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    क्या बाइडन का आना कट्टर मुल्क ईरान को इजरायल पर हमले की छूट दे देगा?

    ईरान और इजरायल के बीच तनाव में अमेरिका भी हमेशा पैर अड़ाता रहा- सांकेतिक फोटो (militarist)
    ईरान और इजरायल के बीच तनाव में अमेरिका भी हमेशा पैर अड़ाता रहा- सांकेतिक फोटो (militarist)

    इजरायल अमेरिका में बाइडन प्रशासन से बातचीत की योजना (Israel is planning to talk with Biden administration) बना रहा है. उसे डर है कि नई अमेरिकी सरकार ने ईरान (Iran) के प्रति नरम रुख बरता तो उसके लिए खतरा बढ़ जाएगा.

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 21, 2020, 11:20 AM IST
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    ईरान और इजरायल के बीच तनाव (Iran–Israel tension) लगातार गहरा रहा है. यहां तक कि धमकियों से ऊपर जाते हुए दोनों देशों में भिड़ंत भी होने लगी है. इस बीच इंटरनेशनल मीडिया में ये कयास भी लग रहे हैं कि इजरायल अब ईरान को धमकाने के लिए अमेरिकी मदद भी ले सकता है. इसके लिए वहां नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन से बातचीत के लिए योजना तैयार की जा रही है. समझिए, आखिर क्या है ईरान और इजरायल का मामला और अमेरिका की इस झगड़े में क्या भूमिका है.

    दोनों देशों के बीच क्या है मसला
    ईरान एक मुस्लिम बहुत राष्ट्र है तो इजराइल एक यहुदी राष्ट्र ठहरा. साल 1979 में हुई ईरानी क्रांति की वजह से वहां कट्टरपंथी नेता सत्ता में आ गए. तब से ही दोनों देशों के संबंध खराब हो गए. ईरान कह रहा है कि इजरायल ने मुस्लिमों की जमीन पर कब्जा कर रखा है और वो उन्हें वहां से हटाना चाहता है. इसके लिए सीधी जंग की बजाए ईरान उन समूहों को समर्थन देता है जो इजरायल पर वार करें, जैसे हिज्बुल्ला और फलस्तीनी संगठन हमास.

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    इधर इजरायल भी ईरान को उसकी परमाणु शक्ति के कारण खतरे की तरह देखता है. वो मानता है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए वरना वो इजरायल पर इसका इस्तेमाल कर सकता है.



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    बाइडन प्रशासन से बात के लिए इजरायल के विदेश मंत्रालय ने एक स्पेशल टीम बनाई- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


    इनके बीच अमेरिका क्या कर रहा है
    दोनों की लड़ाई में अमेरिका भी बीच में रहा लेकिन मध्यस्थ या बीच-बचाव करने वाले की तरह नहीं, बल्कि ईरान के खिलाफ. पहले अमेरिका और ईरान के बीच अच्छे संबंध थे. दूसरे विश्वयुद्ध के बाद दोनों के बीच तनाव की शुरुआत तेल को लेकर हुई और फिर संबंध खराब ही होते चले गए. ईरान अपने मुख्य जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के लिए भी अमेरिकी हमले को जिम्मेदार ठहराता है.

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    इससे पहले ही अमेरिका ने यूरोपियन देशों से बात करके ईरान पर व्यापारिक पाबंदियां लगा दीं, जो भारी हथियारों की खरीदी से जुड़ी हुई थीं. महीनेभर पहले ही यूरोपियन देशों ने ईरान से पाबंदी हटाई है, हालांकि मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अब भी पाबंदी लगाए हुए हैं.

    इजरायल का डर
    अब जनवरी में नए राष्ट्रपति जो बाइडन आ जाएंगे, जिसके बाद वे अपने मुताबिक फैसले लेंगे. इजरायल को इस बात का डर है कि बाइडन भी कहीं ईरान से पाबंदी न हटा लें. ऐसे में सबसे भारी खतरा इजरायली सुरक्षा को होगा. यही वजह है कि इजरायल अभी से ही बाइडन से बातचीत की योजना बना रहा है कि ताकि सत्ता में आकर वे ऐसा कुछ न करें.

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    साल 1979 में हुई ईरानी क्रांति की वजह से वहां कट्टरपंथी नेता सत्ता में आ गए- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


    ये है योजना
    इसके लिए इजरायल के विदेश मंत्रालय ने एक स्पेशल टीम बनाई है. एक्सियस (axios) की रिपोर्ट के मुताबिक ये टीम लगातार बाइडन प्रशासन के संपर्क में रहेगी और ईरान से जुड़े मामलों पर नजर रखेगी. इसके लिए बाइडन की ट्रांजिशन टीम के सदस्यों से संपर्क भी शुरू हो चुका है.

    अमेरिका ने हरदम की इजरायल की मदद
    वैसे माना जा रहा है कि इजरायल ट्रंप की जीत का समर्थक था. ट्रंप आमतौर पर कट्टरपंथी मुस्लिम देशों के लिए अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर करते रहे और ये बात इजरायल के पक्ष में जाती थी. बीते कुछ सालों से अमेरिका और ईरान के बीच भी तनाव बढ़ता ही गया. ऐसे में ईरान और बाकी मुस्लिम मुल्कों से घिरा इजरायल अमेरिका का पक्का साथी बन गया. अमेरिका न केवल नीतियों के जरिए, बल्कि सैन्य संसाधनों के जरिए भी इजरायल की लगातार मदद करता रहा.

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    एक तरह से खाड़ी देशों के बीच मजबूत देश इजरायल अमेरिका का प्रतिनिधित्व करता रहा. अब बाइडन के सत्ता में आने के बाद ये गणित अलग रुख ले सकता है. यही वजह है कि ईरान से जुड़े मामलों को देखने वाली अमेरिकी टीम को लेकर अभी से इजरायल तैयारी में है.
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