Explainer : आर्मेनिया-अज़रबैजान युद्ध में कौन जीता और कैसे?

नोगोर्नो काराबाख में युद्धविराम के बाद अज़रबैजान ने जीतने का दावा किया.
नोगोर्नो काराबाख में युद्धविराम के बाद अज़रबैजान ने जीतने का दावा किया.

दो बिल्लियों की लड़ाई में बंदर के फायदा उठाने वाली कहानी नोगोर्नो-काराबाख (2020 Nogorno-Karabakh War) में सजीव दिख रही है. सीमा विवाद (Border Dispute) को लेकर छिड़ी जंग रुक तो गई है, लेकिन अब यहां वर्चस्व की लड़ाई का एक मोर्चा बन गया है.

  • News18India
  • Last Updated: November 19, 2020, 7:54 AM IST
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नोगोर्नो-काराबाख की जंग (Nogorno-Karabakh War) में 2000 से ज़्यादा जानें जाने के बाद आर्मेनिया और अज़रबैजान संघर्ष विराम (Ceasefire) पर राज़ी हुए. युद्ध विराम की स्थिति बनाने में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) की बड़ी भूमिका रही. अब एक तरफ आर्मेनिया ने कहा कि युद्ध विराम की स्थिति स्थायी नहीं है, तो दूसरी तरफ, तुर्की की शह पर लड़ने वाले अज़रबैजान (Turkey Supports Azerbaijan) ने अपनी जीत का दावा कर दिया. कुछ सवाल ज़रूर खड़े हुए हैं कि सच में कौन जीता? क्या युद्ध या युद्ध की वजह खत्म हो गई और रूस को बीच बचाव करने से क्या मिला?

छह हफ्तों की भीषण लड़ाई में दोनों तरफ के सैनिकों समेत नागरिक भी मारे गए. पूरी दुनिया के कई शक्तिशाली देशों ने इस लड़ाई के सिलसिले में अपना पक्ष स्पष्ट करने की कवायद भी की. लेकिन, आर्मेनिया और अज़रबैजान की लड़ाई के बाद दक्षिण काकेशिया में रूस का प्रभुत्व बढ़ा. कैसे? आइए समझें कि पूरी कहानी क्या और कैसी रही.

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संघर्ष क्षेत्र के नक्शे की तस्वीर (विकिमीडिया कॉमन्स से साभार), जो पिछले दिनों ही अपडेट की गई.

कैसे आई युद्ध विराम की स्थिति?
यह तो आपको बताया जा चुका है कि नोगोर्नो काराबाख सीमा विवाद में उलझा इलाका है, जिस पर दोनों देश अपना दावा करते रहे हैं और सोवियम यूनियन के भंग हो जाने के बाद से संघर्ष करते रहे हैं. इसी विवाद को लेकर भड़के हालिया युद्ध की शुरूआत में तटस्थ रहने वाले रूस ने तब बीच बचाव किया, जब तुर्की ने अज़रबैजान के पीछे अपनी ताकत झोंक दी.

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तुर्की की मदद से जब अज़रबैजान ने जीत का दावा किया, तब आर्मेनिया ने रूस की मदद मांगी. रूस ने साफ कहा कि आर्मेनिया के साथ उसका सिक्योरिटी समझौता है, लेकिन नोगोर्नो काराबाख में लोगों की सुरक्षा उसकी ज़िम्मेदारी नहीं है. लेकिन, तुर्की के बढ़ते दखल के बाद रूस ने अपने दबदबे की खातिर दखल दिया. एक तरफ, रूस ने आर्मेनिया की तरफ से सैन्य मोर्चे खोले तो दूसरी तरफ, तुर्की के आतंकियों के खिलाफ सीरिया में हमले किए.


साफ तौर पर तुर्की के लिए रूस ने एक चेतावनी ज़ाहिर की. अज़रबैजान की जीत के दावे को खारिज न करते हुए पुतिन ने आर्मेनिया के पूरी तरह हार जाने की बात नहीं मानी. निर्णायक भूमिका में दिख रहे रूस के दबाव में दोनों देशों को आखिर युद्ध विराम की बात मानना पड़ी. अब यहां अहम यह है कि युद्ध विराम को लेकर रूस क्या चाह रहा था और क्या उसे वह मिला?

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रूस का दबदबा कितना बढ़ा?
फिलहाल यह कहना कठिन है. लेकिन, एक तो तुर्की और कुछ पश्चिमी देशों को इस इलाके से खदेड़ने और चेताने में रूस कामयाब रहा. वहीं, रूस इस इलाके में शांति दल भेजना चाहता था, जिसका विरोध आर्मेनिया और अज़रबैजान दोनों कर रहे थे, लेकिन अब रूस ये भी कर सकेगा. लेकिन, यहां स्थिति थोड़ी मुश्किल हो गई है. रूस के दबाव के बावजूद तुर्की झुकने को तैयार नहीं है. रूस के शांति दल के सामने तुर्की अज़ेरी बलों और सीमाओं के सपोर्ट के लिए अपने सैनिक तैनात करवा रहा है.

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नोगोर्नो काराबाख में युद्धविराम के बाद भी सेनाएं तैनात हैं.


इस युद्ध के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि इस इलाके में रूस के दबदबे को चुनौती दी जा सकती है. तुर्की के बर्ताव से साफ है कि रूस के लिए यहां एक संघर्ष कर पाने वाला उसका दुश्मन खड़ा हो चुका है. साफ है कि युद्ध विराम भले हुआ हो, लेकिन यहां युद्ध खत्म नहीं हुआ है.

क्या है युद्ध विराम का मतलब?
जैसा कि आर्मेनिया दावा कर चुका है कि यह अस्थायी स्थिति है. इससे साफ है कि युद्ध विराम का मतलब युद्ध खत्म होना नहीं है. रूस और तुर्की के बीच जो टेंशन चल रहा है अगर उसमें और उलझनें बढ़ीं तो जल्द ही यहां युद्ध दोबारा शुरू हो सकता है. नोगोर्नो काराबाख का पूरा इलाका अज़ेरी सीमा में नहीं गया है बल्कि कुछ ही हिस्से को कब्ज़े में लेकर अज़रबैजान ने अपनी जीत घोषित कर दी.

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इन हालात में आर्मेनिया इस इलाके पर अपना कब्ज़ा वापस चाहता है, जो 1990 के दशक से उसके पास रहा था. अज़रबैजान पीछे हटने को तैयार नहीं है. रूस की स्थिति यह है कि उसकी सेनाएं अज़रबैजान की सीमा के भीतर भी तैनात हैं. तुर्की की सेनाएं अज़ेरी सेना के सपोर्ट के लिए तैयार हैं. सार यह है कि सभी बंदूकें एक दूसरे की तरफ निशाना लगाए बैठी हैं, फिलहाल बंदूकों के ट्रिगर निकाल दिए गए हैं.
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