जानें क्या है बलूचिस्तान का संघर्ष, पिछले 73 सालों से क्यों पाकिस्तान से अलग होना चाहता है

जानें क्या है बलूचिस्तान का संघर्ष, पिछले 73 सालों से क्यों पाकिस्तान से अलग होना चाहता है
बलूचिस्तान के झंडे के साथ एक चरमपंथी

पाकिस्तान से अलग होकर बलूचिस्तान को नया देश बनाने की मांग आज फिर तब खबरों में आ गई जबकि बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के चरमपंथियों ने पाकिस्तान के स्टाक एक्सचेंज पर जोरदार हमला किया. बलूचिस्तान के लोग पिछले 73 सालों से अलग देश की मांग करते रहे हैं

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पाकिस्तान के लाहौर शहर में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के चरमपंथियों ने हमला किया. इसमें चारों आतंकियों समेत 10 लोगों के मारे जाने की खबर है. दरअसल भारत के बंटवारे के समय से ही बलूचिस्तान के लोग अलग देश की मांग करते रहे हैं. उन्होंने कभी पाकिस्तान के साथ रहना मंजूर नहीं किया है.इसे लेकर वो लगातार संघर्ष चला रहे हैं. बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी इस मांग के समर्थन में एक चरमपंथी संगठन है, जो पिछले कुछ सालों से पाकिस्तान में गतिविधियां करके हुए आजाद मुल्क की मांग करता आया है.

क्षेत्रफल के हिसाब से बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, हालांकि चारों प्रांतों के मुक़ाबले वहां की आबादी सबसे कम है.इसकी सीमाएं ईरान और अफ़ग़ानिस्तान से मिलती है. ये प्राकृतिक संसाधनों से मालामाल है. वहां गैस, कोयला, तांबा और कोयला के बड़े भंडार है. लेकिन अब भी बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे ग़रीब प्रांत है.

चीन कर रहा है यहां से प्राकृतिक संसाधनों का दोहन
हाल के बरसों में पाकिस्तान ने यहां चीन के साथ कई प्रोजेक्ट्स शुरू किये हैं और साथ ही ये दोनों मिलकर प्रचुर मात्रा में वहां से प्राकृतिक संसाधनों का दोहन भी कर रहे हैं. बलूचिस्तान के रेतीले इलाकों में यूरेनियम,पेट्रोल,प्राकृतिक गैस, तांबा और कई अन्य धातुओं के भंडार छिपे हैं. इसका बलूचिस्तान के लोग विरोध करते रहे हैं. बलूचिस्तान को अलग राष्ट्र के तौर पर जो देश समर्थन देते रहे हैं, उसमें भारत और इजरायल शामिल हैं.



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पाकिस्तान पर उत्पीड़न का आरोप
बलोच राष्ट्रवादी नेताओं का आरोप है कि पाकिस्तान की केंद्रीय सरकार उनका उत्पीड़न कर रही है. उन्हें उनके वाजिब अधिकार उन्हें नहीं दे रही. पाकिस्तान का कहना है कि वो बलूचिस्तान में अलगावादियों के ख़िलाफ़ लड़ाई जीत रहा है जबकि बलोच कार्यकर्ताओं का कहना है कि पाकिस्तानी सेना वहां अपहरण, उत्पीड़न और हत्याएं कर रही है जिसके कारण वहां पाकिस्तान के ख़िलाफ़ भावनाएं भड़क रही हैं.

क्षेत्रफल के लिहाज से बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत जरूर है लेकिन सबसे उपेक्षित भी


दशको से नाराज हैं पाकिस्तान से
बलूचिस्तान के लोगों में नाराज़गी दशकों से रही है लेकिन चरमपंथ की ताज़ा लहर 2006 में उस वक़्त शुरू हुई जब पाकिस्तानी सेना ने बलोच क़बायली नेता नवाब अकबर बुगती को मार दिया था.

आम लोगों का समर्थन अलगाववादियों को
अलगाववादियों का कहना है कि वो आज़ाद बलूचिस्तान के लिए लड़ रहे हैं. मुख्यत: पहाड़ों में इन लोगों के ठिकाने हैं और वहीं से ये काम करते हैं, लेकिन बताया जाता है कि आम लोगों में भी उन्हें अच्छा ख़ासा समर्थन प्राप्त है.

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ये कभी पाक हुकूमत में पूरी तरह रहा भी नहीं
असल में बलूचिस्तान वह प्रांत है जो कभी पूरी तरह पाक हुकूमत के नियंत्रण में नहीं रहा. यहां जरदारी सरकार से ज्यादा कबीलाई सरदारों की चलती है. इन लड़ाकू कबीलों का अपना अलग कानून है, जिसके तहत हाथ के बदले हाथ और सिर के बदले सिर काटने की परंपरा है.

1970 के दशक में यहां बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी बनी. ये अलग देश की मांग को लेकर लगातार गतिविधिया करती रही है


1947 से ही आजादी का मांग
बलूच अलगाववादियों और पाक सरकार के बीच अलगाव के विवाद की शुरुआत पाकिस्तान के निर्माण के साथ ही हो गई थी. अप्रैल 1948 में पाक सेना ने मीर अहमद यार खान को जबरन अपना राज्य कलात छोड़ने पर मजबूर कर दिया. उनसे कलात की आजादी के खिलाफ एग्रीमेंट साइन करवा लिए गए लेकिन मीर अहमद के भाई प्रिंस अब्दुल करीम खान नहीं चाहते थे कि बलूचिस्तान का 23 प्रतिशत क्षेत्र पाकिस्तान के अधीन हो. मई 1948 में अब्दुल करीम खान ने पाक सरकार के खिलाफ अलगाव का बिगुल फूंक दिया.तब से ये संघर्ष लगातार चल रहा है.

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सामरिक महत्व भी है इस इलाके का
अरब सागर के किनारे और होमुज जलसंधि के करीब होने के कारण यह इस प्रांत को सामरिक तौर पर काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. यह ईरान के पूर्व तथा अफगानिस्तान के दक्षिण में स्थित है. कतर,ईरान या तुर्कमेनिस्तान से कोई गैस या तेल की पाइपलाइन गुजरेगी तो उसे बलूचिस्तान से होकर जाना होगा.
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