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US-Iran Tension: ईरान से लड़ाई में अमेरिका का दोस्त इजरायल तक क्यों नहीं दे रहा ट्रंप का साथ

Iran Attack on US Forces Airbase: इस पूरे मामले में अमेरिका (America) फंसता दिख रहा है. ईरान (Iran) के साथ लड़ाई में जिस तरह के समर्थन की उसे उम्मीद थी, वो नहीं मिल रही है. इजरायल तक से अमेरिका का अपना मसला बता रहा है...

Iran Attack on US Forces Airbase: इस पूरे मामले में अमेरिका (America) फंसता दिख रहा है. ईरान (Iran) के साथ लड़ाई में जिस तरह के समर्थन की उसे उम्मीद थी, वो नहीं मिल रही है. इजरायल तक से अमेरिका का अपना मसला बता रहा है...

Iran Attack on US Forces Airbase: इस पूरे मामले में अमेरिका (America) फंसता दिख रहा है. ईरान (Iran) के साथ लड़ाई में जिस तरह के समर्थन की उसे उम्मीद थी, वो नहीं मिल रही है. इजरायल तक से अमेरिका का अपना मसला बता रहा है...

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अमेरिका (America) और ईरान (Iran) के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका है. ईरान ने बदले की कार्रवाई करते हुए इराक (Iraq) में अमेरिका के दो सैन्य बेस पर हमले किए हैं. अमेरिकी एयरबेस पर दर्जनों मिसाइलें दागी गई हैं. ईरान के कुद्स आर्मी प्रमुख जनरल कासिम सुलेमानी के अमेरिकी हवाई हमले में मारे जाने के बाद से ही ये कहा जा रहा था कि अब जंग के हालात पैदा होंगे और ऐसा ही हुआ. ईरान ऐसे और हमले कर सकता है.

इस पूरे मामले में अमेरिका फंसता दिख रहा है. ईरान के साथ जारी तनातनी में जिस तरह के समर्थन की उसे उम्मीद थी, वो नहीं मिल रही है. सबसे बड़ी बात की ईरान की आर्मी के जनरल कासिम सुलेमानी पर किए हवाई हमले की कार्रवाई पर न अमेरिका को अपने मित्र राष्ट्रों का समर्थन मिला और न ही अपने देश का.

ईरान में अमेरिकी एयर स्ट्राइक के ट्रंप प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाए गए. पूछा गया कि बिना कांग्रेस को जानकारी दिए ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर हमला क्यों किया? कुछ सीनेटर ने भी ईरान में अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना की. और अब दुनियाभर में अमेरिका के करीबी दोस्त भी इस मामले से न सिर्फ अपना हाथ खींच रहे हैं बल्कि अमेरिका के कुछ भरोसेमंद दोस्त इसे बेवजह भी बता रहे हैं.

अमेरिकी फौज को छोड़ना पड़ सकता है इराक
ईरान से जंग को लेकर वाशिंगटन में कंफ्यूजन है. कासिम सुलेमानी के मारे जाने के बाद इराक की सरकार ने अमेरिकी फौज को वापस लौट जाने की मांग की है. इस बारे में इराकी प्रशासन ने अमेरिका को लेटर लिखा है. आईएसआईएस के खिलाफ लड़ रहे अमेरिकी फौजियों के लिए ये बड़ा झटका है. अब इराक खुद नहीं चाहता कि उसकी धरती पर अमेरिकी फौज रहे. सोमवार को इराकी प्रशासन के लिखे खत में कहा गया है कि अमेरिकी फौज की तुरंत और सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाए. इराकी संसद ने इस बारे में प्रस्ताव पारित किया है.

why america friends and allies is not supporting donald trump in us iran war
ईरान ने इराक में अमेरिकी बेस पर हमले किए हैं


हालांकि पेंटागन ने इराक छोड़ने जैसी खबरों से इनकार किया. अमेरिका के विदेश मंत्री मार्क एस्पर ने कहा कि अभी तक अमेरिकी फौज के इराक को छोड़ने के बारे में फैसला नहीं लिया गया है. अमेरिकी सेना के सर्वोच्च कमांडर जॉइंट्स चीफ्स ऑफ स्टाफ जनरल मार्क मिले ने भी कहा है कि ‘इराक का खत एक गलती है. ऐसा नहीं होना चाहिए. इराक में ऐसा नहीं होने जा रहा है.’

