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कौन था करीम लाला, जिससे इंदिरा गांधी के मिलने का दावा कर संजय राउत ने मचा दी है सनसनी

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Updated: January 16, 2020, 10:54 AM IST
कौन था करीम लाला, जिससे इंदिरा गांधी के मिलने का दावा कर संजय राउत ने मचा दी है सनसनी
शिवसेना नेता संजय राउत ने दावा किया है कि इंदिरा गांधी मुंबई के डॉन करीम लाला से मिला करती थीं

करीम लाला (Karim Lala) को मुंबई का पहला डॉन कहा जाता है. कहते हैं कि जिस वक्त दाऊद इब्राहिम (Dawood Ibrahim) पैदा भी नहीं हुआ था, उस वक्त करीम लाला मुंबई (Mumbai) पर राज करता था...

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  • Last Updated: January 16, 2020, 10:54 AM IST
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शिवसेना (Shiv Sena) नेता संजय राउत (Sanjay Raut) ने बुधवार को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) के बारे में एक बयान देकर सनसनी मचा दी. संजय राउत ने कहा कि इंदिरा गांधी मुंबई के डॉन करीम लाला (Karim Lala) से मिलने आया करती थीं. एक वक्त ऐसा था, जब मुंबई पर दाऊद इब्राहिम, छोटा शकील और शरद शेट्टी जैसे गैंगस्टर राज करते थे. इन लोगों ने पूरी मुंबई में अपने-अपने इलाके तय कर रखे थे.

संजय राउत ने कहा, ‘मुंबई के यही गैंगस्टर तय करते थे कि पुलिस कमिश्नर कौन होगा. जब हाजी मस्तान मंत्रालय आता था तो पूरा मंत्रालय उससे मिलने नीचे चला आता था. इंदिरा गांधी साउथ मुंबई में डॉन करीम लाला से मिलने आया करती थींं.’ संजय राउत पत्रकार रह चुके हैं. उन्होंने दावा किया कि पत्रकारिता करने के दौरान वो दाऊद से मिल चुके हैं, उससे बात कर चुके हैं. उनके पास ऐसे कई गैंगस्टर्स के फोटोग्राफ्स हैं, लेकिन इंदिरा गांधी को लेकर किया गया खुलासा हैरान करने वाला है.

कौन था मुंबई का डॉन करीम लाला
करीम लाला को मुंबई का पहला डॉन कहा जाता है. कहते हैं कि जिस वक्त दाऊद इब्राहिम पैदा भी नहीं हुआ था, उस वक्त करीम लाला मुंबई पर राज करता था. 50 के दशक में मुंबई में करीम लाला की तूती बोलती थी. तस्करी के जरिए उसने अथाह दौलत कमाई थी. करीम लाला के बारे में कहा जाता है कि उसने दौलत तो खूब कमाई, लेकिन वक्त पड़ने पर वो गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने के लिए भी मशहूर था. उसने अपनी छवि रॉबिनहुड जैसी बना रखी थी. आमतौर पर हाजी मस्तान को मुंबई का पहला डॉन कहा जाता है. लेकिन, करीम लाला उसके भी पहले मुंबई पर राज करता था. हाजी मस्तान और करीम लाला के बीच अच्छे संबंध थे.

करीम लाला ने बीच सड़क पर दाऊद को दौड़ाकर पीटा था
करीम लाला का रसूख इतना था कि उसने दाऊद इब्राहिम को मुंबई की सड़कों पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा था. मुंबई के अपराध जगत में ये वाकया आज तक याद किया जाता है. कहा जाता है कि फिल्म जंजीर में अभिनेता प्राण का शेर खान वाला किरदार करीम लाला से ही प्रभावित था. करीम लाला को लोग शेर खान भी कहा करते थे. फिल्म में प्राण की वेशभूषा भी करीम लाला की तरह ही रखी गई थी.

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हाजी मस्तान और करीम लाला. 
जहां करीम लाला की छड़ी रख दी गई वो जगह उसकी हो गई
करीम लाला सफेद पठानी सूट पहनता था. 7 फुट लंबे और हट्टे-कट्टे करीम लाला की भारी आवाज सुनकर ही लोगों में खौफ दौड़ जाता था. बाद में उसने अपने साथ एक छड़ी भी रखनी शुरू कर दी थी. कहा जाता है कि मुंबई में करीम लाला का आतंक इतना था कि किसी जमीन या बिल्डिंग पर कब्जे के लिए उसे वहां जाने की जरूरत भी नहीं पड़ती थी. उसके गुर्गे उस जगह जाकर सिर्फ उसकी छड़ी रख देते थे. बस वो जगह करीम लाला की हो जाती थी. करीम लाला ने 50 से लेकर 80 के दशक तक पूरी मुंबई पर राज किया. कहते हैं कि करीम लाला ही वो पहला शख्स था, जिसने मुंबई को डॉन शब्द का मतलब बताया. करीम लाला की पठान गैंग का पूरी मुंबई पर खौफ था.

