14 अगस्त क्यों है भारतीय इतिहास का सबसे मुश्किल दिन

14 अगस्त भारतीय इतिहास (Indian History) के सबसे मुश्किल दिनों के तौर पर दर्ज है. इस दिन भारत (India) और (Pakistan) के बीच हुए बंटवारा कभी न खत्म होने वाला दर्द देकर गया...

News18Hindi
Updated: August 14, 2019, 9:40 AM IST
14 अगस्त क्यों है भारतीय इतिहास का सबसे मुश्किल दिन
बंटवारे के बाद भारत-पाकिस्तान में दंगे भड़क उठे थे
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Updated: August 14, 2019, 9:40 AM IST
14 अगस्त को भारतीय इतिहास (Indian History) का सबसे मुश्किल दिन कहा जाए तो गलत नहीं होगा. इस एक दिन में भारत (India) का भूगोल, समाज और संस्कृति सबका बंटवारा हो गया. 14 अगस्त 1947 को ही पाकिस्तान (Pakistan) अस्तित्व में आया था. इसी दिन पाकिस्तान को स्वयंभू राष्ट्र का दर्जा मिला. पाकिस्तान 14 अगस्त को ही अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है.

ये भारत के लिए सबसे पेंचीदा दौर था. भारत और पाकिस्तान के जिन लोगों ने बंटवारे का दर्द सहा है वो आज तक इसे नहीं भूल पाए हैं. सिर्फ एक फैसले की वजह से लाखों लोगों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा, अपनी जमीन जायदाद छोड़कर चले जाना पड़ा. लाखों लोग मकान-दुकान और संपत्ति से रातोंरात बेदखल होकर सड़क पर आ गए. भारत पाकिस्तान बंटवारे की त्रासदी सदियों तक याद रखी जाएगी. ये बीसवीं सदी की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक रही.

आजादी के वक्त भारत की आबादी करीब 40 करोड़ थी. भारत को आजादी तो मिली लेकिन बंटवारे की कीमत पर. आजादी मिलने से काफी पहले से मुसलमान अपने लिए एक अलग मुल्क की मांग कर रहे थे. जिनकी अगुआई मुस्लिम लीग के मोहम्मद अली जिन्ना कर रहे थे. हिंदू बहुल भारत में मुसलमानों की आबादी करीब एक चौथाई थी.

भारत ने झेला सबसे बड़े विस्थापन का दर्द

भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू बंटवारे के खिलाफ थे. जिन्ना की जिद ने अंग्रेजों को यहां से जाते-जाते एक लकीर खींच देने का मौका दे गई. वो लकीर जो सदियों तक इस पूरे प्रदेश में उथल-पुथल मचाती रही. सिर्फ उस लकीर की वजह से दुनिया ने सबसे बड़ा विस्थापन देखा. करीब 1.45 करोड़ लोग विस्थापित हुए.

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बंटवारे के बाद करीब 1.45 करोड़ लोग विस्थापित हुए


बंटवारे के वक्त हुए दंगों में लाखों लोग मारे गए. जिन लोगों ने एकसाथ आजादी का सपना देखा था वो एकदूसरे को मारने पर आमादा थे. सबसे ज्यादा दर्द महिलाओं ने झेला. उन्हें पुरुषों की लड़ाई में महिला होने की कीमत चुकानी पड़ी थी. दंगों में हजारों महिलाओं के साथ बलात्कार और बदसलूकी हुई.
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महिलाओं के लिए विभाजन का दर्द कितना बड़ा था, इसे दिल्ली में रहने वाली सरला दत्त नाम की एक महिला ने बताया था. सरला ने उस दर्द को सहा था. डॉयचे वैले से बात करते हुए उन्होंने बताया था कि बंटवारे के वक्त उनकी उम्र महज 15 साल की थी. उनके पिता जम्मू के रेडियो स्टेशन में संगीतकार के रूप में काम करते थे. बंटवारे के दंगों में उन्हें एक पाकिस्तानी सैनिक ने अगवा कर लिया था.

आधी आबादी को महिला होने की कीमत चुकानी पड़ी

पाकिस्तान में हिंदुओं और सिखों की बस्ती पर मुसलमानों ने कब्जा कर लिया था. उन्हें वहां से चले जाने की धमकियां मिल रही थीं. सरला दत्ता ने बताया कि जब वेलोग भागे तो उन्होंने खेतों में कई बच्चों को पड़े देखा. जो रो रहे थे. पुरुष अपने बच्चों को छोड़ दे रहे थे और महिलाओं को ये डर था कि अगर वो तेजी से नहीं चलीं तो पीछे छूट जाएंगी. बहुत सी महिलाएं कमजोर थीं. इंसानियत बिल्कुल खत्म हो गई थी.

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बंटवारे के बाद हुए दंगे में लाखों लोग मारे गए


सरला की शादी जबरदस्ती मुसलमान सैनिक के भाई से करवा दी गई. उन्हें कुरान पढ़ने को दिया गया. उनसे घर के काम करवाए जाए. हिंदुस्तान में किसी मुस्लिम महिला के साथ अपराध की खबर आती तो वहां हिंदू महिलाओं को नंगा करके घुमाया जाता. महिलाएं ज्यादती की सबसे आसान शिकार बन गई थीं.
बंटवारे ने दर्द की अंतहीन कहानी दी.

बिना सोचे समझे हो गया बंटवारा

भारत पाकिस्तान का बंटवारा बिल्कुल अफरा तफरी में हुआ. भारत के अंतिम गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन ब्रिटेन जल्दबादी में बंटवारे को अंजाम दिया. उन्हें किसी तरह से ब्रिटिश सैनिकों को भारत से निकालने की जल्दबाजी थी.

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बंटवारे ने भारत-पाकिस्तान के बीच कभी न खत्म होने वाली नफरत की लकीर खींच दी


भारत और पाकिस्तान के बीच बंटवारे की लकीर खींचने वाले सीरिल रेडक्लिफ को यहां के बारे में बिल्कुल जानकारी नहीं थी. वो बंटवारे से कुछ हफ्ते पहले ही भारत आए थे. उन्होंने बिना धार्मिक और सांस्कृतिक विचार मन में लाए दो मुल्कों के बीच एक लकीर खींच दी. इसने हिंदुओं और मुसलमानों के बीच न खत्म होने वाली दीवार बना दी.

14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान को आजादी मिली और 15 अगस्त 1947 को हिंदुस्तान को. लेकिन दोनों देशों के बीच की सीमा रेखा तय करने में 17 अगस्त तक का वक्त लग गया. 17 अगस्त 1947 को दोनों देशों के बीच सीमाएं खींच गईं लेकिन हालात बिगड़ते ही गए. इसने दो मुल्कों के बीच कभी न खत्म होने वाली नफरत के बीज बो दिए.

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First published: August 14, 2019, 9:40 AM IST
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