अमेरिका में क्यों EVM से नहीं होती वोटिंग, होता है बैलेट बॉक्स का इस्तेमाल

अमेरिका में वोट परंपरागत तरीके से यानी बैलेट बॉक्स से होता है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)
अमेरिका में वोट परंपरागत तरीके से यानी बैलेट बॉक्स से होता है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)

तकनीक में बेहद आधुनिक देश अमेरिका में वोट परंपरागत तरीके से यानी बैलेट बॉक्स (voting in America through ballot box) से होता है. वे मशीन सिस्टम यानी ईवीएम पर कतई भरोसा नहीं करते.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 27, 2020, 2:14 PM IST
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US Presidential Election: अमेरिका में 3 नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव के बीच पोस्टल वोटिंग शुरू भी हो चुकी है. इस बीच वर्तमान राष्ट्रपति और कैंडिडेट डोनाल्ड ट्रंप कई बार मतदान की प्रक्रिया में गड़बड़ी का डर भी जता चुके हैं. वैसे दिलचस्प बात ये है कि सुपर पावर होने के बाद भी अमेरिका वोटिंग के मामले में काफी परंपरागत है और EVM (Electronic Voting Machine) पर भरोसा नहीं करता.

ज्यादातर देश बैलेट पेपर पर करते हैं भरोसा 
दुनियाभर में सौ से ज्यादा देश हैं, जहां लोकतांत्रिक ढंग से नेताओं के चुनाव का दावा किया जाता है. हालांकि केवल 25 देश ही हैं, जो सरकार चुनने के लिए ईवीएम यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का इस्तेमाल करते हैं या फिर कर चुके हैं. वोटों की गिनती के लिए भारत में प्रचलित ये शैली ढाई सौ साल पुराने लोकतंत्र यानी अमेरिका जैसे विकसित देशों में लोकप्रिय नहीं है. वे वोटिंग के लिए इलेक्ट्रॉनिक जरिया चुनने की बजाए बैलेट पेपर का इस्तेमाल करते हैं.

अमेरिकी नागरिक को इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम पर उतना भरोसा नहीं- सांकेतिक फोटो (Pixabay)

अमेरिकियों को ईवीएम पर संदेह 


वहां का चुनाव आयोग इसकी एक वजह ये बताता है कि अमेरिकी नागरिक को इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम पर उतना भरोसा नहीं अगर बात वोटिंग जैसी महत्वपूर्ण हो. हर बात पर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम पर भरोसा करने वाले अमेरिकी नागरिक मानते हैं कि ईवीएम हैक किया जा सकता है और पेपर बैलेट ज्यादा भरोसेमंद है, जिसमें उनका वोट वहीं जाता है, जहां वे चाहें.

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परंपरा से जुड़ाव का जरिए भी मानते हैं 
इसके अलावा पेपर बैलेट यहां पर 18वीं सदी से चला आ रहा है इसलिए इसे चुनाव में एक रिचुअल की तरह भी देखा जाता है. अमेरिका में ई-वोटिंग का एकमात्र तरीका है ईमेल या फैक्स से वोट करना. इसमें भी वोटर को बैलेट फॉर्म भेजा जाता है, जिसे वो भरते हैं और ई-मेल या फैक्स कर सकते हैं.

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इस बार हो रही डाक से वोटिंग
इसके अलावा इस साल कोरोना के चलते डाक से वोटिंग हो रही है. इसके तहत इलेक्शन से पहले बैलेट आ जाता है और उस पर अपनी पसंद के कैंडिडेट को भरकर बैलेट भेजना होता है. या ये भी हो सकता है कि वोटर इलेक्शन के रोज पोलिंग बूथ में पहुंचकर उसे ड्रॉपबॉक्स में डाल दे. एक और तरीका है एब्सेंटी वोटिंग. इसके तहत वोटर बैलट के लिए रिक्वेस्ट करता है और साथ में बताना होता है कि चुनाव में वो क्यों पोलिंग बूथ पर नहीं आ सकता.

वोटिंग का आधुनिक तरीका ईवीएम कभी भी विवादों से मुक्त नहीं रहा- सांकेतिक फोटो


ईवीएम पर सारे आधुनिक देशों ने जताया संदेह 
वैसे वोटिंग का आधुनिक तरीका ईवीएम कभी भी विवादों से मुक्त नहीं रहा. छेड़छाड़ या हैकिंग के डर से दुनिया के कई देशों में ईवीएम पर बैन लगा दिया गया. इसकी शुरुआत नीदरलैंड ने की. इसके बाद जर्मनी ने इसे वोटिंग की गलत और अपारदर्शी प्रणाली बताते हुए इसे बंद कर दिया. इटली ने भी ईवीएम के शुरुआती इस्तेमाल के बाद हैकिंग के डर से इसे बंद कर दिया. इंग्लैंड, फ्रांस में बैलेट पेपर ही इस्तेमाल हुए. वहीं अमेरिका में ईवीएम कभी रहा ही नहीं.

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भारत में ऐसे आई मशीन 
भारत में भी सालों तक बैलेट पेपर से वोटिंग होती रही. इसमें वोटों की गिनती में लंबा वक्त लगता था. इसे देखते हुए साल 1989 में इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की मदद से सरकार ने ईवीएम निर्माण की शुरुआत की. इसके जरिए पहली बार वोटिंग नवंबर 1998 में हुई. 16 विधानसभा चुनावों में वोटिंग के लिए ईवीएम का इस्तेमाल किया गया. इसके बाद से ये हर जगह चलने लगा और साल 2004 के आम चुनावों में पहली बार पूरे देश के मतदाताओं ने ईवीएम के जरिए अपने वोट डाले थे, तब से मतदान के लिए यही जरिया पूरे देश में लागू है.

वर्तमान राष्ट्रपति और कैंडिडेट डोनाल्ड ट्रंप और दूसरे उम्मीदवार जो बिडेन- सांकेतिक फोटो (cnbc)


पार्टियां हारने पर ही करती हैं शक
हालांकि समय-समय पर सारी ही राजनैतिक पार्टियां इस मशीन को गलत बताती रही हैं. मजे की बात ये है कि हमेशा हारने वाली पार्टी इस पर संदेह करती है. इस पर बाकायदा एक किताब भी लिखी जा चुकी है- 'डेमोक्रेसी एट रिस्क, कैन वी ट्रस्ट अवर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन.'

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ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की बातों के बीच और राजनैतिक दलों की मांग के की वजह से भारत में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इलेक्शन कमीशन ने मतदाता सत्यापित पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) के साथ ईवीएम लागू किया. इसमें वोटर खुद ये तय कर पाता है कि उसका वोट उसी को गया है, जिसे उसने डाला है. दावा किया गया कि इससे ईवीएम से छेड़छाड़ की आशंका काफी हद तक दूर हो जाती है.
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