कोरोना वायरस की वजह से दुनिया में सर्वाधिक डेथ रेट ब्रिटेन में क्यों है?

कोरोना वायरस की वजह से दुनिया में सर्वाधिक डेथ रेट ब्रिटेन में क्यों है?
यूके में कोरोना वायरस की वजह से मौत के मामलों में कमी आई है.

तकरीबन 19 देशों से तुलना के आधार पर बनाई गई एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ब्रिटेन (Britain) में कोरोना वायरस (Corona Virus) की वजह से डेथ रेट (Death Rate) सबसे ज्यादा है. आइए जानते हैं कि ब्रिटेन से चूक कहां हुई?

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दुनिया में कोरोना वायरस की वजह से सबसे ज्यादा मौतें भले ही अमेरिका में हुई हों लेकिन सबसे ज्यादा डेथ रेट ब्रिटेन में रहा है. एक नए आंकड़े में इस बात का खुलासा हुआ है. कोरोना वायरस की बुरी मार झेलने वाले ब्रिटेन में 20 मार्च से अब तक महामारी की वजह से 59,537 लोगों ने जान गंवाई है. यानी प्रति दस लाख आबादी पर 891 लोगों की मौत हुई है. ब्रिटेन का ये आंकड़ा दुनिया के किसी भी देश से ज्यादा है.

फाइनेंशियल टाइम्स की इस रिपोर्ट के लिए 19 देशों की राष्ट्रीय स्टैटिस्टिकल एजेंसीज से मदद ली गई है. डेथ रेट के निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए पर्याप्त डेटा जटाए गए हैं. इस रिपोर्ट में उन सभी यूरोपीय देशों को शामिल किया गया है जिनमें कोरोना वायरस का तगड़ा प्रभाव पड़ा. गौरतलब है कि कोरोना से बुरी तरह प्रभावित स्पेन और इटली में ब्रिटेन से कम मौतें हुई हैं. अब इन देशों में स्थितियां सामान्य होने लगी हैं. और अगर सेकंड वेव नहीं आई तो ब्रिटेन में हुई मौतों का आंकड़ा इन देशों से हमेशा ज्यादा रहेगा.

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ब्रिटेन में बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मी भी कोरोना की चपेट में आए हैं.




अन्य देशों की बात की जाए तो चीन, ब्राजील और रूस में भी कोरोना की वजह से काफी मौतें हुई हैं लेकिन इन देशों में डेथ रेट ब्रिटेन के मुताबले काफी कम है. रिपोर्ट के मुताबिक जिस भी देश में कोरोना वायरस को रोकने के लिए लॉकडाउन के फैसले में देरी की गई, वहां पर कुल मौतों की संख्या काफी ज्यादा रही है. ब्रिटेन और अमेरिका इसके उदाहरण हैं. ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देश जहां पर वायरस के हल्के प्रभाव के दौरान ही सख्त लॉकडाउन के फैसले ले लिए गए थे वहां पर मौतों की संख्या अपेक्षाकृत कम है. हालांकि ब्रिटिश सरकार के प्रवक्ता ने रिपोर्ट को यह कहते हुए खारिज किया है कि अभी नतीजे निकालना जल्दीबाजी होगी. कहा गया है कि यह सच है कि हमें वायरस के खिलाफ रेस्पॉन्स देने के मामले में काफी कुछ सीखना है लेकिन मौतों को लेकर नतीजे निकालने में अभी थोड़ा समय लेना चाहिए. ये काम कुछ समय बाद वैश्विक प्रयासों के जरिए किया जा सकता है.



कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर David Spiegelhalter का कहना है कि अगर आंकड़ों पर भरोसा करें तो हमने ज्यादा लोगों को खो दिया है. कहा जाता है कि ब्रिटेन ने अपनी तैयारियों में कमी रखी. इस बात की चिंता की जानी चाहिए अगर यही हालात रहे तो आने वाले समय में क्या होगा.

ब्रिटेन के नेता ने कहा है कि हमने लॉकडाउन करने में काफी देर कर दी. हमारी टेस्टिंग की रफ्तार धीमी रही और मेडिकलकर्मियों तक पीपीई किट पहुंचाने में भी देरी हुई. हम अपने अस्पतालों को भी ठीक तरीके से नहीं बचा सके. उनका इशारा ब्रिटेन में स्वास्थ्यकर्मियों को मेडिकल उपकरणों की कमी तरफ था.

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ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है कि ऐसी रिपोर्ट्स की अभी कोई महत्ता नहीं है. हमें ऐसे आंकड़ो के लिए रुकना चाहिए.


ब्रिटेन और इटली की तुलना करने पर पता चलता है कि एक तरफ इटली में कोरोना वायरस देश के उत्तरी इलाकों तक ही सीमित था तो वहीं ब्रिटेन में इसका प्रभाव पूरे देश में पड़ा. वहीं फ्रांस में वायरस में राजधानी पेरिस के अलावा बस एक और हॉटस्पॉट शहर था. फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर नताली डीन का कहना है कि इटली में संक्रमण फैलने के बाद ब्रिटेन के पास तैयारी के लिए समय था, लेकिन दुखद रूप से ऐसा नहीं किया गया. वो कहती हैं मैं आश्चर्य में पड़ गई थी जब मैंने देखा था कि ब्रिटेन लॉकडाउन के फैसले में देरी कर रहा था. गौरतलब है कि डेथ रेट को दुनियाभर के एक्सपर्ट्स कोरोना वायरस की गंभीरत मापने का सबसे सटीक पैमाना मान रहे हैं.

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First published: May 28, 2020, 8:31 PM IST
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