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RBI के नए ATM नियमों से लगेगा आपकी जेब को झटका, जानिए क्या हैं ये नियम?

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर

ATM का संचालन करने वाली संस्था का कहना है कि अगर बैंक एटीएम कंपनियों के साथ बढ़े खर्च के बोझ को साझा करने के लिए तैयार नहीं होते तो देश के आधे एटीएम बंद करने पड़ेंगे.

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    पिछले बुधवार को भारत में ATM की देखरेख करने वाली संस्था कॉन्फिडरेशन ऑफ एटीएम इंडस्ट्री (CATMi) ने डर जताया था कि भारत के कुल 2.38 लाख ATM में से 1.3 लाख एटीएम मार्च तक बंद हो सकते हैं. इसके पीछे उसने RBI के बदले हुए नियमों का हवाला दिया था. CATMi का कहना था कि इन नियमों के चलते एटीएम को चलाने में आने वाला खर्च बढ़ जाएगा. ऐसे में अगर बैंक एटीएम कंपनियों के साथ इस खर्च के बोझ को साझा करने के लिए तैयार नहीं होते तो देश के आधे एटीएम बंद करने पड़ेंगे.

    रिजर्व बैंक के नए नियमों में हुए बदलाव क्या हैं?
    अप्रैल में RBI ने एटीएम चलाने वाली कंपनियों के लिए एक नोटिफिकेशन जारी की थी. इसके हिसाब से इन कंपनियों को लाइसेंस दिए जाने के लिए कम से कम 100 करोड़ की नेट वर्थ और कम से कम 300 गाड़ियां रखना जरूरी था. इसके साथ ही कैश डालने के लिए ले जाते हुए लूट आदि के खतरे को कम करने के लिए RBI ने लॉक की जा सकने वाली कैसेट्स (ऐसे छोटे-छोटे बॉक्स जिनमें अलग-अलग तरह के नोट रखे जा सकें) होना भी जरूरी कर दिया था.

    इनके जरिए आसानी से एटीएम में पैसे डाले जा सकते थे. कंपनियों से यह भी कहा गया था कि वे खुले में पैसे ले जाने के बजाए वे ऐसे ही कैसेट्स में पैसे लेकर जाएं. हर साल कम से कम देश के 1/3 एटीएम में यह व्यवस्था लागू करने की बात कही गई थी. ताकि 31 मार्च, 2021 तक देश के सभी एटीएम में यह व्यवस्था लागू की जा सके.

    अगस्त में गृह मंत्रालय ने यह नियम भी जारी किया था कि शहरों में रात 9 बजे के बाद एटीएम में रुपये नहीं डाले जाएंगे. इसके अलावा कैश ले जाने वाली वैन एक बार में 5 करोड़ से ज्यादा रुपये नहीं लेकर जाएगी. इसके अलावा जिस वैन में पैसे ले जाए जा रहे हैं, उसमें सिक्योरिटी अलार्म, GSM आधारित ऑटो डायलर, मोटराइज्ड सायरन, ट्यूबलेस टायर आदि होना जरूरी है. इसके अलावा वैन में कम से कम दो गार्ड भी होने चाहिए.

    इन सब पर कितना खर्च आने वाला है?
    इंडस्ट्री से जुड़े हुए सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा कि हर एटीएम में ले जाकर पैसे डालने में 9,000 से 10,000 तक खर्च आता है. और नए नियमों को लागू किए जाने पर हर महीने यह खर्च 3,900 रुपये तक बढ़ जाएगा. वो भी तब जब इसमें कैसेट्स के जरिए पैसे डालने के नियम को लागू न किया जाए. अगर उसे भी जोड़ा जाए तो हर एटीएम पर कुल मिलाकर एक्सट्रा 5,000 रुपये खर्च करने होंगे.

    यानी जो खर्च अभी 9,000 से 10,000 तक रहता है वो 15,000 प्रति एटीएम पहुंच जाएगा. एटीएम इंडस्ट्री ने इस बारे में कहा है कि अगर बैंक आगे आकर इस खर्च का साझा करने की पहल नहीं करते तो हो सकता है एटीएम में पैसे डालने वाली कंपनियां घाटे को देखते हुए अपने कांट्रेक्ट सरेंडर कर दें. जिनके चलते देश भर में बड़ी संख्या में एटीएम बंद हो जाएंगे.

