क्यों ईरान को लेकर America अपने दोस्त देशों से भी भिड़ रहा है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर लगी पाबंदियों को बढ़ा सकते हैं (Photo-snl)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर लगी पाबंदियों को बढ़ा सकते हैं (Photo-snl)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ईरान पर लगी पाबंदियों को लगातार बढ़ा रहे (America to reimpose restrictions on Iran) हैं, जबकि उनके साथी देश भी ईरान के खेमे में जाते दिख रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 20, 2020, 1:50 PM IST
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कोरोना काल में कई देशों के बीच केमिस्ट्री बन-बिगड़ रही है. भारत-चीन के तनाव के बीच हाल ही में अमेरिका ईरान पर बौखलाया दिख रहा है. यहां तक कि वो ईरान पर लंबे-चौड़े व्यापारिक प्रतिबंध लगाने की बात कर रहा है. बता दें कि ईरान पर पहले से ही कई तरह के प्रतिबंध लगे हुए हैं. अब दूसरे देश उन्हें हटाने के पक्ष में हैं, जबकि अमेरिका का रुख पहले से भी सख्त हो गया. समझिए, क्या है ईरान पर अमेरिकी पाबंदियों के पीछे का गणित और आखिर क्यों दोनों देशों की ठनी हुई है.

जानिए, ताजा विवाद क्या है
फिलहाल मामला ये है कि अमेरिका की ईरान को लेकर नाराजगी कम नहीं हो रही. असल में साल 2015 में ईरान ने परमाणु समझौते पर हामी भरी थी. इसके बाद यूनाइटेड नेशन्स ने उसपर लगे व्यापारिक प्रतिबंधों में ढील दे दी थी. हालांकि बाद में ईरान अपने वादे से फिर गया और खुद को परमाणु ताकत बनाने की तैयारी शुरू कर दी. इसी बात पर अमेरिका भड़का हुआ है और उसपर पाबंदी को और सख्त बनाने की बात कर रहा है. इसके पीछे मकसद ये है कि ईरान अलग-थलग पड़ जाए और परमाणु शक्ति पर अपना काम रोक दे.

अमेरिका की ईरान को लेकर नाराजगी कम नहीं हो रही- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)

आखिर ईरान पर पाबंदी लगी क्यों थी


इसके लिए इतिहास में जाने की जरूरत है. बता दें कि पहले अमेरिका और ईरान के बीच अच्छे संबंध थे. दूसरे विश्वयुद्ध के बाद दोनों के बीच तनाव की शुरुआत तेल को लेकर हुई. ईरान में भारी मात्रा में कच्चे तेल का भंडार मिला. इसे पाने के लिए अमेरिका और ब्रिटेन ने ईरान में अपनी पसंद की सरकार लानी चाही. वहीं ईरानी जनता की अपनी पसंद थी. ये देखते हुए साल 1953 में अमेरिका ने ब्रिटेन के साथ मिलकर ईरान में तख्तापलट दिया. जनता के चुने पीएम को हटाकर अमेरिका ने अपनी पसंद के शाह रजा पहलवी को सत्ता दे दी.

ईरान में क्रांति के बाद रूढ़िवादिता
ईरानी जनता के भीतर ही भीतर गुस्सा उबलता रहा. आखिरकार इसे उसकी पसंद के नेताओं का साथ मिला और इसके साथ ही ईरान में क्रांति हो गई. साल 1979 में हुई इस क्रांति के बाद ईरान एक इस्लामी गणतंत्र हो गया. इसके बाद से ही वो ज्यादा रूढ़िवादी होता गया और अमेरिका से उसके संबंध खराब ही होते चले गए.

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आखिरकार साल 1980 में ईरान और इराक के बीच हुए युद्ध में अमेरिका ने दोस्त ईरान को छोड़कर इराक का साथ दिया. नतीजा, युद्ध में ईरान को भारी नुकसान हुआ. इसके बाद से ही वो परमाणु ताकत बनने की सोचने लगा.

इराक से युद्ध के बाद ईरान खुद को परमाणु ताकत बनाने की तैयारी करने लगा- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


क्या हैं ईरान पर लगे प्रतिबंध
साल 2002 में पहली बार ईरान के परमाणु कार्यक्रम की भनक दुनिया को लगी. तब अमेरिका और भड़क गया. उसने दूसरे यूरोपियन देशों से बात करके ईरान पर व्यापारिक पाबंदियां लगा दीं. तब से ईरान अलगाव ही झेल रहा था. सके तहत ईरान के साथ हथियार का व्यापार नहीं हो सकता है. खासकर हेलीकॉप्टर और फाइटर मिसाइलें नहीं खरीद सकता.

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कोई भी देश उसकी मदद करेगा तो उसे भी अमेरिका के प्रतिबंधों का सामना करना होगा. साथ ही साथ पाबंदी के तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम में शामिल सभी वैज्ञानिकों के आने-जाने पर रोक है. यहां तक कि उनकी संपत्ति भी फ्रीज हो चुकी है.

साल 2015 में मिली ढील
इसमें साल 2015 में ढील मिली. ओबामा के शासनकाल में अमेरिका समेत ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, रूस, जर्मनी और ईरान के बीच में परमाणु कार्यक्रम पर एक समझौता हुआ. इसके साथ ही उसपर से कई आर्थिक प्रतिबंध हट गए. इस समझौते को ज्वाइंट कम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (जेसीपीओए) कहा गया.

अमेरिकी सरकार के मुताबिक ईरान पर प्रतिबंध खत्म होने से पहले लागू हो जाएंगे- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


ट्रंप ने बदले समीकरण
ये अक्टूबर 2018 में खत्म होने वाला था, जिसके बाद ईरान पर लगी पाबंदियां हट जातीं. हालांकि डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से ईरान और अमेरिका के बीच समीकरण दोबारा गड़बड़ाने लगे. ट्रंप ने ओबामा के दौरान हुए समझौते को एकतरफा कहा और उसे रद्द कर दिया. दोबारा सारे आर्थिक प्रतिबंध लागू हो गए. यहां तक कि अमेरिका ने वहां की आर्मी को आतंकी कह दिया.

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कुल मिलाकर अमेरिकी सरकार के मुताबिक ये प्रतिबंध खत्म होने से पहले दोबारा लागू हो जाएंगे. अब प्रतिबंधों को आगे बढ़ाने की बात पर अमेरिका के सहयोगी देश भी राजी नहीं. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यों में से 13 सदस्य ट्रंप की जिद को अमान्य ठहरा रहे हैं. यूरोपियन यूनियन ने शांति की बात करते हुए ईरान पर से पाबंदियां हटाने की बात की लेकिन ट्रंप इसपर राजी नहीं हैं. इधर ईरान भी लगातार परमाणु हथियारों पर काम कर रहा है. ये बात ट्रंप को और भड़का रही है. ईरानी जनरल सुलेमानी की अमरीकी हमले में मौत पर पर ईरान भी गुस्से में है और जब-तब अमेरिका के खिलाफ बयान देने लगा है.
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