारतीय चिंतक की रही है.  मीडिया के गलियारों में गुरुमूर्ति आजकल एक सियासी नाम है. आइए जानते गुरुमूर्ति के बारे में

- 2002-04 के बीच उप प्रधान मंत्री रहे लाल कृष्ण आडवाणी से उनके अच्छे ताल्लुकात रहे हैं. मोदी के साथ उनके रिश्ते 1990 में तब बने, जब इन्होंने अमित शाह और मोदी के सलाहकार के तौर पर काम किया.

-वो तमिलनाडु के अरकट जिले में गरीब परिवार में जन्मे. उन्होंने स्कॉलरशिप से कॉमर्स में पढ़ाई की.

- 2016 में नोटबंदी के फ़ैसले के पीछे इनकी अहम भूमिका मानी जाती है.

-गुरुमूर्ति शुरुआत से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं. ये भी एक वजह है कि केंद्र सरकार में उनकी गहरी पैठ है. जिन लोगों ने मोदी को योजना आयोग भंग करके उसकी जगह नीति आयोग बनाने की सलाह दी, गुरुमूर्ति भी उनमें एक हैं.

- वे अपने उस आर्टिकल के लिए भी जाने जाते हैं जिसमें उन्होंने बताया था कि आरबीआई के गवर्नर के रूप में राजन के कार्यकाल को क्यों नहीं बढ़ाया गया.

- इस इत्तेफाक ही कह सकते हैं कि 2011 में अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में गुरुमूर्ति भी शामिल थे.

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- नोटबंदी के के बाद गुरुमूर्ति ने इसका विरोध करने वालों को इस फैसले की अहमियत तफसील से दी थी.

- गुरुमूर्ति ने तमिल मैग़जीन Thuglak के संस्थापक की मौत के बाद उसका संपादन किया.

- इंडिया टुडे मैगजीन ने 2017 के “India’s 50 Most Powerful People” में गुरुमूर्ति को 30वें स्थान पर रखा था.

-गुरुमूर्ति पहले से ही भाजपा और संघ के बीच के कई विवादों को सुलझाते आए हैं. उदाहरण के तौर पर 2013 में हुए बीजेपी के वाकये को देखा जा सकता है. जब 2014 के लोकसभा चुनावों के लिए चुनाव अभियान समिति का प्रमुख नरेंद्र मोदी को नियुक्त किया गया था, जिसके कारण आडवाणी जी और उनका खेमा इससे खफा हो गया था. उस वक्त भी गुरुमूर्ति ने ही पार्टी को संकट से निजात दिलाया था. दोनों खेमों के बीच संवाद स्थापित कराया था.

(Image: TV Grab/ CNN-News18)


दिल्ली हाई कोर्ट के इस नोटिस के लिए भी चर्चा में हैं गुरुमूर्ति
दिल्ली हाई कोर्ट ने 30 अक्टूबर को रिजर्व बैंक के पार्ट टाइम डायरेक्टर और चेन्नई बेस्ड तमिल मैगजीन के एडिटर गुरुमूर्ति की तरफ से एस. मुरलीधर के खिलाफ ट्वीट के लिए कॉन्टेंप्ट नोटिस जारी किया था. गुरुमूर्ति ने ये ट्वीट एक अक्टूबर को किया था.



हाईकोर्ट के जज जस्टिस एस. मुरलीधर के खिलाफ गुरुमूर्ति का ट्वीट
गुरुमूर्ति ने सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा के ट्रांजिट रिमांड के आदेश को निरस्त करने के जस्टिस मुरलीधर के आदेश का जिक्र किया. इस ट्वीट की शिकायत वकील राजशेखर राव ने चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन को पत्र लिखकर की. शिकायत में कहा था, गुरुमूर्ति का ट्वीट हाईकोर्ट जज पर जान-बूझकर किया गया हमला है. जिसके बाद जस्टिस हीमा कोहली और जस्टिस योगेश खन्ना की बेंच ने गुरुमूर्ति को नोटिस जारी किया.

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