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WHO की नई स्टडी, युवाओं को भी है कोरोना वायरस का उतना ही खतरा

News18Hindi
Updated: March 21, 2020, 6:26 PM IST
WHO की नई स्टडी, युवाओं को भी है कोरोना वायरस का उतना ही खतरा
युवा खुद को सुरक्षित मानते हुए घूम-फिर रहे हैं इसलिए ज्यादा असुरक्षित हैं

हाल ही में World Health Organization (WHO) के इस दावे ने हड़कंप मचा दिया है, जो कहता है कि युवाओं को कोरोना वायरस का ज्यादा खतरा है. जानें, क्या है इसकी वजह.

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  • Last Updated: March 21, 2020, 6:26 PM IST
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सोशल डिस्टेंसिंग (social distancing) की चेतावनी के बावजूद चूंकि युवा खुद को सुरक्षित मानते हुए घूम-फिर रहे हैं इसलिए वे ज्यादा असुरक्षित हैं. इससे पहले लगातार कहा जा रहा था कि कोरोना वायरस (coronavirus) का सबसे ज्यादा खतरा 60 से उससे अधिक उम्र के लोगों को है या फिर उन्हें जो पहले से ही किसी बीमारी से जूझ रहे हों.

कोरोना वायरस की वजह से मारे जा रहे लोगों में भी बुजुर्गों या फिर कार्डियोवस्कुलर बीमारियों के मरीज ज्यादा थे. लेकिन हाल ही में WHO का आया बयान इससे कुछ ज्यादा कहता है. इसके डायरेक्टर-जनरल Tedros Adhanom Ghebreyesus कहते हैं कि इस दौरान युवा अपने लिए जो रास्ता चुनेंगे वो किसी को जिंदगी या मौत की तरफ ले जा सकता है. फिलहाल दुनियाभर में Covid-19 नाम से जानी जा रही श्वसन तंत्र की बीमारी से 11 हजार से भी ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, वहीं 2 लाख 80 हजार से ज्यादा लोग कोरोना पॉजिटिव आ चुके हैं. संख्या हर दिन के साथ कई गुना हो रही है.

WHO के मुख्य अधिकारी ने इन आंकड़ों के बारे में चेताते हुए कहा कि युवा बहुत ज्यादा लापरवाह हो रहे हैं क्योंकि वे ये मान चुके हैं ये कोरोना वायरस बुजुर्गों को होने वाली बीमारी है. लगातार दी जा रही हेल्थ वॉर्निंग्स के बावजूद वे सोशल डिस्टेंसिंग को कायम नहीं रख पा रहे. इन्हीं कुछ वजहों से बीमारी चीन से होती हुई अब यूरोप के केंद्र में है और दुनियाभर के लगभग सारे देशों में फैलती जा रही है. यूरोपियन देश इटली में अबतक मौत के सबसे ज्यादा मामले आए हैं जो 4 हजार पार कर चुके हैं. शुक्रवार, 20 मार्च को एक ही रोज में 627 मौतें हुईं. इसे दिसंबर में चीन में हुए आउटब्रेक से लेकर अब तक का डेडलिएस्ट दिन माना जा रहा है.

यूरोपियन देश इटली में अबतक मौत के सबसे ज्यादा मामले आए हैं




यही सब देखते हुए शुक्रवार को WHO के हेडक्वार्टर जिनेवा में एक ऑनलाइन न्यूज कॉन्फ्रेंस हुई. इस दौरान इसके चीफ Tedros Adhanom Ghebreyesus कहते हैं- वैसे तो बड़ी उम्र के लोग इस वायरस का शिकार ज्यादा हैं लेकिन युवा लोग भी इससे बचे हुए नहीं हैं. जवान और पूरी तरह से स्वस्थ लगने वाले लोगों को भी ये वायरस चपेट में ले सकता है और हफ्तों अस्पताल में रख सकता है. हो सकता है कि संक्रमण ज्यादा होने पर मौत भी हो जाए. अगर जवान लोग उतने बीमार नहीं भी हो रहे तो भी वो बीमारी के वाहक का काम कर सकते हैं. ये किसी के लिए जिंदगी और मौत का सवाल हो सकता है.

नए शोध बता रहे हैं कि वायरस किसी भी उम्र के लोगों को गिरफ्त में ले सकता है. हालांकि ये तय हो चुका है कि बीमारी का खतरा बड़ी उम्र के लोगों पर ज्यादा है. इटली में जिनकी मौतें हुईं, उनकी औसत आयु 78.5 साल मानी जा रही है. चीन में मारे गए लोगों में से लगभग 1%ही लोग 50 की उम्र से कम के थे. लेकिन 80 से ज्यादा आयुवर्ग के लोगों के लिए श्वसन तंत्र की ये बीमारी मौत की वजह ही बन रही है. यानी उनके स्वास्थ्य सुधरने के मामले कम दिख रहे हैं.

Reuters की एक रिपोर्ट के अनुसार WHO अब सोशल डिस्टेंसिंग की जगह फिजिकल डिस्टेंसिंग की सलाह दे रहा है. यहां काम करने वाली एक एपिडेमिओलॉजिस्ट Dr Maria Kerkhove कहती हैं कि हम हालांकि चाहते हैं कि लोग दूर रहकर भी सोशल मीडिया या किसी माध्यम से जुड़े रहें क्योंकि शारीरिक सेहत के साथ-साथ इससमें मानसिक सेहत पर भी असर हो सकता है.

लोग दूर रहकर भी सोशल मीडिया या किसी माध्यम से जुड़े रहें


वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (World Health Organization) ने कोरोना वायरस पर रिस्क एसेसमेंट करते हुए ये देखने की कोशिश की थी कि इसका खतरा किन्हें ज्यादा है. शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि बीमारी के शिकार में से में से अधिकतर मरीज बुजुर्ग हैं, जो पहले से ही किसी न किसी किस्म की दिल की बीमारी का भी शिकार हैं, जैसे हाइपरटेंशन. फरवरी के मध्य में चीन में ही लगभग 70 हजार मरीजों को इस स्टडी में शामिल किया गया. इसमें देखा गया कि लगभग 44,700 मरीजों में से 80 प्रतिशत लोगों की उम्र कम से कम 60 साल से ज्यादा थी और इसमें से भी आधे मरीज 70 साल या इससे अधिक उम्र के थे.

स्टडी China CDC Weekly में प्रकाशित हुई. बाद में चीन से बाहर दूसरे देशों में मिलते-जुलते आंकड़े नजर आए. स्टडी में सबसे दिलचस्प तथ्य बच्चों को लेकर सामने आया. इसके अनुसार बच्चों को कोरोना का खतरा बहुत कम है. चीन में हुई प्राथमिक स्टडी में पाया गया कि 10 से 19 साल के बच्चों में केवल 1 प्रतिशत ही संक्रमण से प्रभावित निकले. वहीं 10 से कम उम्र के बच्चों में ये इंफेक्शन 1 प्रतिशत से भी कम दिखा और कोई भी मौत रिपोर्ट नहीं की गई. इस बारे में US National Institute of Health's Fogarty International Centre के एपिडेमियोलॉजिस्ट Cecile Viboud ने कहा कि हम अभी ये समझने की कोशिश में हैं कि 20 साल से कम उम्र के लोगों में वायरस का खतरा कम रहने की क्या वजह हो सकती है.

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First published: March 21, 2020, 6:24 PM IST
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