दुनिया के सबसे खुशहाल देशों के लोग क्यों कर रहे हैं खुदकुशी

दुनिया भर में सालाना आत्महत्या के लगभग आठ लाख मामलों में 21 फीसदी भारत में होते हैं.

News18Hindi
Updated: August 29, 2018, 3:43 PM IST
दुनिया के सबसे खुशहाल देशों के लोग क्यों कर रहे हैं खुदकुशी
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Updated: August 29, 2018, 3:43 PM IST
एक नए शोध से पता चला है कि सबसे खुशहाल देशों और सबसे खुशहाल अमेरिकी राज्यों में लोग आत्महत्या भी सबसे ज्यादा करते हैं. ब्रिटेन के वारविक विश्वविद्यालय, न्यूयॉर्क में हैमिल्टन कॉलेज और फेडरल रिज़र्व बैंक ऑफ सैन फ्रांसिस्को का शोध यू.एस. और अंतरराष्ट्रीय डेटा का इस्तेमाल करके हुआ है. कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका, आइसलैंड, आयरलैंड और स्विट्ज़रलैंड बेहद खुशहाल देश हैं लेकिन वहां आत्महत्या दर भी लगातार बढ़ रहा है.

आत्महत्या के स्तर और आत्महत्या की दरों के बीच संबंधों की पुष्टि करने के लिए, शोधकर्ताओं ने संयुक्त राज्य अमेरिका को कवर करने वाले दो बहुत बड़े डेटा सेटों के सहारे शोध किया. शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि एक महत्वपूर्ण कारण जो खुशहाल जीवन और आत्महत्या की दरों के बीच एक बड़ा लिंक है लोगों की एक दूसरे के प्रति तुलना और उसके चलके ईष्या का भाव.



वारविक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एंड्रयू ओसवाल्ड का कहना है- "एक खुशहाल जगह में असंतुष्ट लोगों को जीवन कठोर महसूस हो सकता है. उनके विरोधाभास आत्महत्या के जोखिम में वृद्धि कर सकते हैं. यदि मनुष्य मनोदशा के सहारे चलते हैं तो जीवन में ऐसे माहौल में सबसे अधिक सहनशील हो सकते हैं जिसमें अन्य इंसान दुखी हों. हम लोगों का दुख तो देख सकते हैं लेकिन खुशी नहीं."

हैमिल्टन कॉलेज के प्रोफेसर स्टीफन वू का कहना है कि यह परिणाम अन्य शोधों जैसा है जो दिखाते हैं कि लोग अपने आसपास के लोगों की तुलना में खुद पर ज्यादा ध्यान देते हैं. वे हमेशा सामने वाले से आगे निकलना चाहते हैं. इन प्रकार के तुलनात्मक प्रभावों को आय, बेरोजगारी, अपराध और मोटापे से जोड़ा जा सकता है.

खुशहाल देशों में भारत की रैंकिंग

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक विश्व में सबसे खुश देशों की सूची में भारत 133वें स्थान पर है. इस मामले में भारत, आतंकवादियों की शरणस्थली पाकिस्तान और बेहद गरीब देश नेपाल से भी पीछे है.
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पिछले साल की तुलना में इस सूची में भारत 11 स्थान नीचे खिसक गया है. पिछले साल भारत का स्थान 122वां था. अफगानिस्तान को छोड़कर बाकी सभी सार्क देशों की तुलना में भारत इस मामले में पीछे है. अफगानिस्तान इस मामले 145वें स्थान पर है.

आठ सार्क देशों में पाकिस्तान सबसे ऊपर 75वें स्थान पर है. इस सूची में नेपाल का स्थान 101वां, भूटान का 97वां, बांग्लादेश का 115वां व श्रीलंका का 116वां स्थान है. चीन का इस सूची में 86वां स्थान रहा. यूनाइटेड नेशंस सस्टेनबल डेवलेपमेंट सोल्यूशन नेटवर्क (एसडीएसएन) की 2018 की वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट में 156 देशों की सूची बनाई गई है जिसमें प्रति व्यक्ति जीडीपी, सामाजिक समर्थन, स्वस्थ जीवन प्रत्याशा, सामाजिक स्वतंत्रता, उदारता व भ्रष्टाचार की अनुपस्थिति आदि के आधार पर देशों में प्रसन्नता का अनुमान लगाया गया.

वार्षिक सर्वेक्षण में पाया गया कि फिनलैंड सबसे खुशहाल देश है. फिनलैंड ने कहा कि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण देश में प्रकृति से लोगों का जुड़ाव, सुरक्षा, चाइल्डकेयर, अच्छे स्कूल और नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवा आदि ऐसी चीज़े रहीं जिसके कारण देश में लोग प्रसन्न हैं. दूसरी ओर, अमेरिका के लोग दिन-ब-दिन अमीर हो रहे हैं इसके बावजूद वो कम खुश हैं.

फिनलैंड पिछले साल 5वें स्थान पर था. लेकिन इस साल उसने नॉर्वे को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान ले लिया. इस साल के टॉप-10 देशों में भी नॉर्डिक देशों का दबदबा रहा. टॉप-10 देशों में फिनलैंड, नॉर्वे, डेनमार्क, आइसलैंड, स्विटजरलैंड, नीदरलैंड, कनाडा, न्यूजीलैंड, स्वीडन और ऑस्ट्रेलिया रहे. अमेरिका का स्थान 18वां रहा. पिछले साल वो 14 वें स्थान पर था. ब्रिटेन का स्थान 19वां और यूनाइटेड अरब अमीरात का 20 वां स्थान रहा.

इस मामले में सबसे निचले पायदान पर सीरिया है जहां पर पिछले सात सालों से गृहयुद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है.

सांकेतिक तस्वीर


भारत में आत्महत्याएं

दुनिया भर में सालाना आत्महत्या के लगभग आठ लाख मामलों में 21 फीसदी भारत में होते हैं. केंद्र सरकार की ओर से जारी ताजा आंकड़ों में कहा गया है कि वर्ष 2015 के दौरान देश में कुल 1 लाख 33 हजार 623 लोगों ने आत्महत्या कर ली. यह तादाद वर्ष 2014 के मुकाबले डेढ़ फीसदी ज्यादा है. इस मामले में महाराष्ट्र का स्थान सबसे ऊपर है. इसमें कहा गया है कि देश में होने वालीं आत्महत्या की कुल घटनाओं में 51.2 फीसदी सिर्फ पांच राज्यों यानी महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक व मध्यप्रदेश में ही हुईं.

नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2014 में आत्महत्या करने वालों में 18 से 30 आयुवर्ग के युवाओं की तादाद सबसे ज्यादा 44,870 थी. उनके अलावा 14-18 वर्ष के 9,230 किशोर भी इनमें शामिल थे. डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में इस बात पर हैरत जताई गई थी कि भारत में आत्महत्या करने वालों में बड़ी तादाद 15 से 29 साल की उम्र के लोगों की है. एनसीआरबी के आंकड़ों से साफ है कि देश में आत्महत्या की दर दुनिया की औसत आत्महत्या दर के मुकाबले बढ़ी है.
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