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कौन थे तान्हाजी, जिनकी शहादत पर बोले शिवाजी- मैंने अपना शेर खो दिया

News18Hindi
Updated: January 14, 2020, 6:05 PM IST
कौन थे तान्हाजी, जिनकी शहादत पर बोले शिवाजी- मैंने अपना शेर खो दिया
तानाजी शिवाजी महाराज के सेनापति थे

तान्हाजी (Tanaji) को 1670 में हुए सिंहगढ़ के युद्ध के लिए जाना जाता है. इस युद्ध में तान्हाजी ने अदम्य साहस का परिचय था. मुगलों से युद्ध कर तान्हाजी के नेतृत्व में मराठा सेना ने सिंहगढ़ किले पर कब्जा कर लिया था.

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  • Last Updated: January 14, 2020, 6:05 PM IST
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अजय देवगन, काजोल और सैफ अली खान स्टारर फिल्म तान्हाजी (Tanhaji) की चर्चा खूब हो रही है. तान्हाजी : द अनसंग वॉरियर की कहानी मराठा साम्राज्य के सेनापति तान्हाजी मालुसरे (tanaji Malusare) की जिंदगी पर आधारित है. 17वीं शताब्दी में तान्हाजी मराठा साम्राज्य के वीर सेनापति थे. वो छत्रपति शिवाजी महाराज के सेनापति और करीबी मित्र थे.

तान्हाजी को 1670 में हुए सिंहगढ़ के युद्ध के लिए जाना जाता है. इस युद्ध में तान्हाजी ने अदम्य साहस का परिचय दिया था. मुगलों से युद्ध कर तान्हाजी के नेतृत्व में मराठा सेना ने सिंहगढ़ किले पर कब्जा कर लिया था. तान्हाजी फिल्म में उसी युद्ध में तान्हाजी की वीरता और युद्ध कौशल को दिखाया गया है.

क्यों हुआ था सिंहगढ़ का युद्ध?
17वीं शताब्दी में मुगल और मराठा सेनाएं एकदूसरे के आमने-सामने थीं. हिंदुस्तान के ज्यादा से ज्यादा हिस्से पर कब्जे को लेकर दोनों के बीच युद्ध होते रहते थे. कहा जाता है कि उस वक्त मराठा साम्राज्य के कब्जे में करीब 23 महत्वपूर्ण और विशालकाय किले थे. मुगल साम्राज्य इन पर अपना आधिपत्य चाहता था. 1665 में मुगल सेना के राजपूत कमांडर जय सिंह ने शिवाजी महाराज को पुरंदर के किले में घेर लिया. इसके बाद मराठा साम्राज्य के साथ मुगलों की सेना ने जबरन पुरंदर का समझौता करवाया. इस समझौते के मुताबिक शिवाजी महाराज को पुरंदर, लोहागढ़, तुंग, तिकोना और सिंहगढ़ के किले को मुगल साम्राज्य को सौंपना था.

सिंहगढ़ किले को लेकर क्यों हुआ विवाद
इन सारे किलों में सिंहगढ़ का किला सबसे महत्वपूर्ण था. इसे पूरे पश्चिमी इलाके की राजधानी के बतौर देखा जाता था. जिसका भी इस किले पर आधिपत्य होगा वही पूरे पश्चिमी इलाके पर राज कर सकता था. इसके बाद पुरंदर किले का नंबर आता था. इसलिए जयसिंह का कहना था कि सिंहगढ़ पहला किला होगा, जिसे शिवाजी महाराज मुगल साम्राज्य को सौंपेंगे.

Who was tanaji on whose martyrdom shivaji said i lost my lion
फिल्म में अजय देवगन ने तान्हाजी का किरदार निभाया है
जब बातचीत करने पहुंचे शिवाजी को औरंगजेब ने बना लिया बंदी
पुरंदर समझौते के मुताबिक मुगल साम्राज्य से बातचीत करने के लिए शिवाजी महाराज आगरा पहुंचे. लेकिन मुगल बादशाह औरंगजेब ने धोखे से शिवाजी को नजरबंद कर दिया. किसी तरह से मुगल सेना को चकमा देकर शिवाजी महाराज महाराष्ट्र पहुंचने में कामयाब रहे. इसके बाद शिवाजी महाराज ने मुगलों से अपने किलों की वापसी का अभियान शुरू किया.

सिंहगढ़ पर कब्जे की तान्हाजी को दी जिम्मेदारी
शिवाजी महाराज ने सिंहगढ़ पर कब्जे की जिम्मेदारी अपने विश्वासपात्र सेनापति तान्हाजी मालुसरे को दी. इस अभियान में तान्हाजी के साथ उनके भाई सूर्याजी भी थे. सिंहगढ़ किला मुगल कमांडर उदय भान के कब्जे में था. फिल्म में उदयभान का रोल सैफ अली खान कर रहे हैं.

सिंहगढ़ पर कब्जा करना आसान नहीं था. इसके लिए किले की दीवारों पर सीधी चढ़ाई चढ़नी थी और फिर दुश्मन को परास्त कर युद्ध में जीत हासिल करनी थी. शिवाजी को मालूम था कि सारे किलों पर फतह हासिल नहीं की जा सकती.

सिंहगढ़ किले पर कब्जे के लिए भी इसी तरह की सीधी चढ़ाई चढ़नी थी. इसके बाद मेन गेट पर पहुंच कर किले के फाटक को खोलना था. मराठा सेना के लिए ये आसान नहीं था.

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फिल्म में सिंहगढ़ किले को लेकर मराठाओं और मुगलों के बीच छिड़े युद्ध की कहानी है


जब तान्हाजी ने हासिल किया सिंहगढ़ किला
4 फरवरी 1670 को तान्हाजी के नेतृत्व में मराठा सैनिकों ने सिंहगढ़ किले पर कब्जा कर लिया. तान्हाजी के साथ करीब 300 मराठा सैनिक थे. लेकिन इस युद्ध में खुद वीरता से लड़ते हुए तान्हाजी वीरगति को प्राप्त हुए. तान्हाजी के भाई सूर्याजी किले के मेन गेट के पास छिपे रहे. तान्हाजी अपने साथ कुछ सैनिकों को लेकर किले की दीवार चढ़कर मेन गेट तक पहुंचे और मेन गेट को खोल दिया.

मुगलों की सेना के साथ आमने-सामने की लड़ाई हुई. कहा जाता है कि उदयभान ने छलांग लगाकर तान्हाजी पर वार किया. इसमें तान्हाजी की ढाल टूट गई. इसके बाद भी दोनों के बीच लड़ाई होती रही. इस युद्ध में तान्हाजी के साथ उदयभान भी मारा गया. लेकिन किले पर मराठा सेना ने कब्जा हासिल कर लिया.
शिवाजी महाराज किले की वापसी पर खुश थे. लेकिन उन्हें अपने वीर सेनापति और भरोसेमंद दोस्त के खोने का गम था. उस वक्त शिवाजी के मुंह से निकला- 'गढ़ आला, पन सिंह गेला' यानी किला तो जीत लिया लेकिन अपना शेर खो दिया.

सिंहगढ़ किले को इसके पहले कोंधाना का किला के नाम से जाना जाता था. तान्हाजी की शहादत के बाद ही किले का नाम सिंहगढ़ यानी शेर का किला पड़ा.

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First published: January 14, 2020, 4:10 PM IST
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