CJI शरद बोबड़े का रिटायरमेंट करीब, कौन होगें नए चीफ जस्टिस?

भारत के मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबड़े.

भारत के मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबड़े.

भारत के कानून मंत्री (Law Minister of India) ने अगले मुख्य न्यायाधीश के नाम को लेकर अनुशंसा मांगी है. इस अनुशंसा पर प्रधानमंत्री (Prime Minister) के साथ विचार विमर्श के बाद देश के राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में शीर्ष पद के लिए नाम का ऐलान करते हैं.

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  • Last Updated: March 22, 2021, 3:06 PM IST
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भारत के मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबड़े (Sharad Arvind Bobde) आगामी 23 अप्रैल को रिटायर होंगे यानी उनके रिटायरमेंट अब ठीक एक महीना बाकी है तो सरकार ने उनके स्थान पर विकल्प देखने की कवायद शुरू कर दी है. एक समाचार एजेंसी ने रिपोर्ट किया कि बीते 19 मार्च को विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद (Ravi Shankar Prasad) ने सीजेआई बोबड़े को एक चिट्ठी लिखकर उनसे कहा कि वो अपने उत्तराधिकारी के बारे में सुझाव व अनुशंसा दें.

हालांकि अभी चीफ जस्टिस बोबड़े की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया है, लेकिन यह क़यास लगना शुरू हो चुकी है कि अगला चीफ जस्टिस कौन होगा. नागपुर में जन्मे बोबड़े ने 18 नवंबर 2019 को 63 साल की उम्र में देश के 47वें सीजेआई के तौर पर पद संभाला था. अब 17 महीनों की सेवा के बाद वो रिटायर होंगे.

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कैसे चुना जाएगा अगला सीजेआई?
निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होता यह है कि सुप्रीम कोर्ट में जो जज सबसे सीनियर होता है और शीर्ष पद के लिए फिट, उसे ही चुना जाता है. इतिहास में झांकें तो पता चलता है कि 1973 में जस्टिस अजीतनाथ राय की नियुक्ति के बाद विरोधों को देखते हुए इस नियम को तोड़ा गया था. इसी तरह, 1977 में भी इस नियम से अलग प्रक्रिया अपनाई गई थी, जब जस्टिस मिर्ज़ा हमीदुल्लाह बेग की नियुक्ति को लेकर चर्चाएं हुई थीं.

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ चीफ जस्टिस बोबड़े.


यह भी एक परंपरा है कि कानून मंत्री रिटायर हो रहे सीजेआई से अगले सीजेआई के बारे में राय लेते हैं. इस राय को लेकर प्रधानमंत्री से चर्चा होती है और इस चर्चा के बाद राष्ट्रपति देश के नए सीजेआई के नाम की घोषणा करते हैं.



कौन हो सकता है अगला चीफ जस्टिस?

अगर वरिष्ठता को ध्यान में रखकर ही देखा जाए तो बोबड़े के बाद अगले सीजेआई के तौर पर जस्टिस एनवी रामन्ना का नाम ही अहम है. 1957 में जन्मे रामन्ना ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में साल 2000 तक प्रैक्टिस की. 2013 में वह दिल्ली हाई कोर्ट में चीफ जस्टिस के पद पर पहुंचे थे. इसके तीन महीनों के भीतर ही उन्हें सुप्रीम कोर्ट में पोस्टिंग दी गई थी.

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रामन्ना का कार्यकाल 26 अगस्त 2022 को खत्म हो जाएगा यानी अगर वो अगले महीने सीजेआई का पद संभालते हैं तो वो करीब 16 महीने शीर्ष पद पर रहेंगे. 2018 में पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा के खिलाफ अभियोग, विधायक रिश्वत कांड में राजनीति और आरटीआई के तहत आपराधिक प्रकरण किए जाने का अहम जजमेंट और न्यायिक स्वतंत्रता केस अब तक रामन्ना के प्रमुख केस रहे हैं.

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सुप्रीम कोर्ट में सीनियर जज जस्टिस एनवी रामन्ना.


क्या रहे बोबड़े के उल्लेखनीय केस?

पहले आपको यह बता देें कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस 65 साल तक की उम्र तक पद पर रह सकते हैं और उन्हें संसद में अभियोग चलाए बगैर हटाना संभव नहीं होता. अनुच्छेद 124(4) इस अभियोग प्रक्रिया के बारे में नियम बताता है. इसके अलावा, सीजेआई अपनी मर्ज़ी से राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा देकर भी पद छोड़ सकते हैं.

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मौजूदा सीजेआई बोबड़े ने अपने कार्यकाल में कुछ अहम फैसलों में भूमिका निभाई है. कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन में माइग्रेंट वर्करों का मामला रहा हो या किसानों के आंदोलन को लेकर सुनवाई, बोबड़े प्रमुख रहे. इसके अलावा, अयोध्या जन्मभूमि केस और पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई के खिलाफ यौन शोषण के मामलों में भी बोबड़े का अहम रोल रहा.
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