जानिए, WHO को क्यों कहना पड़ा- ‘हम देशों के नाम पर नहीं रखते वायरस का नाम’

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को यह ट्वीट मीडिया रिपोर्ट्स की वजह से करना पड़ा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को यह ट्वीट मीडिया रिपोर्ट्स की वजह से करना पड़ा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Mistry) और भारतीय मीडिया को टैग कर अपने ट्वीट में साफ किया है कि वह किसी वायरस या उसके वेरिएंट ( Vrius Variant) को किसी देश का नाम नहीं देता है.

  • Share this:

इस समय दुनिया भर कोविड-19 (Covid-19) की दूसरी लहर का तांडव मचा हुआ है. इसमें सबसे ज्यादा चर्चा भारत की हो रही है जहां बहुत ही तेजी से संक्रमण फैल रहा है. इसके साथ ही भारत में फैले उस खास कोरोना वायरस के वेरिएंट की चर्चा भी हो रही है जिसे तबाही का जिम्मेदार माना जा रहा है. इस वेरिएंट को इंडियन वेरिएंट (Indian Vairant) के नाम से पुकारा जा रहा है. हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)  के दस्तावेज का हवाला देते हुए इंडियन वेरिएंट शब्द का उपयोग किया गया था. जिसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपने ट्वीट में साफ किया है कि वह किसी वायरस नाम को किसी देश के नाम पर नहीं रखता है.

क्या कहा WHO ने

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ट्वीट मेंकहा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन किसी वायरस या उसके वेरिएंट का नाम उन देशों के नाम के आधार पर नहीं रखता जहां से वे सबसे पहले आए हैं. इसके संदेश के  बाद डब्ल्यू एचओ ने भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय और भारतीय समाचार एंजेसी के साथ कुछ समाचार समूहों को भी टैग किया है.

स्वाथ्य मंत्रालय का स्पष्टीकरण
इसी ट्वीट को आधार बनाकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी ट्वीट किया है कि ध्यान दें विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नोवल कोरोना वायरस के B.1.617 वेरिएंट को भारतीय (Indian) वेरिएंट नहीं कहा है. उसे विश्व स्वास्थ्य संगंठन ने वेरिएंट ऑफ कंसर्न कहा था.

Health, WHO, Covid-19, Coronavirus, Health Ministry, Indian media, Health, Indian Variant,
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अपने ट्वीट में भारतीय मीडिया को टैग किया है. (Tweet)

32 पेज में कहीं इंडियन वेरिएंट शब्द नहीं



भारतीय मंत्रालय ने इन मीडिया रिपोर्ट्स को बिना किसी आधार पर और अज्ञात बताया है जिन्होंने के B.1.617 म्यूटेंट स्ट्रेन के लिए इंडियन वेरिएंट शब्द का उपयोग किया है. इन मीडिया रिपोर्ट्स में खबर दी गई थी कि विश्व स्वास्थ्य संगंठन ने इस वेरिएंट को ‘वेरिएंट ऑफ ग्लोबल कंसर्न’ कहा था. मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपने 32 पेज के दस्तावेज में भारतीय वेरिएंट शब्द का उपयोग नहीं किया है.

दूसरा डोज समय पर ना लगने पर कब लगवाएं वैक्सीन, जैसे ऐसे सभी सवालों के जवाब

जटिल होते हैं वायरस के नाम

आमतौर पर वायरस और उनके वेरिएंट के नाम जटिल ही होते हैं यहां तक कोरोना वायरस भी सही नाम नहीं है जो वायरस कोविड-19 को पिछले डेढ़ साल से फैला रहा है वह वास्तव में सार्व कोव-2 है जबकि उसकी जगह कोरोना वायरस, नोवल कोरोना वायरस जैसे शब्दों का उपयोग ज्यादा होता है. वास्तव में सार्स कोव-2 केवल कोरोना वायरस का एक प्रकार ही है. और वह भी उस प्रकार का दूसरा संस्करण है.

 Health, WHO, Covid-19, Coronavirus, Health Ministry, Indian media, Health, Indian Variant,
वायरस (Virus) और उसके वेरिएंट का नाम कर आम लोगों के लिए सुविधाजनक नहीं होता. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

वेरिएंट के नाम और देश

ऐसा ही कुछ इसके वेरिएंट के साथ हो रहा है. खबरों में हर बार अलग से बताने के जगह की यह वेरिएंट भारत में सबसे पहले फैला इसे इंडियन वेरिएंट के तौर पर जाने लगा. इसके अलावा  B.1.617 वेरिएंट नाम भी बातचीत में मुश्किल लगता है इसलिए इसे इंडियन वेरिएंट, साउथ अफ्रीका वेरिएंट, ब्राजील वेरिएंट जैसे नाम देने की सहूलियत अपनाई गई.

Covid-19: 5 में से 1 बड़े व्यस्क की मानसिक सेहत खराब कर रही है महामारी- सर्वे

यूं तो सभी मीडिया समूह खास तौर पर जिन्हें विश्व स्वास्थ्य संगठन ने टैग किया था. इससे संबंधित  खबर और डब्ल्यूएचओ की आपत्ति की खबर अपने मंचों पर दे दी है , लेकिन देखना है कि क्या हमें अब देशों के नाम के वेरिएंट देखने को नहीं मिलेंगे या फिर यह सिलसिला जारी रहेगा. बहराल डब्ल्यूएचओ के ट्वीट ने लोगों ने अपने तरह से प्रतिक्रियाएं दी हैं. कुछ ने वायरस को चीनी वायरस कहने के पर डर का इशारा भी किया है.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज