आखिर क्यों अमेरिकी मुसलमान Donald Trump पर भरोसा जता रहे हैं?

ट्रंप की मुस्लिम विरोधी नीति के बाद भी मुस्लिमों का उनपर यक़ीन बढ़ा- सांकेतिक फोटो (ndla)
ट्रंप की मुस्लिम विरोधी नीति के बाद भी मुस्लिमों का उनपर यक़ीन बढ़ा- सांकेतिक फोटो (ndla)

राष्ट्रपति बनते ही ट्रंप (Donald Trump) ने 6 मुस्लिम देशों की अमेरिकी यात्रा पर बैन लगा दिया था. उनके मुताबिक इससे अमेरिका आतंक से बचा रहेगा. ऐसे कई मुस्लिम-विरोधी बयानों के बाद भी ट्रंप को उनका सपोर्ट मिल रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 2, 2020, 4:05 PM IST
  • Share this:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अक्सर अपने मुस्लिम-विरोधी बयानों के कारण विवादों में रहते हैं. साल 2017 में राष्ट्रपति पद की शपथ लेते ही उन्होंने सबसे पहले 7 मुस्लिम बहुल देशों के नागरिकों के अमरीका आने पर पाबंदी लगा दी थी. उनका तर्क था कि इससे अमेरिका को आतंकी हमलों से बचाया जा सकेगा. इस बात का काफी विरोध हुआ था. बाद के समय में ट्रंप की छवि एक नर्म रुख वाले नेता की बनी लेकिन तब भी इस्लाम विरोधी कई बातें वे जब-तब बोलते रहे. इस सबसे बाद भी इस बार चुनाव के पोल में अमेरिकी मुस्लिम ट्रंप (American Muslim support Donald Trump) की ओर झुके हैं. जानिए, क्या है इसकी वजह.

क्या कह रहे हैं सर्वे
महीनेभर बाद होने वाले राष्ट्रपति चुनावों को लेकर अमेरिका में सरगर्मियां हैं. लगातार ये समझने की कोशिश की जा रही है कि आखिर ट्रंप और विपक्षी जो बिडेन में किसका पलड़ा भारी रहेगा. सारे ही पोल्स के रुझान कमोबेश एक से हैं. जैसे सीएनएन के सर्वे में बिडेन ट्रंप से आगे दिख रहे हैं. SQL Server Reporting Services (SSRS) की मदद से हुए इस सर्वे के अनुसार ट्रंप को जहां 42 प्रतिशत वोटर ही सपोर्ट कर रहे हैं, वहीं बिडेन उनसे 10 प्रतिशत आगे हैं.

ये समझने की कोशिश की जा रही है कि आखिर ट्रंप और विपक्षी जो बिडेन में किसका पलड़ा भारी रहेगा- सांकेतिक फोटो (cnbc)

बिडेन का पलड़ा दिख रहा भारी


इसी तरह से मनीकंट्रोल ने सीएनएन की एक खबर से हवाले से इसपर एक रिपोर्ट की. इसमें बताया गया है कि कैसे 54 प्रतिशत रजिस्टर्ड वोटरों ने ट्रंप के लिए नकारात्मक प्रतिक्रिया दी. दूसरे सर्वे में भी इसी तरह के रुझान दिख रहे हैं. वॉशिंगटन पोस्ट और एबीसी न्यूज पोल के मुताबिक ट्रंप की रेटिंग 43 प्रतिशत अप्रूवल तक सिमटी हुई दिखी. वहीं वॉल स्ट्रीट जर्नल और फॉक्स न्यूज के अनुसार ट्रंप के लिए ये प्रतिशत 44 तक जा रहा है.



ये भी पढ़ें: दुनिया की वो 5 जगहें, जहां से वर्ल्ड वॉर 3 का बिगुल बज सकता है

मुस्लिमों का सपोर्ट ट्रंप को
कुल मिलाकर देखा जाए तो जून के बाद से लगभग हर एजेंसी की रेटिंग में बिडेन ने लीड ली है. हालांकि इसका दूसरा पहलू काफी हैरान करता है. ट्रंप को जिन वोटरों से सबसे कम उम्मीद थी, वही वोटर उनके पक्ष में आते दिख रहे हैं. हम बात कर रहे हैं अमेरिकी मुस्लिम वोटरों की. बता दें कि 9/11 वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर आतंकी हमले को लेकर ट्रंप अक्सर बात करते हैं. माना जाता है कि वे चरमपंथियों के सख्त खिलाफ हैं. मुसलमान वोटर भी ट्रंप को सपोर्ट करते नहीं लगते थे लेकिन हालिया ट्रेंड कुछ और ही कह रहा है. इसके मुताबिक मुस्लिम ट्रंप की ओर झुके हैं.