अफगानिस्तान से आया था करीम लाला
करीम लाला का असली नाम अब्दुल करीम शेर खान था. उसका जन्म 1911 में अफगानिस्तान में हुआ था. वो पश्तून समुदाय से ताल्लुक रखता था. कहा जाता है कि वो इस समुदाय का आखिरी राजा था. 21 साल की उम्र में करीम लाला ने अफगानिस्तान छोड़ दिया. वो पाकिस्तान के पेशावर होते हुए मुंबई आ पहुंचा. शुरुआत में उसने छोटे-मोटे जुए से अपराध जगत में कदम रखा. वो किराए का मकान लेकर अपने घर में जुए का अड्डा चलाने लगा. उसने जुआरियों को उधार पैसे भी देने शुरू कर दिए. इसी के बाद उसका नाम शेर खान से बदलकर करीम लाला हो गया. लोग उसे शेर खान, करीम लाला या सिर्फ लाला के नाम से जानते थे.

कुछ ही समय बाद वो दारू के कारोबार से भी जुड़ गया. जुए और दारू के अड्डे के बाद उसने मुंबई के डॉक यार्ड में तस्करी का काम शुरू किया. उसके काले कारनामों के बारे में पुलिस भी जानती थी. लेकिन, कहते हैं कि करीम लाला में एक बड़ी खूबी थी. वो पुलिस से भी दोस्ती करके रखता था. इसी तरह धीरे-धीरे करीम लाला का काला कारोबार बढ़ता रहा.

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कहा जाता है कि मुंबई की सड़कों पर दाऊद इब्राहिम को करीम लाला ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा था.


जब करीम लाला की गिरफ्त में आई पूरी मुंबई
करीम लाला जुए और शराब के अड्डे से लेकर तस्करी व हफ्ता वसूली में जुट गया. उसका पठान गैंग धीरे-धीरे बढ़ने लगा. वह लड़ाई और दंगों के मामले भी सुलझाने लगा. इस तरह उसका रसूख बढ़ता ही गया. 50 के दशक में करीम लाला ने सोने और हीरे की तस्करी के काम में कदम रखा. उसी दौरान मुंबई में हाजी मस्तान का उदय भी हुआ. हाजी मस्तान समुद्री किनारों पर तस्करी का काम करता था. दोनों ने एकदूसरे से भिड़ने के बजाय दोस्ती का हाथ बढ़ाया. करीम लाला और हाजी मस्तान ने मिलकर पूरी मुंबई पर अपना कब्जा कर लिया.

करीम लाला के नेताओं और बॉलीवुड सितारों से थे अच्छे संबंध
करीम लाला के राजनेताओं और बॉलीवुड सितारों से अच्छे संबंध थे. वो फिल्मी दुनिया के लोगों के लिए अकसर दावतें दिया करता था. ईद के मौक पर करीम लाला के यहां जश्न होता था. इसमें मुंबई की मशहूर शख्सियतें शिरकत करती थीं. कहा जाता है कि एक बार फिल्म स्टार दिलीप कुमार के कहने पर करीम लाला ने अभिनेत्री हेलेन की मदद की थी. हेलेन का एक करीबी उसकी सारी कमाई लेकर फरार हो गया था. करीम लाला ने हेलेन को पैसे वापस दिलवाए थे. करीम लाला अपने घर पर हर हफ्ते दरबार लगाता था. इसमें वो लोगों की शिकायतें सुनता और अपने गैंग की ताकत की बदौलत उन्हें सुलझाता.

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कहा जाता है फिल्म जंजीर में प्राण का किरदार करीम लाला से प्रभावित था.


80 के दशक में दाऊद के आने पर शुरू हुई गैंगवार
80 के दशक में मुंबई में दाऊद का नाम उभरा. उसके पहले गैंगस्टर्स के बीच तालमेल से काम चल रहा था. दाऊद के आने के बाद गैंगवार की शुरूआत हुई. करीम लाला के गैंग ने 1981 में दाऊद के भाई शब्बीर की हत्या कर दी. इसके बाद मुंबई की सड़कों पर गैंगवार शुरू हो गया. दाऊद का गैंग और करीम लाला का पठान गैंग एकदूसरे पर हमले करने लगा. 1986 में दाऊद के गैंग ने करीम लाला के भाई रहीम खान की हत्या कर दी. धीरे-धीरे करीम लाला की गैंग कमजोर पड़ने लगी. दाऊद के गैंग ने मुंबई पर अपना कब्जा जमा लिया. करीम लाला शांत पड़ गया. 90 साल की उम्र में 19 फरवरी 2002 को मुंबई में करीम लाला की मौत हो गई.

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First published: January 16, 2020, 10:32 AM IST
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