जानें आनंद शर्मा के बारे में, कभी गांधी परिवार के करीब थे, अब बगावती हुए

कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता आनंद शर्मा (PTI)

कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता आनंद शर्मा (PTI)

एक जमाने में गांधी परिवार के बहुत खास कहे जाने वाले आनंद शर्मा अब पार्टी हाईकमान के खिलाफ बगावती हो गए लगते हैं. वो पार्टी के उन 23 असंतुष्ट नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी थी. अब वो लगातार पार्टी की आलोचना करने वाले बयान दे रहे हैं.

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कांग्रेस के पुराने और वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने भी गुलाम नबी आजाद के बाद आलाकमान के खिलाफ बगावती तेवर दिखाए हैं. उन्होंने खुले तौर पर पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के आईएसएफ यानि इस्लामिस्ट सेकुलर फ्रंट से गठजोड़ पर कांग्रेस की आलोचना की है. उनका ये बयान चर्चा का विषय बना हुआ है. माना जा रहा है कि वो कांग्रेस के उन मुखर नेताओं के तौर पर सामने आ गए हैं, जिन्हें कांग्रेस में असंतुष्ट नेताओं के ग्रुप 23 के तौर पर देखा जा रहा है.

आनंद शर्मा केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं. लंबे समय से वो कांग्रेस में हैं. एक जमाने में उन्हें गांधी परिवार का बहुत करीबी माना जाता रहा है. पहले वो संजय गांधी के साथ थे. फिर राजीव के बहुत करीबी बन गए. सोनिया के भी वो करीबी माने जाते रहे हैं लेकिन अब उनकी नाराजगी का क्या सबब है.

राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता
आनंद शर्मा जून 2014 से राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता रहे हैं. हालांकि उनका कार्यकाल अगले साल के अंदर खत्म होने वाला है. वो कांग्रेस के उस ग्रुप के नेता हैं जो मुखर तौर पर गांधी परिवार के खिलाफ मैदान में उतर आय़ा है. धीरे धीरे ये नेता अब मुखर हो रहे हैं.
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राज्यसभा से ही चुनकर आते रहे हैं
वह हिमाचल में शिमला से ताल्लुक रखते हैं. ज्यादातर राज्यसभा से ही चुनकर आते रहे हैं. शिमला से उन्होंने कानून की पढ़ाई की है. वो कांग्रेस में युवा नेता के तौर पर उभरे और अपनी खास पहचान बनाते हुए आगे तक पहुंचे.

पत्नी गांधीजी के मुस्लिम सहयोगी की पोती
उनकी पत्नी का नाम जेनोबिया है. वो मुस्लिम हैं. मेडिकल दाखिले के सिलेसिले में आनंद शर्मा से उनकी पहचान हुई. दरअसल वो दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी के सहयोगी रहे इब्राहिम अश्वात की पोती हैं. जब वो मेडिकल कॉलेज में चौथे साल की पढ़ाई कर रही थीं, तभी उन्होंने आनंद से आर्यसमाजी तरीके से शादी कर ली. उनके दो बेटे हैं.

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एक समय गांधी परिवार के आंख-कान रहे
आनंद शर्मा एक समय में गांधी परिवार के आंख-कान माने जाते थे लेकिन अब उन्होंने भी बगावती सुर अपना लिए हैं और पार्टी की जमकर आलोचना कर रहे हैं। शर्मा ने मंच से जरूर कहा कि वह एक मजबूत पार्टी चाहते हैं लेकिन सच क्या सिर्फ इतना ही है?

क्यों नाराज हैं पार्टी हाईकमान से
आनंद शर्मा की नाराजगी दरअसल राज्यसभा में उन्हें विपक्ष का नेता न बनाए जाने को लेकर है. खबरों के मुताबिक, 15 फरवरी को गुलाम नबी आजाद का कार्यकाल खत्म होने के बाद वह चाहते थे कि अब उन्हें राज्यसभा में विपक्ष का नेता बनाया जाए लेकिन ऐसा हुआ नहीं. उनकी बजाय राहुल और सोनिया गांधी के विश्वसनीय माने जाने वाले मल्लिकार्जुन को तरजीह दी गई. माना जाता है कि आनंद शर्मा इससे नाखुश हैं.

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हिमाचल से ताल्लुक रखते हैं
फिलहाल जम्मू में कांग्रेस के नाराज नेताओं की सभा आयोजित हुई थी. अगली सभी हिमाचल में हो सकती है, जहां से आनंद शर्मा यहीं से आते हैं. आनंद के बारे में ये भी कहा जाता रहा है कि वो कभी जमीनी नेता नहीं रहे. इसलिए 80 के दशक से ही वो राज्यसभा में चुन कर आते रहे हैं.

सोनिया को चिट्टी लिखने वालों में शामिल 
बीते साल कांग्रेस पार्टी में बदलाव की मांग के लिए सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखने वालों में आनंद शर्मा भी शामिल थे. इससे आलाकमान उनसे नाराज भी है.

केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं
मनमोहन सिंह सरकार में वो केंद्रीय कामर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्टर रहे. उन्होंने विदेशी निवेश को आकर्षित करने के कई काम किए. माना जाता है कि देश की पहली नेशनल मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी के पीछे उनकी खास भूमिका रही.
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