ट्रंप को जहां 42 प्रतिशत वोटर ही सपोर्ट कर रहे हैं, वहीं बिडेन उनसे 10 प्रतिशत आगे हैं


कहती है रिसर्च
रिसर्च संस्थान Institute for Social Policy and Understanding के मुताबिक ट्रंप खुद मुस्लिम वोटरों से वोट की अपेक्षा नहीं कर रहे इसलिए वे उन्हें लुभाने की भी कोई कोशिश या कोई वादा नहीं कर रहे. दूसरी ओर हैरतअंगेज तरीके से यही वोटर अब ट्रंप के पक्ष में हैं. साल 2016 के कार्यकाल से लेकर अब तक ट्रंप को पसंद करने वाले अमेरिकी मुस्लिम तेजी से बढ़े हैं. इसी गुरुवार को आए सर्वे के नतीजे ये बता रहे हैं.

ये भी पढ़ें: चीन में पढ़ी-लिखी लड़कियों को बदसूरत और बूढ़ा कहा जाता है, चौंका देगी वजह 

ये ट्रेंड एकदम अलग है
सर्वे के मुताबिक ट्रंप को सपोर्ट करने वाली मुस्लिम आबादी में साल 2016 से लेकर अब तक सीधे 10 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. बता दें कि साल 2016 में केवल 4% मुस्लिम डेमोक्रेट्स के पक्ष में थे, जबकि अब ये 14% हैं. ये ट्रेंड पहले से काफी अलग दिख रहा है. वैसे अमेरिका में मुस्लिम वोटरों की संख्या लगभग 3 मिलियन है. ये पूरी अमेरिकी वोटर आबादी का 1 प्रतिशत ही मानी जाती है. इसके बाद भी इनके वोटों का काफी महत्व माना जाता है. खुद मुसलमान वोटर अब बढ़-चढ़कर चुनाव और चुनावी एजेंडा में अपने मुताबिक चीजें खोजने लगे हैं.

ट्रंप के आने के बाद से मुसलमान वोटरों का उनके लिए सपोर्ट बढ़ा- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


बिडेन ने बहस के दौरान इंशाअल्लाह क्यों कहा
यही वजह है कि मुस्लिम वोटरों को लुभाने की कोशिश कई अमेरिकी प्रेसिडेंट करते रहे हैं. इसी बार ट्रंप और विपक्षी पार्टी के उम्मीदवार जो बिडेन की बहस को लें तो बहस के दौरान बिडेन ने एक शब्द का इस्तेमाल किया था- इंशाअल्लाह. इस पर्शियन शब्द का अर्थ है, जैसी ईश्वर की इच्छा. इस शब्द ने तुरंत ही बहस सुनने वाले अमेरिकी मुस्लिम वोटरों और अरब देशों का भी ध्यान अपनी ओर खींचा.

ये भी पढ़ें: क्या इस्लामिक देश तुर्की के खिलाफ खड़ा ग्रीस दूसरा इजरायल बन जाएगा?   

बहस के दौरान रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार बिडेन की कोशिश से कई तरह के अनुमान भी लगाए जा रहे हैं, जैसे कईयों का मानना है कि इसके जरिए वे खुद को मुसलमानों के लिए उदार बताने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं कुछ को ये वोटरों को लुभाने का एजेंडा-भर लग रहा है.

बहरहाल, इतना तय है कि ट्रंप के आने के बाद से मुसलमान वोटरों का उनके लिए सपोर्ट बढ़ा है. हफिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट में इस बारे में विस्तार से छपा है. हफ पोस्ट Pew Research Center (प्यू रिसर्च सेंटर) के हवाले से बताता है कि साल 2018 में ही ट्रंप को पसंद करने वाले मुस्लिम बढ़ने लगे. इसके मुताबिक 66% से ज्यादा अमेरिकी मुस्लिम ट्रंप की पार्टी के साथ थे, वहीं केवल 13% ने खुद को रिपब्लिकन से जुड़ा माना.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज