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इस संत के चलते कृष्ण के साथ पत्नी रुक्मिणी के बजाय प्रेमिका राधा की होती है पूजा

कवि जयदेव ने 12 शताब्दी में गीतगोविंद की रचना की थी. इसके बाद से राधा-कृष्ण की पूजा में अचानक से एक संत के चलते उभार देखा गया. कौन थे ये?

कवि जयदेव ने 12 शताब्दी में गीतगोविंद की रचना की थी. इसके बाद से राधा-कृष्ण की पूजा में अचानक से एक संत के चलते उभार देखा गया. कौन थे ये?

कवि जयदेव ने 12 शताब्दी में गीतगोविंद की रचना की थी. इसके बाद से राधा-कृष्ण की पूजा में अचानक से एक संत के चलते उभार देखा गया. कौन थे ये?

  • News18Hindi
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    जयदेव के 'गीत गोविंद' में राधा और कृष्ण के प्रेम का वर्णन किया गया है. और यहीं से इनके मंदिरों में पूजे जाने के साक्ष्य मिलने भी शुरू होते हैं. हालांकि जयदेव से पहले भी ब्रह्मवैवर्त पुराण और पद्म पुराण में राधा और कृष्ण के प्रेम के उल्लेख मिलते हैं. इससे पहले कृष्ण की पूजा या तो अकेले होती थी या फिर उनके भाई, बहन या पत्नी के साथ.

    कुछ आदिकालीन मंदिरों में आज भी कृष्ण अपनी पत्नियों सत्यभामा या रुक्मिणी के साथ स्थापित हैं. इसके अलावा उड़ीसा के पुरी मंदिर में उनका जगन्नाथ रूप स्थापित किया गया है. जहां उनकी मूर्तियों के साथ वहां पर उनकी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र की मूर्तियां स्थापित हैं. 12वीं शताब्दी में एक आंदोलन के तौर पर निबार्क संप्रदाय ने श्रीकृष्ण और राधा की पूजा शुरू की और इसका प्रचार-प्रसार भी किया. जिसके बाद से काफी तेजी से उत्तर भारत में राधा और कृष्ण के मंदिर स्थापित होने और उनकी पूजा होनी शुरू हो गई.

    निम्बार्क संप्रदाय राधा को मानता है अलौकिक शक्ति
    किसी इंसान या देवता के तौर पर राधा को मानने की बजाए निम्बार्क संप्रदाय मानता है कि राधा शब्द आराधना से आया है. जिसका मतलब होता है पूजा करना. यानि श्रीकृष्ण की सबसे ज्यादा पूजा करने वाला राधा है. साथ ही यह संप्रदाय श्रीकृष्ण की शक्ति के रूप में भी राधा को मानता है. हिंदू धर्म में पुरुष देवता की शक्ति के तौर पर कई देवियों की पूजा होती है. ऐसे दैवीय जोड़ों में शंकर-पार्वती, राम-सीता और लक्ष्मी-विष्णु आदि प्रमुख हैं. इस संप्रदाय के ही निम्बार्काचार्य ने इस आराधना पद्धति के तहत राधा और कृष्ण की पूजा का रिवाज शुरू किया था. जो आगे चलकर पूरे भारत में फैल गया.

    इसके अलावा श्रीकृष्ण और राधा की साथ में पूजा करने वाले संप्रदायों में भागवत संप्रदाय, गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय, स्वामिनारायण संप्रदाय और वल्लभ संप्रदाय आदि प्रमुख हैं.

    लेकिन रुक्मिणी के साथ भी है श्रीकृष्ण के मंदिर
    यूं तो दुनियाभर में भगवान कृष्ण के कई मंदिर हैं. और इनमें से अधिकतर में उनके साथ राधा की पूजा होती है. कुछ मंदिरों में भगवान कृष्ण अपने बड़े भाई बलराम के साथ भी हैं. 16,108 पत्नियां होने के बाद भी भगवान कृष्ण को उनकी पत्नी के साथ बहुत ही कम मंदिर हैं, लेकिन महाराष्ट्र में पुणे से लगभग 200 किमी की दूरी पर एक गांव है, जहां श्रीकृष्ण का उनकी पत्नी रुक्मिणी के साथ मंदिर है. इसकी अपार मान्यता भी है. जिसके कारण हजारों भक्त इस मंदिर में आते हैं.


    ये हैं देश के सबसे प्रसिद्ध 8 कृष्ण मंदिर-
    1. श्रीकृष्ण जन्मभूमि (मथुरा)
    2. प्रेम मंदिर (वृंदावन)
    3. गोविंद देव मंदिर (जयपुर)
    4. जगन्नाथ मंदिर (पुरी)
    5. बांके बिहारी मंदिर (वृंदावन)
    6. उडुपी श्रीकृष्ण मंदिर (कर्नाटक)
    7. द्वारकाधीश मंदिर (गुजरात)
    8. श्रीनाथजी श्रीकृष्ण मंदिर (राजस्थान)

    यह भी पढ़ें : राम मंदिर मामले पर महंत का बयान- पहले विकास, तब होगा मंदिर निर्माण

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