क्या दो डोज़ के बीच गैप बढ़ाने से ज़्यादा असरदार होती है वैक्सीन?

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Covid-19 Vaccine Updates : सभी विशेषज्ञ सहमत हैं कि कोरोना के खिलाफ वैक्सीन अनमोल भी है, सीमित भी, तो इस्तेमाल चतुराई से किया जाना चाहिए. इधर, दुनिया भर की स्टडीज़ (Scientific Research) कह रही हैं कि चतुराई यही है कि गैप बढ़ाया जाए.

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भारत में Covid-19 के खिलाफ चल रहे टीकाकरण (Vaccination in India) के सिलसिले में यह बात दोहराई जा चुकी है कि वैक्सीन के दो डोज़ दिए जाएंगे और इनके बीच 28 दिनों का गैप होगा. कोरोना वायरस की वैक्सीनों को लेकर लगातार दुनिया भर में अध्ययन चल रहे हैं और ताज़ा स्टडीज़ (Vaccine Related Studies) को देखा जाए तो कई वैज्ञानिकों ने माना है कि दो डोज़ के बीच के अंतर को बढ़ाया जाना चाहिए, वो भी तीन महीने तक. इस गैप को क्या देश के मुताबिक अलग-अलग अवधि के लिए बढ़ाना होगा या फिर वैक्सीन के ​हिसाब से यह तय होगा?

अब तक भारत में 1.43 करोड़ से ज़्यादा लोगों को वैक्सीन दी जा चुकी है. दूसरा डोज़ दिए जाने की शुरूआत 13 फरवरी से हो चुकी है. इस बीच, वैक्सीन के असर को लेकर देश में चल रही स्टडीज़ के फेज़ 3 में पाया गया कि दूसरा डोज़ दिए जाने का गैप चार से छह हफ्तों तक होना चाहिए. जानिए यह पूरा माजरा क्या है.

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क्या कह रही हैं रिसर्च?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के सलाहकार समूह ने 10 फरवरी को सुझाव दिया था कि यह गैप 8 से 12 सप्ताहों का होना चाहिए. इसके बाद, स्वास्थ्य सेक्टर में रिसर्च के लिए मशहूर पत्र लैंसेट में प्रकाशित एक स्टडी में कहा गया कि ऑक्सफोर्ड व एस्ट्राज़ेनेका की वैक्सीन सबसे ज़्यादा असरदार तभी साबित हो सकती है जब दो डोज़ के बीच तीन महीने का गैप हो. यह वही वैक्सीन है, जो भारत में कोविशील्ड के नाम से अप्रूव हुई है.

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न्यूज़18 क्रिएटिव


वैक्सीन वैज्ञानिक डॉ. गगनदीप कांग के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा कि दुनिया भर में चल रहे अध्ययनों की मानें तो दो डोज़ों के बीच गैप बढ़ाने से 20% से 30% तक वैक्सीन ज़्यादा असरदार हो सकती है. वहीं, लैंसेट में प्रकाशित स्टडी के लेखक ऑक्सफोर्ड प्रोफेसर एंड्रयू पोलार्ड के शब्दों को भी समझा जाना चाहिए :

ऐसे में जबकि वैक्सीन की सप्लाई सीमित है, तब वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित अगर नीतियां बनाई जाएं तो जल्दी बड़ी आबादी को एक डोज़ से सुरक्षा मिल सकती है. यानी आधी या कम आबादी को दो डोज़ की सुरक्षा देने के मुकाबले यह बेहतर कदम होगा.


इन स्टडीज़ में यह बात भी साफ तौर पर सामने आई है कि पहला डोज़ दिए जाने पर वायरस के खिलाफ औसतन 70% सुरक्षा मिल सकती है.

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क्या है वैज्ञानिकों की सलाह?
वैज्ञानिकों का कहना यही है कि लैंसेट की स्टडी से पता चल रहा है कि पहले डोज़ से एक समय के लिए वैक्सीन प्रोटेक्शन देने में असरदार है. डॉ. कांग का कहना है कि सरकार को इस बारे में सजगता से विचार कर नीति बनाना चाहिए. अगर डोज़ के बीच गैप बढ़ाने से असर 20% बढ़ रहा है, तो इसे अमल में लाया जाना चाहिए. इससे बड़ी आबादी में नए संक्रमण मामलों को रोका जा सकता है.

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यही नहीं, कोविशील्ड उत्पादक सिरम इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिकों ने भी यह देखा कि गैप ज़्यादाद होने से वैक्सीन बेहतर ढंग से असरदार साबित होती है. और यह केवल एक नहीं, बल्कि तकरीबन सभी वैक्सीनों के मामले में एक फैक्ट की तरह सामने आ रही बात है. वहीं, महाराष्ट्र में कोविड-19 टास्क फोर्स के डॉ. शशांक जोशी के मुताबिक 8 से 12 हफ्तों का गैप बेहतर नतीजे दे रहा है और यूके सरकार की तरह भारत को भी यही स्ट्रैटजी अपनाने से बेशक फायदा होगा.

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क्या है सिस्टम की सोच?
इन वैज्ञानिक अध्ययनों के मामले में भारतीय पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन के प्रमुख प्रोफेसर संजय राय का कहना है कि ऑब्ज़र्वेशनल स्टडी के मुकाबले क्लिनिकल ट्रायलों को ज़्यादा तवज्जो दी जाना चाहिए. केंद्रीय ड्रग रेगुलेटर ने जो अवधि तय की है, उसी के मुताबिक चलना चाहिए, जब तक इस बारे में और ठोस सबूत न मिल जाएं.
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