अगर इराक से अमेरिकी फौज को वापस बुला लिया जाता है तो ये ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ा सैटबैक होगा. आईएसआईएस मजबूत होगा और ईरान की रणनीतिक जीत होगी. कासिम सुलेमानी को मार तो गिराया गया है लेकिन अब अमेरिका को सूझ नहीं रहा है कि वो आगे क्या करे. बिना किसी साफ प्लान के कासिम सुलेमानी के मार दिए जाने की वजह से अमेरिका के मित्र राष्ट्र भी इस मसले पर अमेरिका का समर्थन नहीं कर रहे हैं.

अमेरिका को नहीं मिल रहा है अपने दोस्तों का साथ
ईरान के साथ जंग में अमेरिका के मित्र देशों ने अपनेआप को अलग रखा है. नाटो देशों ने साफ कर दिया है कि वो अमेरिका के एयरस्ट्राइक में शामिल नहीं थे. अमेरिका के यूरोपियन मित्र देशों ने इस पूरे मामले से दूरी बनाए रखी है. यहां तक की अमेरिका का सबसे भरोसेमंद दोस्त इजरायल भी ईरान के साथ जंग में अमेरिका के साथ नहीं है.

इजरायल ने भी साफ कर दिया है कि वो कासिम सुलेमानी पर हुए एयरस्ट्राइक में शामिल नहीं था. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका को चौंकाने वाला बयान दिया. अपनी सिक्योरिटी कैबिनेट की मीटिंग में उन्होंने कहा कि ‘कासिम सुलेमानी के मारे जाने में इजरायल का कोई हाथ नहीं है. ये अमेरिका का अपना मसला है.’

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ईरान पर हमले की ट्रंप प्रशासन की आलोचना की जा रही है


मिडिल ईस्ट के अमेरिकी दोस्त भी नहीं दे रहे साथ
मिडिल ईस्ट में अमेरिका का सबसे बड़ा सहयोगी देश सऊदी अरब भी इस मामले से दूरी बनाए हुए है. सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अमेरिका में हैं. उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात भी की है. सऊदी अरब ने अपनी चिंताओं से अमेरिका को अवगत कराया है. लेकिन ईरान के साथ युद्ध के मामले पर वो दुनिया के बाकी देशों की तरह फिक्रमंद है. सऊदी अरब को भी लगता है कि युद्ध नहीं होना चाहिए.

फ्रांस की तरफ से भी कहा गया है कि राजनयिक स्तर पर इस मसले को सुलझाना चाहिए. फ्रांस के मुताबिक अभी भी वक्त है, अमेरिका इस मसले को सुलझा सकता है. संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेश ने भी मामले पर चिंता जताई है. अमेरिकी रक्षामंत्री माइक पोम्पियो से बात करते हुए उन्होंने कहा है कि अगर तनाव बढ़ता है तो इसमें और भी देश शामिल होंगे. इसके नतीजे खतरनाक हो सकते हैं.

ईरान पर हमला ट्रंप प्रशासन का गलत फैसला
दुनियाभर के देश ईरान पर हमले को ट्रंप प्रशासन का गलता फैसला मान रहे हैं. ईरान पर अमेरिकी हमले को डोनाल्ड ट्रंप का एकतरफा और बेवजह का फैसला बताया जा रहा है. इसलिए इस मामले में कोई भी देश पड़ना नहीं चाह रहा है. ईरान के खिलाफ अमेरिका ने बड़ी कार्रवाई तो कर दी है लेकिन अब वो अकेला पड़ गया है.

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