कब और किन लोगों को सबसे पहले मिलगी कोरोना वैक्सीन?

कब और किन लोगों को सबसे पहले मिलगी कोरोना वैक्सीन?
रूसी वैक्सीन दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन हो सकती है- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)

हर देश सबसे ज्यादा वैक्सीन डोज सबसे पहले पाने के लिए छटपटा रहा है. ऐसे में सवाल ये आता है कि किसे सबसे पहले कोरोना वैक्सीन (who gets coronavirus vaccine first and when) मिलने वाली है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 1, 2020, 9:15 AM IST
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कोरोना वायरस (coronavirus) ने पूरी दुनिया में कोहराम मचा रहा है. यहां तक कि बड़े-बड़े देशों की आर्थिक गतिविधियां इसके कारण ठप पड़ी हैं. इस बीच रूस ने सबसे पहले वैक्सीन (Russia to register first corona vaccine) लाने की बात कही है. माना जा रहा है कि वो अगस्त के दूसरे हफ्ते में ही वैक्सीन रजिस्टर करा लेगा. ऐसा हुई तो रूसी वैक्सीन दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन साबित होगी. पीछे-पीछे इस दौड़ में अमेरिका, चीन, ब्रिटेन और भारत भी हैं. वैसे अब सवाल ये उठ रहा है कि वैक्सीन तैयार होने पर सबसे पहले किसे मिलेगी.

क्या है रूस की वैक्सीन
सबसे पहले तो ये बता दें कि हाल ही में अमेरिका और ब्रिटेन की सरकार ने रूस पर कोरोना का डाटा चोरी करने का आरोप लगाया था. इन देशों की साइबर सिक्योरिटी फोर्स ने कहा है कि रूस उनकी प्रयोगशालाओं से वैक्सीन का फॉर्मूला चुराने की कोशिश में है. हालांकि ये आरोप साबित नहीं हो सके और अब रूस दौड़ में सबसे आगे है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक वो 10-12 अगस्त तक वैक्सीन को रजिस्टर करा लेगा. इसके बाद से ये दुनिया के सामने होगी.

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वैसे अब तक रूस ने अपनी वैक्सीन के फॉर्मूला के बारे में खास जानकारी नहीं दी है. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार वैक्सीन को मॉस्को के गामेल्या इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी ने बनाया है. वैक्सीन ने सिर्फ पहले और दूसरे चरण के ट्रायल पूरे किए हैं और माना जा रहा है कि अब तीसरा ट्रायल हुए बिना ही वैक्सीन लोगों के बीच आ जाएगी.



पूरी दुनिया में वैक्सीन के लिए हर्ड इम्युनिटी लानी है तो लगभग 4.7 बिलियन डोज की जरूरत होगी- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


कहां और किसे सबसे पहले मिलेगी वैक्सीन
इसपर लगातार बात हो रही है. अगर पूरी दुनिया में वैक्सीन के लिए हर्ड इम्युनिटी लानी है तो लगभग 4.7 बिलियन डोज की जरूरत होगी. अब एक बार में इतनी वैक्सीन तो बन नहीं सकतीं लिहाजा वैक्सीन के लिए प्राथमिकता तय होगी. लेकिन सबसे पहले ये उस देश को मिलेगी जो दवा निर्माताओं से करार कर पाता है. यानी जो सबसे बड़ूी कीमत देकर डोज बुक करा सके, दवा के नियत डोज उसके पास पहुंचेंगे. जैसे अमेरिका और यूके की सरकार ने ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका के साथ पहले ही करार कर लिया है. वैक्सीन बनाने पर इन देशों की सरकारों ने भारी पैसे दिए हैं.

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कौन-सा देश हैं कहां
खासकर ब्रिटेन ने जितनी फंडिंग की है, उसके साथ सितंबर में अगर वैक्सीन लॉन्च हो जाए तो सबसे पहले ब्रिटेन को 30 मिलियन डोज दिए जाएंगे. बाकी वैक्सीन डोज इनक्यूजिव वैक्सीन अलायंस के तहत आने वाले देशों, फ्रांस, जर्मनी, इटली और नीदरलैंड्स को दिए जाएंगे. यूके सरकार ने ही Pfizer के साथ ही 30 मिलियन डोज के लिए करार किया है. एक फ्रेंच कंपनी Valneva के साथ ये 60 मिलियन डोज पा सकेगी.

