उत्तर कोरिया और किम को इतनी तवज्जो क्यों दे रहे हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप और किम की मुलाकात

डोनाल्ड ट्रंप और किम की मुलाकात

उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप क मुलाकात के कई मायने निकाले जा रहे हैं. फरवरी में दोनों नेताओं के मुलाकात हुई थी लेकिन वार्ता विफल रही थी. इसके बावजूद ट्रंप दो कदम आगे बढ़कर किम से मिलने क्यों गए?

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डोनाल्ड ट्रंप ऐसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बन गए हैं, जिन्होंने पद पर रहते हुए उत्तर कोरिया की धरती पर कदम रखा. उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डीएमजेड में मुलाकात की. डीएमजेड यानी उत्तर कोरिया और दक्षिणी कोरिया को बांटने वाली वो रेखा, जो डिमिलिट्राडज्ड जोन है. इस जोन के दोनों तरफ दोनों देशों के सेनाओं की भारी तैनाती होती है. दोनों नेताओं के बीच मुलाकात की योजना डीएमजेड में थी. लेकिन डोनाल्ड ट्रंप किम जोंग उन के साथ –साथ चलते हुए उत्तर कोरिया की सीमा रेखा के भीतर पहुंचे.

दोनों नेताओं ने एकदूसरे से हाथ मिलाया. अभी कुछ महीने पहले तक दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंध थे. अमेरिका और उत्तर कोरिया एकदूसरे के खिलाफ बयानबाजी तक कर रहे थे. सवाल है कि आखिर ऐसा क्या हुआ है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन को इतनी अहमियत दे रहे हैं? आखिर ट्रंप किम को इतनी तवज्जों क्यों दे रहे हैं कि वो खुद ट्विटर पर किम से मुलाकात का आग्रह करते हैं. फिर दोनों नेताओं के बीच बातचीत की संभावना बनती है.

अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स लिखता है कि उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग से अमेरिकी राष्ट्रपति ने मुलाकात कर एक ठोस योजना के साथ बातचीत की शुरुआत की है. अमेरिका इस कोशिश में लगा है कि बातचीत के बाद ऐसा माहौल बन जाए कि उत्तर कोरिया नए हथियारों का निर्माण नहीं करने पर राजी हो जाए. इसके साथ ही द न्यूयॉर्क टाइम्स लिखता है कि ट्रंप प्रशासन का दावा है कि उसका लक्ष्य उत्तर कोरिया को पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए राजी कराना है. हालांकि ये इतना आसान नहीं है.



किम जोंग और डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के क्या हैं मायने
अमेरिका और उत्तर कोरिया के संबंधों को करीब से देखने वाले दो तरह की बातें कहते हैं. कुछ का कहना है कि इस छोटी सी मुलाकात से ज्यादा आशाएं रखना ठीक नहीं है. लेकिन ये सुखद आश्चर्य की तरह है कि शनिवार को साउथ कोरिया की यात्रा पर पहुंचे डोनाल्ड ट्रंप ने किम जोंग से मिलने की इच्छा जताई. ट्रंप ने ट्विटर पर किम से मिलने की इच्छा जताई और डीएमजेड में उनकी मुलाकात की व्यवस्था हुई. अमेरिका की सकारात्मक पहल का उत्तर कोरिया ने उतना ही पॉजिटिव रिस्पांस दिया है. इसलिए भविष्य में दोनों देशों के संबंधों की राह थोड़ी और आसान हो सकती है.

Why american president donald trump gives so much importance to north korea kim jong un
हनोई में ट्रंप और किम की मुलाकात

दूसरी तरफ कुछ जानकारों को लगता है कि भले ही मुलाकात जल्दबाजी में और छोटी हुई लेकिन इससे गंभीर बातचीत का रास्ता तैयार हुआ है. इसके कामयाब नतीजे आने वाले वक्त में दिख सकते हैं. डीएमजेड में मीडिया के सामने मुखातिब हुए ट्रंप ने कहा कि ये एक एतिहासिक पल है. और उन्होंने उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया को बांटने वाली रेखा को पार करने पर गर्व है.

ट्रंप की तरह किम जोंग ने भी उतनी ही सरगर्मी से जवाब दिया. किम ने कहा कि इस मुलाकात से पता चलता है कि उनके और ट्रंप के बीच रिश्ते कितने शानदार हैं.  इसके पहले हनोई में दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी. लेकिन उस वक्त बातचीत विफल रही थी. फरवरी के बाद इस बार की मुलाकात आशाएं जगाने वाली हैं. लेकिन पूरी तरह से कुछ ठोस कहा जाना मुश्किल है. दोनों नेताओं के बीच तीन बार मुलाकात हो चुकी है. हनोई से पहले दोनों नेता सिंगापुर में मिले थे. लेकिन अब तक कुछ गंभीर नहीं निकला है.

इस मुलाकात से क्या आगे की राह निकलती दिख रही है ?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कोशिश है कि उत्तर कोरिया किसी भी तरह से परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाए. इसके लिए पूरी कवायद की जा रही है. उत्तर कोरिया जिस तरह से परमाणु हथियारों का जखीरा इकट्ठा कर रहा है. वो पूरी दुनिया के लिए चिंताजनक है. ऐसे में अमेरिका के सामने ये चुनौती है कि इस दिशा में वो पहल करके उत्तर कोरिया को परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए राजी कर सके.

उत्तर कोरिया को राजी करना आसान नहीं है. उसके पहले वो अमेरिकी प्रतिबंधों में छूट की अपेक्षा रखता है. परमाणु हथियारों के संग्रह की वजह से अमेरिका ने उत्तर कोरिया पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं. दोनों देशों को अपनी-अपनी तरफ से दो कदम चलना होगा, तभी कोई सकारात्मक नतीजे की उम्मीद की जा सकती है.

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डीएमजेएड में मुलाकात में इवांका ट्रंप भी मौजूद थीं

पिछले साल दोनों देशों के नेताओं की मुलाकात सिंगापुर में हुई थी. उस वक्त लगा था कि उत्तर कोरिया परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में ठोस पहल करने वाला है. इस दिशा में अच्छा माहौल तैयार हुआ था. लेकिन ये कैसा होगा, इसके बार में जानकारी बाहर नहीं आ पाई थी. फिर हनोई में दोनों नेताओं की मुलाकात ने सारे किए कराए पर पानी फेर दिया. वार्ता बुरी तरह से विफल रही.

अमेरिकी राष्ट्रपति बड़े मिशन में लगे हैं

इस बार अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक बार फिर पहल की है. 50 मिनट की मुलाकात में दोनों ने एकदूसरे की तारीफ तो की. लेकिन असल मुद्दों पर चर्चा नहीं हुई है. इसलिए कुछ जानकार इसे सिर्फ फोटो अपॉरचुनिटी की तरह देख रहे हैं. मुलाकात के बाद ट्रंप ने कहा कि वो समझते हैं कि हमने एक बेहतरीन रिश्ता बनाया है. अगर दो ढाई साल पहले जाकर देखें तो स्थितियां कितनी खतरनाक थीं. उत्तर और दक्षिण कोरिया के हालात चिंताजनक थे. अब वैसी बात नहीं है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे अपने लिए एक अवसर के तौर पर देखते हैं. अगर उन्होंने उत्तर कोरिया को परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए आगे बढ़ाने में कामयाब हो गए तो ये उनकी लिए बड़ी उपलब्धि होगी.

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