    बैंकों की हालत कैसी है?
    फिलहाल दूसरे बैंक के एटीएम से रुपये निकालने पर एटीएम वाला बैंक, ग्राहक के बैंक से 15 रुपये 'इंटरचेंज फीस' वसूलता है. हालांकि अगर ग्राहक दूसरे बैंक के एटीएम से कैशलेस ट्रांजैक्शन करे तो 'इंटरचेंज फीस' 5 रुपये ही होती है. अगर कोई ग्राहक पहले से निर्धारित कोटा से ज्यादा बार दूसरे बैंक के ATM से पैसे निकालता है तो बैंक इंटरचेंज फीस सीधे ग्राहक से ही वसूलता है यानि आपको कुछ फ्री ट्रांजैक्शन करने के बाद हर ट्रांजैक्शन पर एकस्ट्रा फीस देनी होती है.

    फिलहाल एटीएम सर्विस प्रोवाइडर को हर एटीएम ट्रांजैक्शन पर औसतन 8 से 9 रूपये मिलते हैं. CATMi ने शिकायत की थी कि एटीएम सर्विस देने वाली कंपनियों का रेवेन्यू बिल्कुल भी नहीं बढ़ रहा है क्योंकि ये इंटरचेंज फीस बहुत कम है और एटीएम सर्विस देने का खर्च दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है. और इसमें आरबीआई के नए नियमों के बाद और भी बढ़ोत्तरी होने वाली है.

    बैंक इस बारे में क्या कहते हैं?
    एटीएम इंडस्ट्री चाहती है कि इंटरचेंज फीस को 15 रुपये से बढ़ाकर 24 रुपये कर दिया जाए. हालांकि यह देखा गया है कि पब्लिक सेक्टर बैंक अपने ग्राहकों पर और बोझ डालने के में खुद को असमर्थ पा रहे हैं. कुछ बैंकों, जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने एक वक्त ग्राहकों से 25 रूपये वसूलने शुरू किए थे लेकिन ग्राहकों की बहुत आलोचना के बाद उसे वापस इस फीस को 15 रूपये पर लाना पड़ा. आरबीआई भी इस फीस को बढ़ाने पर सहमत नहीं है.

    वहीं बैक और सर्विस प्रोवाइडर कह रहे हैं कि आरबीआई के 21 जून, 2018 के सर्कुलर के हिसाब से अगर प्रक्रियाओं में बदलाव किए जाते हैं तो उनका खर्च बढ़ जाएगा. इंडियन बैंक्स एसोसिएशन जो कि बैंक मैनेजमेंट की प्रतिनिधि संस्था है इस मसले पर विचार कर एक नई फीस तय करने की कोशिश करने वाली है जो सारे स्टेकहोल्डरों को मंजूर हो. इन स्टेकहोल्डरों में ग्राहक भी शामिल होंगे. बैंक कहते हैं कि हालांकि उन पर बढ़े हर खर्च को उन्हें ग्राहकों से वसूलना होगा.

    यानी हो सकता है आपको हर ट्रांजैक्शन पर फीस देनी पड़े. या अभी की तरह ही कुछ फ्री ट्रांजैक्शन के बाद बढ़ी हुई फीस देनी पड़े.

    क्या होगा अगर मुद्दा नहीं सुलझा?
    देश के कम से कम 1.13 लाख ऐसे एटीएम बंद हो जाएंगे, जिनकी देखरेख सर्विस प्रोवाइडरों के जिम्मे है. इन एटीएम में से ज्यादातर एटीएम टियर 4 और टियर 5 क्षेत्रों में होंगे. यानि ग्रामीण इलाकों में. जिनके बंद होने से बैंकों में ग्राहकों की संख्या करीब 30 फीसदी तक बढ़ने के आसार हैं. साथ ही इससे बैंककर्मियों पर ग्राहकों का बोझ भी बढ़ेगा.

    इससे सरकार की वित्तीय समावेशन की नीतियों को भी झटका लगेगा. मतलब प्रधानमंत्री जनधन योजना आदि से लाभ पाने वाले लोगों को भी इसका नुकसान उठाना होगा.

    इसी के चलते कई सारी आर्थिक संस्थाएं मिलकर इस मुद्दे का समाधान निकालने में जुटी हैं.

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