अमेरिका और यूके की सरकार ने ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका के साथ पहले ही करार कर लिया - सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


अमेरिका ने एस्ट्राजेनेका को अपने लिए 300 मिलियन डोज तैयार करने के लिए कहा है. साथ ही कई दूसरी दवा निर्माता कंपनियों के साथ भी अमेरिका की सैकड़ों मिलियन वैक्सीन डोज बनाने के लिए डील हो चुकी है. इधर चीन में तीन कंपनियां वैक्सीन बना रही हैं . हालांकि चीन का साफ कहना है कि वो पहले अपने यहां इसका इस्तेमाल करेगा और बाद में दुनिया को मिलेगा.

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भारत में कब तक मिलेगी वैक्सीन
अब अगर भारत की बात करें तो यहां भी कई काम हो रहे हैं. जैसे ऑक्सफोर्ड ने पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट से डील की है. इसके तहत साल खत्म होते तक वैक्सीन की 400 मिलियन डोज तैयार की जाएंगी. हालांकि ये वैक्सीन सिर्फ भारत में नहीं, बल्कि मध्यम आय वाले कई देशों में जाएंगी. वैसे सीरम इंस्टीट्यूट का कहना है कि भारतीयों को भी बड़ी संख्या में डोज दिए जाएंगे.

सबसे पहले हर देश में उन्हें वैक्सीन दी जाएगी जो बीमारी के लिए ज्यादा संवेदनशील हैं- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


सबसे पहले हेल्थकेयर वर्कर्स को
माना जा रहा है कि सबसे पहले हर देश में उन्हें वैक्सीन दी जाएगी जो बीमारी के लिए ज्यादा संवेदनशील हैं. जैसे अस्पताल में काम करने वाला स्टाफ मरीजों के कारण लगातार बीमारी के संपर्क में रहता है. ऐसे में उनके लिए बीमारी से बचना सबसे ज्यादा जरूरी है. इस हिसाब से देखा जाए तो पूरी दुनिया में सिर्फ हेल्थकेयर वर्करों को ही 2 बिलियन से ज्यादा डोज की जरूरत होगी. द क्विंट की रिपोर्ट के मुताबिक इसके बाद ये अस्पतालों में ही दूसरे हाई रिस्क ग्रुप को दिया जाएगा, जैसे बुजुर्गों को. यहां से वैक्सीन ऐसे इलाकों में जाएगी, जहां बीमारी सबसे ज्यादा फैली हुई है. उन्हें कवर करते हुए ये हर जगह फैलती जाएगी.

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कितनी वैक्सीन तैयार होती है हर साल
पूरी दुनिया में हर साल लगभग 8 बिलियन वैक्सीन डोज बनाए जाते हैं. ये अलग-अलग तरह की वैक्सीन्स होतीं हैं, जैसे बच्चों को लगने वाली अनिवार्य वैक्सीन से लेकर फ्लू तक की वैक्सीन. इन वैक्सीन का बनना कम नहीं किया जा सकता है क्योंकि ये हर साल लाखों जानें बचाती हैं. जैसे WHO के मुताबिक साल 2010 से लेकर 2015 के बीच इनके कारण 10 मिलियन से ज्यादा जानें बचीं. यानी इनका बनना तो जरूरी है ही, साथ ही अब कोरोना का टीका भी तैयार किया जाएगा. इसके लिए दवा निर्माता कंपनियों को अतिरिक्त काम करना होगा. वैसे भारत ही अकेला हर साल लगभग 3 बिलियन डोज बनाता है. माना जा रहा है कि दुनिया के लिए कोरोना का टीका तैयार करने में इसका भी बड़ा योगदान रहेगा.
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